- आईटी पार्क में मिले दो नवजात बच्चे भर्ती हैं दून हॉस्पिटल में

DEHRADUN : 11 दिन पहले आईटी पार्क एरिया में मिले दो नवजात बच्चों के आसरे को लेकर दुविधा बनी हुई है. भले ही दर्जनों लोग उन्हें एडॉप्ट करने के लिए दौड़-भाग कर रहे हों लेकिन सरकारी संस्थानों में उन्हें जगह नहीं मिल पा रही है. दून हॉस्पिटल बच्चों को स्वस्थ बता रहा है और डिस्चार्ज करना चाहता है, वहीं जिला बाल कल्याण समिति दोनों बच्चों को अपने साथ ले जाने में असमर्थता जता रही है. इस बीच एक ही ऑप्शन बचता है शिशु निकेतन, लेकिन बताया जा रहा है कि शिशु निकेतन में भी शिशुओं को रखने के लिए उचित व्यवस्था अभी नहीं हो पाई है.

 

हॉस्पिटल चाहता है शिफ्ट हों बच्चे

बच्चों की देखरेख कर रहे डॉ. संजीव अरोड़ा के अनुसार दोनों बच्चे पूरी तरह से स्वस्थ हैं. हॉस्पिटल चाहता है जिला बाल कल्याण समिति बच्चों को शिशु निकेतन ले जाए. दून महिला हॉस्पिटल की ओर से इस संबंध में सीडब्ल्यूसी को पत्र भी लिखा जा चुका है. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यहां कई तरह के बीमार बच्चे आते हैं, ऐसे में दोनों स्वस्थ बच्चे बीमार पड़ सकते हैं.

 

शिशु निकेतन की स्थिति ठीक नहीं

बताया जाता है कि शिशु निकेतन की स्थिति ऐसी नहीं है कि वहां इतने छोटे बच्चों को रखा जा सके और उनकी परवरिश की जा सके. यहां पहले भी बच्चों की मौत के मामले सामने आये हैं. इसके अलावा शिशु निकेतन में एक अधीक्षिका है, जबकि दो अधीक्षिकाओं की जरूरत है, ताकि हर समय कोई जिम्मेदार अधिकारी वहां रहे.

 

गोद लेने वालों की कतार

सरकारी संस्थानों में इस सब अव्यवस्था के बीच दोनों नवजातों को गोद लेने के लिए लोगों की लंबी कतार लगी है. दून हॉस्पिटल और शिशु निकेतन में लगातार लोग उन्हें गोद लेने के लिए संपर्क कर रहे हैं. बच्चे मिलने की खबर छपने के बाद ही दून हॉस्पिटल में दर्जनों लोग उन्हें गोद लेने के लिए पहुंच गये थे. ऐसे लोगों को गांधीग्राम की पूनम, डालनवाला के शहजाद, देहराखास के अजय, पटेलनगर की बीना वर्मा आदि कई लोग हैं जो अब भी इन बच्चों को गोद लेना चाहते हैं. लेकिन इसके लिए उन्हें लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा.

 

क्या कहते हैं जिम्मेदार

हॉस्पिटल में बीमार बच्चे रखे जाते हैं, स्वस्थ बच्चों को रखने का कोई मतलब नहीं है. स्वस्थ बच्चों को रखने का मतलब उन्हें जानबूझ कर संक्रमण का शिकार बनाना है. बच्चों को जल्द ले जाया जाना चाहिए.

डॉ. मीनाक्षी जोशी, प्रभारी, दून महिला हॉस्पिटल.

 

हम बच्चों को लेने के लिए तैयार हैं. शिशु निकेतन में इसके लिए पूरी व्यवस्था है. पहले से कई बच्चे रह रहे हैं. यदि डॉक्टर्स कहें और जिला बाल कल्याण समिति की ओर से हमें आदेश मिलते हैं तो हम बच्चों को शिशु निकेतन भेजने के लिए तैयार है.

-मीना बिष्ट, जिला प्रोबेशन अधिकारी

 

मैं शिशु निकेतन गई थी, लेकिन वहां स्थिति फिलहाल इतने छोटे बच्चों को रखने के योग्य नहीं है. कुछ व्यवस्थाएं ठीक करने की जरूरत है. इसके बाद ही जिला बाल कल्याण समिति की बैठक में सलाह-मशवरे के बाद बच्चों को शिशु निकेतन में रखने की संस्तुति दी जा सकती है.

कविता शर्मा, अध्यक्ष, जिला बाल कल्याण समिति