नई दिल्ली (जेएनएन)। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किला की प्रचीर से देशवासियों को संबोधित किया। पीएम मोदी के संबोधन में एक ओर जहां सरकार की उपलब्धियां गिनाई, वहीं भविष्य की योजनाओं का भी खाका खींचा। उन्होंने कहा कि देश की महत्वाकांक्षाएं बदल रही हैं और अब लोग सिर्फ रेलवे स्टेशन के बनाने के प्रस्ताव से ही खुश नहीं होते हैं, वे अब पूछते हैं कि वंदे भारत एक्सप्रेस कब चलाई जाएगी। पीएम मोदी ने कहा कि लोग अच्छा रेलवे स्टेशन या बस अड्डे से ही खुश नहीं होते हैं पूछते हैं कि हवाई अड्डा कब आएगा। वहीं पीएम मोदी ने आम लोगों से जुड़ी कई बातों का ऐलान किया है।

जनसंख्या नियंत्रण: छोटा परिवार रखने वाले देशभक्त की तरह

लाल किले से अपने संबोधन के दौरान जनसंख्या विस्फोट को लेकर पीएम चिंतित दिखे। उन्होंने देशवासियों से भी अपील की कि जनसंख्या पर अंकुश में वे सहयोग करें। हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए जनसंख्या विस्फोट कई समस्याओं का कारण बनेगा, लेकिन जनता की एक सतर्क श्रेणी ऐसी भी है जो एक बच्चे को दुनिया में लाने से पहले यह सोचते हैं कि वह उस बच्चे के साथ न्याय कर पाएंगे या नहीं, वह जो कुछ भी चाहता है उसे वह सबकुछ दे पाएंगे या नहीं। उनका परिवार छोटा है और वह इसके माध्यम से अपनी देशभक्ति जाहिर करते हैं। हमें उनसे सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि छोटे परिवार की नीति का पालन करने वाले राष्ट्र के विकास में अपना योगदान दे रहे हैं, यह भी देशभक्ति का एक रूप है।

पर्यावरण संरक्षण: प्लास्टिक की थैलियों को कहें ना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर स्वच्छता अभियान की तर्ज पर देश को पॉलीथीन मुक्त करने का एक बड़ा एलान किया। दो अक्टूबर को इसे लेकर देश भर में अभियान चलाने की अपील की है। इसके तहत एक बार इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक को इकट्ठा करने को कहा है। साथ ही लोगों से अपील की है, वह प्लास्टिक की जगह कपड़े या जूट के थैलों का इस्तेमाल करे। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पीएम मोदी की यह एक बड़ी पहल मानी जा रही है। लाल किले की प्राचीर से देशवासियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने देशवासियों को याद दिलाते हुए कहा 2014 में इसी लाल किले से उन्होंने लोगों से स्वच्छता की बात कही थी। इसी का परिणाम है कि देश अगले कुछ ही हफ्तों के बाद पूरी तरह से खुले में शौच से मुक्त हो जाएगा। पीएम ने ठीक इसी तर्ज पर लोगों से एक बार इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक को लेकर भी अभियान छेड़ने की अपील की।

स्वदेशी से बनेगा भारत: स्थानीय उत्पादों को ग्लोबल मार्केट में ले जाना है

भाजपा और संघ के एजेंडे में रहे स्वदेशी की झलक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को दिए गए अपने संबोधन में दिखा दी। उन्होंने इसे देश के विकास और निर्माण से भी जोड़ा। स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने अपील की सभी लोग देश में बनी चीजों को ही प्राथमिकता दें। एक नारा भी दिया- 'लकी कल के लिए लोकल, उज्ज्वल कल के लिए लोकल'। गौरतलब है कि संघ की ओर से बार बार स्वदेशी की बात बुलंद की जाती है। इसके अनुसार जो देश में बनता है भारतीयों को पहले उसका ही उपयोग करना चाहिए। हमें इन उत्पादों को ग्लोबल मार्केट में ले जाना है इससे रोजगार के भी अवसर पैदा होंगे।

डिजिटल अभियान : 'डिजिटल पेमेंट को हां, नगदी को ना'

डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के मकसद से पीएम मोदी ने लाल किले की प्राचीर से इस संदर्भ में नया नारा दिया। उन्होंने कहा कि अक्सर दुकानों में 'आज नकद-कल उधार' का बोर्ड देखने को मिलता है लेकिन व्यापारियों से आग्रह करते हैं कि अब वे इसके बजाय 'डिजिटल पेमेंट को हां, नकद को ना' का बोर्ड लगाएं। इससे डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा।  डिजिटल भारत अभियान पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमें डिजिटल पेमेंट की आदत डालनी चाहिए।

पर्यटन को बढ़ावा: हर परिवार साल में पांच स्थलों का करे भ्रमण

घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने एक बेहद महत्वपूर्ण अपील देशवासियों से की है जिसका दूरगामी व व्यापक असर देखने को मिल सकता है। पीएम मोदी ने सभी देशवासियों से मांग की है कि वह अपने परिवार के साथ वर्ष 2022 तक देश के कम से कम 15 पर्यटन स्थलों का भ्रमण करें। यह भ्रमण न केवल देश की युवा पीढ़ी को देश के विभिन्न हिस्सों से भावनात्मक रूप से जोड़ेगा बल्कि यह स्थानीय रोजगार व अर्थव्यवस्था को भी बहुत प्रोत्साहित करेगा। यह अपील एक तरह से उन लोगों के लिए संदेश भी है जो विदेश पर्यटन पर ज्यादा केंद्रित होते हैं। यूं तो मोदी पहले भी पर्यटन को प्राथमिकता देते रहे हैं लेकिन इस बार व्यापक संदेश है। उन्होंने कहा, 'अपने परिवार के साथ कम से कम 15 पर्यटन स्थलों पर जाएं। वहां कठिनाइयां होंगी तब भी जाएं। अच्छे होटल नहीं मिलेंगे तब भी जाएंगे। हम अपनी बच्चों में आदत डालें कि यही हमारा देश है। एक बार जाना शुरू करेंगे तो लोग वहां व्यवस्था भी डालनी शुरू कर देंगे।'

जल संरक्षण: शिक्षा कर्मी बचपन से ही पानी के महत्व को बताएं

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सरकार की प्राथमिकता को इस आधार पर समझा जा सकता है कि हमने नई सरकार के गठन के 70 दिन के भीतर ही जल शक्ति मंत्रालय बनाया। उन्होंने कहा कि सभी लोग जल के महत्व को समझें। किसान जल की हर बूंद से अधिक पैदावार की सोचें। शिक्षा कर्मी बचपन से ही पानी के महत्व को बताएं। पानी के क्षेत्र में 70 सालों में जो काम हुआ है, हमें पांच साल में उसका चौगुना काम करना होगा। हम और ज्यादा इंतजार नहीं कर सकते हैं।

Posted By: Abhishek Kumar Tiwari

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