- घर और बिल्डिंग की दीवारों को गंदगी से बचाने के लिए लोग ले रहे भगवान का सहारा

- लोगों के पास नहीं है पीके के सवालों के जवाब

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- घर और बिल्डिंग की दीवारों को गंदगी से बचाने के लिए लोग ले रहे भगवान का सहारा

- लोगों के पास नहीं है पीके के सवालों के जवाब

vineet.tiwari@inext.co.in

ALLAHABAD: vineet.tiwari@inext.co.in

ALLAHABAD: इंसान भी कितना मतलब परस्त है. अपने फायदे के लिए भगवान का यूज करने से भी पीछे नहीं हटता. अगर ऐसा नहीं होता तो घरों व बिल्डिंग की दीवारों और सीढि़यों पर भगवान की फोटो न दिखाई पड़ती. लोग पान की पीक न थूकें या टायलेट न करें, इससे बचने के लिए लोग फोटो का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे भी ज्यादा दोषी हैं वह लोग जो मौका देखते ही गंदगी फैलाने से नहीं चूकते. ऐसे लोगों को तो अब भगवान से भी डर नहीं लगता है. उन्होंने बेशर्मी की सारी हदें पार कर दी हैं. गुरुवार को पीके बने आई नेक्स्ट के रिपोर्टर ने भगवान की फोटों दीवारों पर लगी देखीं. उसके मन में भगवान के भक्तों को लेकर कई सवाल मन में उठने लगे, जिनका जवाब शायद आज किसी के पास मौजूद नहीं है.

ये लीजिए, फिर भी नहीं माने लोग

गुरुवार को पीके सीधे नवाब युसुफ रोड स्थित एक बिल्डिंग में पहुंचा तो देखा कि एक मोबाइल सर्विस सेंटर के लिए जाने वाली सीढ़ी के दोनों ओर आधा दर्जन से अधिक भगवान के फोटो लगे हुए हैं. निश्चित तौर पर लोगों के पान और गुटखे की पीक से दीवारों को बचाने के लिए ऐसा किया गया है. बावजूद इसके लोग कहां मानने वाले हैं. उन्होंने तो निशाना बनाकर फोटो के आसपास जमकर गंदगी फैलाई है. जब इस बारे में आसपास के लोगों से पूछा गया तो उनके पास खास जवाब मौजूद नहीं था.

हॉस्पिटल को साफ-सुथरा रखने का तरीका

वह तो कामर्शियल बिल्डिंग का मामला था. एसआरएन हॉस्पिटल की सीढि़यों पर भी भगवान के फोटो वाले टाइल्स लगाए गए हैं. पीके ने पूछताछ की तो पता चला कि हॉस्पिटल के पूर्व एसआईसी डॉ. यूएस सिन्हा ने यह तरकीब निकाली थी. लोग सीढि़यों पर गंदगी न फैलाएं इसके लिए फोटो लगाने के साथ भगवान की मूर्तियां भी रखी गई थीं. बाद में मूर्तियां खंडित हो गई तो उन्हें हटा दिया गया. फोटो आज भी दीवार पर लगी हुई है. हालांकि जहां फोटो लगी है वहां पर लोगों ने गंदगी नहीं फैलाई है.

ये लोग तो जुर्माने से भी नहीं डरते

पीके को पता चला कि इधर-उधर थूकने और टायलेट करने वाले तो बड़े दबंग हैं. उन पर तो पैसे की पेनाल्टी लगाने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता है. नगर निगम, एडीए, विकास भवन, रेलवे स्टेशन आदि जगहों पर पान खाकर थूकने पर भ्00 रुपए तक की पेनाल्टी लगाई गई है लेकिन इसका ऐसे लोगों पर कोई फर्क नहीं पड़ता. इन विभागों ने कुछ लोगों से जुर्माना जरूर वसूला लेकिन गंदगी फैलाने की आदत खत्म नहीं हुई. अब ऐसे दबंग लोगों का दिमाग ठिकाने लगाने के लिए मौका परस्त लोगों ने भगवान को ही आगे कर दिया है. जहां गंदगी फैलने की आशंका होती है वहां भगवान की फोटो बतौर पहरेदार लगा दी जाती है. वाह रे भगवान के भक्त.

बेशर्मी की तो हद हो गई है

भगवान के नाम पर हो-हल्ला करने वालों के लिए गंदगी से बचाव के लिए दीवार पर भगवान की फोटो लगाना आम बात हो गई है. बातें बड़ी-बड़ी करेंगे लेकिन अपने फायदे के लिए भगवान का डर दिखाने से जरा भी पीछे नहीं हटेंगे. पीके के मन में सवाल आया कि क्या भगवान केवल इसी काम के लिए बचे हैं. अब वह राह चलते गंदगी फैलाने वालों के पहरा देंगे? या वह लोग टायलेट जाने के बजाय सड़क किनारे यूरिन फैलाते हैं उनको मैनर्स कब आएगा? घरों की दीवारों और सीढि़यों के कोनों पर उनकी पीक की पिचकारी मारने की आदत कब बंद होगी?

