- वारदात को 36 घंटे बीत जाने के बावजूद भी कंकरखेड़ा पुलिस गंभीर नहीं

- केवल पुराने गैंगों पर वर्क कर रही है पुलिस, नहीं दे रही अहम बिंदुओं पर ध्यान

- पुलिस ने नहीं बनवाए स्केच, नहीं मांगी आसपास लगे सीसीटीवी की फुटेज

meerut@inext.co.in

Meerut: अगर डकैत बेधड़क होकर खुले चेहरों के साथ वारदात को अंजाम देते हैं तो इसके कई मायने हो सकते हैं. एक, बदमाशों को इस बात का यकीन था कि उन्हें कोई पहचान नहीं सकता. दो, अगर पहचान भी लिया जाएगा तो पुलिस उन्हें पकड़ेगी नहीं. सभी बदमाश क्8 से ख्ब् साल के थे, यानी जरायम के नए खिलाड़ी. फिर भी पुलिस पुराने गैंग खंगाल रही है.

पुलिस के हाथ खाली

कंकरखेड़ा के डिफेंस एंक्लेव में हुई प्रॉपर्टी डीलर के घर लाखों रुपये की डकैती में फ्म् घंटे बीतने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं. पुलिस अपनी ही लापरवाही के चलते डकैतों तक पहुंचने में नाकाम साबित हो रही है. कुछ अहम बिंदुओं पर यदि पुलिस ढंग से वर्क कर ले तो शायद डकैतों को पकड़ना पुलिस के लिए आसान हो जाए.

रकम पर नजर

घटना को अंजाम देकर बदमाश हथियार लहराते हुए काफी आसानी से फरार हो गए, लेकिन पुलिस पीडि़त से पूछताछ करती रही. पुलिस का ध्यान इस बात पर ज्यादा रहा कि पीडि़त कितना सच बोल रहा है और वास्तव में डकैत कितनी रकम और सोना उठाकर ले गए हैं. पुलिस ने कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर इंवेस्टीगेशन ही नहीं किया, जो बदमाशों तक पहुंचने में मददगार साबित होते.

नहीं लगा सुराग

पुलिस केवल पुराने गैंग खंगालने में जुट गई है, जिन्होंने पहले मेरठ में बड़ी लूटपाट और डकैती की वारदात को अंजाम दिया है. दो दिन बीत गए है, लेकिन बदमाशों का कोई सुराग पुलिस को नहीं लग सका है. यदि इन सवालों पर पुलिस वर्क कर ले तो आसानी से इस डकैती से पर्दा उठाकर धरा जा सकता था.

जवाब मांगते सवाल

क्. क्यों नहीं मांगी गई आसपास लगे सीसीटीवी की फुटेज? फुटेज मिलती तो शायद बदमाशों की पहचान में आसानी हो जाती.

ख्. पुलिस ने अशोक और उसके फैमिली मेंबर्स से पूछताछ के आधार पर बदमाशों के स्केच भी नहीं बनवाए? स्केच बनते तो शायद बदमाशों की पहचान हो जाती.

फ्. बदमाश डकैती के दौरान अशोक मारवाड़ी और परिजनों के मोबाइल भी लूटकर ले गए थे, जिन्हें कुछ देर तक यूज भी किया गया. इनके आधार पर पुलिस बदमाशों के भागने का रूट नहीं ट्रेस कर पाई.

ब्. पुलिस ने टोल प्लाजा पर लगे सीसीटीवी की फुटेज भी नहीं खंगाली. शायद पुलिस को डकैतों का कोई सुराग मिल जाता और केस सॉल्व करना आसान होता.

भ्. पुलिस का कहना है कि वह पुराने गैंगों पर काम कर रही है. लेकिन पुलिस ने अभी तक पीडि़त को गैंग से संबंधित बदमाशों के फोटो भी नहीं दिखाए हैं.

इन्होंने कहा..

मैं खुद मौके पर गया था. अशोक मारवाड़ी के घर लगे सीसीटीवी की डीवीआर बदमाश निकालकर ले गए थे. नंबरों को सर्विलांस पर लगाया गया है. जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा. पुलिस कुछ गैंगों पर वर्क कर रही है.

-ओंकार सिंह

एसएसपी

कंकरखेड़ा में डकैती की वारदात को पुलिस ने काफी गंभीरता से लिया है. एसएसपी को जल्द खुलासे के लिए निर्देशित भी किया गया है. जहां तक स्केच बनवाने की बात है, मैं अपने स्तर पर एसएसपी से बात करता हूं.

-रमित शर्मा

डीआईजी, मेरठ रेंज

मेरठ में नहीं है स्केच बनाने की व्यवस्था

मेरठ में स्केच बनाने की कोई व्यवस्था नहीं है. पिछले तीन सालों की बात करें तो मेरठ में किसी भी घटना के लिए स्केच नहीं बनाए गए. स्केच बनाने के लिए लखनऊ, कानपुर और आगरा से टीम को बुलाया जाता है. टीम नहीं होने के चलते स्केच भी नहीं बनते हैं.

मेरठ में गैंग

मेरठ में भी लूट और डकैती के साथ-साथ हत्याओं के रजिस्टर्ड गैंग है. उधम सिंह, योगेश भदौड़ा, राहुल खट्टा, मोनू सोनू परतापुर, अनिशू पंडित सराय बहलीम समेत तमाम रजिस्टर्ड गैंग है. इनके अलावा पुलिस अन्य गैंगों पर भी काम कर रही है. गैंगों के गुर्गो पर भी पुलिस वर्क कर रही है. पुलिस ने पूछताछ के लिए चार युवकों को उठा लिया, जिसने पूछताछ की जा रही है.