पब्लिक दे रही है पीके का साथ

-मुझे पीके की बात समझ में आती है क्योंकि उसने बताया कि किस तरह ढोंगी बाबा जनरल पब्लिक को बेवकूफ बना रहे हैं. जिनको अपने फ्यूचर का नॉलेज नहीं है वह दूसरों का भविष्य बताने का दावा करते हैं. जो लोग पीके का विरोध कर रहे हैं अगर वह इस मूवी को पॉजिटिवली देखें तो उन्हें अच्छी इंफॉर्मेशन जरूर मिलेगी.

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-लोगों को जागरुक करने में मीडिया का अहम योगदान है. मीडिया हमेशा से लोगों को सही शिक्षा देकर अंधविश्वास से उबारने में अहम भूमिका निभाता आया है. आई नेक्स्ट के गुरुवार के अंक में मुनव्वर शाह बाबा की मजार से जुड़ी दोनों घटनाओं ने आंखे खोलने का काम किया है. हमें इन घटनाओं से सीख लेनी चाहिए. इस एफर्ट के लिए आई नेक्स्ट की टीम बधाई की पात्र है.

पुनीता शुक्ला

- अंधविश्वास से बचना जरूरी हो गया है. अगर लोग मानसिक रूप से बीमार लोगों को इधर-उधर ले जाने के बजाय सीधे डॉक्टर के पास ले जाएं तो आसानी से उन्हें ठीक किया जा सकता है. लोगों को सही रास्ता दिखाने की दिशा में पीके मूवी और आई नेक्स्ट बेहतर वर्क कर रहा है.

विकास

- पीके गजब की मूवी है. उसके जरिए हकीकत से पर्दा उठाने की कोशिश की गई है. बताया गया है कि हमें उस भगवान की पूजा करनी चाहिए जिसने हमें बनाया है. उस भगवान की पूजा न करें जिसे हमने तैयार किया है. लोगों में अवेयरनेस फैलाने के लिए आई नेक्स्ट टीम का भी धन्यवाद.

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- हम पीके मूवी की टीम के साथ आई नेक्स्ट टीम का भी दिल से वेलकम करते हैं. आप लोगों ने उन चीजों को मुद्दा बनाकर उठाया है जो समाज में बुराई की तरह फैली हैं. भगवान ने तो सिर्फ इंसान को बनाया है लेकिन हम सबने मिलकर अलग-अलग धर्म, ग्रंथ, कर्म, ऊंच-नीच आदि बनाकर सबको आपस में बांट दिया. पीके ने तो दिखाया है जिसकी कल्पना करने से मन में खुशी फील होती है.

रंजीत

- मैंने पीके मूवी तीन बार देखी है. हमें यह पता चला कि कि तरह ढोंगी बाबा आम जनता से झूठ बोलकर पैसे ऐंठ रहे है. हमें ऐसे लोगों के चक्कर में नहीं फंसना है.

अजय कुमार

- हिंदू धर्म में कुछ लोग पाखंड और झूठ की आड़ में लेागों को बेवकूफ बनाने का काम कर रहे हैं. उन्होंने अपने फायदे के लिए अंधविश्वास का सहारा लिया है. वह पब्लिक में डर पैदा करके अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं. ऐसा दूसरे धर्मो में भी हो रहा है. पब्लिक को जागरुक हो जाना चाहिए, ताकि उन्हें भगवान के नाम पर बेवकूफ बनाने वालों की पहचान हो सके.

भारतेंद त्रिपाठी

- पीके से हम पूरी तरह सहमत हैं. उसने बताया कि वाकई हम लोग रांग नंबर लगाते आ रहे हैं. इससे बचने के लिए अपनी आंखें खोलनी होंगी. आई नेक्स्ट को इस अभियान के लिए धन्यवाद.

प्रदीप सिंह

- आई नेक्स्ट ने मुनव्वर शाह बाबा की मजार पर पागलपन के इलाज अपनाए जा रहे तरीकों के बारे में छापकर बहुत अच्छा काम किया है. इससे लोगों को पता चलेगा कि मानसिक रोगियों को जंजीरों से बांधने से बेहतर है कि अच्छे डॉक्टर से इलाज कराया जाए. लोगों को अंधविश्वास से जगाने के लिए आई नेक्स्ट और पीके को धन्यवाद.

उर्मिला देवी