पुलिस लाइंस स्थित सरकारी आवास दिया घटना को अंजाम

जमीन पर खून से लथपथ पड़े थे मां-बेटे, साड़ी के सहारे लटक रहा था पिता

घरेलू कलह और बीमारी कारण होने का अंदेशा, अफसर सन्नाटे में

prayagraj@inext.co.in

महिला और उसका जवान बेटा जमीन पर पड़ा था। दोनों के इर्द-गिर्द खून फैला हुआ था। बगल में एक हथौड़ी पड़ी थी। वह भी खून से सनी हुई थी। घर का मुखिया पंखे की कुंडी से साड़ी के सहार लटक रहा था। दरवाजा तोड़कर लोग अंदर घुसे तो यही सीन सामने था। परिस्थितियां गवाही दे रही थीं कि पत्नी और बेटे की हत्या के बाद पति खुद फांसी पर लटक गया है। इससे इतर कोई स्टोरी है तो कोई बताने वाला नहीं था। घटना की जानकारी होन पर स्थानीय लोगों के साथ पुलिस अफसर मौके पर पहुंच गये। पड़ताल शुरू हो गयी। इस बात की कि कारण क्या रहा होगा? इस बात की भी कि परिस्थितियां क्या रही होंगी। समाचार लिखे जाने के समय तक अफसर कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं थे।

छोटा बेटा घर पहुंचा तो पता चला

मृतक का नाम गोविंद नारायण था। उम्र 54 साल के आसपास थी। मृतका का नाम चन्द्रा देवी बताया गया है। उसकी उम्र 52 साल के आसपास थी। तीसरे मृतक का नाम सोनू बताया गया है। उसकी उम्र 28 साल के आसपास थी। इस परिवार के चौथे सदस्य 25 वर्षीय भारत के रात साढ़े आठ बजे के करीब पुलिस लाइंस स्थित कर्मचारी आवास पहुंचने पर घटना का खुलासा हुआ। उसने काफी देर तक दरवाजे को नॉक किया लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिला। इसके बाद उसने मां और पिता दोनों के मोबाइल पर कॉल की। यहां भी कोई रिस्पांस नहीं मिला। इससे उसे शक हुआ तो वह पड़ोस में रहने वाले राकेश मित्तल के घर का दरवाजा खटखटाया और इसकी सूचना दी।

दरवाजा तोड़ा तो खौफनाक मंजर था सामने

भारत की बात सुनकर सन्नाटे में आये राकेश उसके साथ घर पहुंचे। दोनों ने मिलकर दरवाजा नॉक किया और सामने से कोई रिस्पांस नहीं मिला तो अनहोनी की आशंका में उन्होंने दरवाजे को तोड़ दिया। इसके बाद सामने का सीन देकर भारत अवाक रह गया। उसके पास शब्द नहीं थे। उसके संभालना राकेश मित्तल के लिए मुश्किल हो गया। उसकी चीख सुनकर आसपास के लोग इकट्ठा हो गये। सूचना मिलते ही पुलिस लाइंस में हड़कंप मच गया। कुछ ही घंटे के भीतर एडीजी, सुजीत पांडेय, डीआईजी केपी सिंह और एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज के साथ पुलिस ऑफिसर और पुलिसकर्मी मौके पर पहुंच गये। डॉग और फिंगर प्रिंट स्क्वॉड को बुला लिया गया। फिंगर प्रिंट की टीम ने स्पॉट पर पड़ी हथौड़ी, रिंच आदि पर मौजूद फिंगर प्रिंट को पिक करने के साथ उन सामानों को एवीडेंस के तौर पर यूज करने के लिए पैक करा दिया।

बेटे के बाद पत्‍‌नी को उतारा मौत के घाट!

शुरुआत दौर में सुसाइड के रूप में सामने आयी पुलिस लाइंस के क्वार्टर में रहने वाले फॉलोवर के परिवार के तीन सदस्यों की मौत की कहना वक्त बीतने के साथ हत्या के बाद सुसाइड में तब्दील होने लगी। जिंदा बच गये बेटे ने भी आशंका जतायी कि ने मां और भाई को मारने के बाद खुद मौत को गले लगा लिया। अफसर सीधे तो कुछ बोलने को तैयार नहीं थे लेकिन, उनका भी मानना था कि मामला हत्या के बाद सुसाइड का है। बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

घटना से पहले हुई थी झड़प

सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे रिपोर्टर के सामने पुलिसवालों के बीच से ही छनकर जो तथ्य सामने आये उसके मुताबिक घटना से पहले परिवार के सदस्यों में झड़प हुई थी। इसकी गवाही बिखरे हुए सामान दे रहे थे। किचन में बर्तन और डिब्बे बिखरे हुए थे। सुनील व चंद्रा की बॉडी पेट के बल जमीन पर खून से लथपथ पड़ी थी। गोविंद खुद फांसी पर लटका हुआ था। इस परिवार का सबसे हेल्दी सदस्य सुनील उर्फ सोनू था। सबसे कमजोर मृतक गोविंद नारायण था। सोनू और उसकी मां चन्द्रा के सिर पर एक तरफ गंभीर चोट के निशान मिले हैं। इसी से आशंका जतायी जा रही है कि पहले सोनू मारा गया होगा क्योंकि इलाज के बाद उसकी स्थिति में सुधार था। ऐसा न होता तो वह पिता का विरोध करता। इस स्थिति में मां के बच जाने की उम्मीद होती। इसके बाद गोविंद ने पत्‍‌नी को गुस्से में मारा होगा और दोनों की मौत देखने के बाद खुद अपनी जीवन लीला पत्‍‌नी की साड़ी के सहारे समाप्त कर ली।

पड़ोसी तक रहे घटना से अनजान

हैरत की बात यह है कि एक के बगल एक बनी कॉलोनी के सभी आवास में कर्मचारियों का परिवार रहता है। गोविन्द नारायण के कमरे में बिखरे बर्तन की खनक तक पड़ोसियों को सुनाई नहीं दी। ऐसा भी नहीं हो सकता कि हथौड़े जैसी चीज से प्रहार के बाद उसका बेटा सुनील या पत्‍‌नी चंद्रा चीखी चिल्लाई न रही हो। उन्होंने गुहार जरूर मचाया रहा होगा, यह बात दीगर है कि दीवार के पीछे से आई आवाज पड़ोसी न सुन सके हों।

डीआईजी आवास से शाम को लौटा था

मूल रूप से जालौन जिले के रहने वाले गोविंद की तैनाती वर्तमान समय में डीआईजी आवास पर फॉलोवर के रूप में थी। घटना के बाद मौके पर पहुंचे पुलिस अफसरों ने उसके साथ काम करने वालों से पूछताछ की तो पता चला कि वह चार बजे तक डीआईजी आवास पर ही था। इसके बाद वह घर के लिए निकला था। इसके चलते माना जा रहा है कि घटना शाम पांच से रात आठ बजे के बीच हुई है।

कमरे में पत्रकारों की इंट्री नहीं

घटना के बाद पत्रकारों के साथ अन्य लोग स्पॉट पर पहुंच गये। उन्होंने कमरे के भीतर जाने का प्रयास किया तो उन्हें रोक दिया गया। अफसर भी इस पर कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं थे। घटना से बुरी तरह से द्रवित भारत भी ज्यादा कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं था।

बड़े पापा करते थे फुल सपोर्ट

मृतक के छोटे बेटे भारत का कहना था कि बड़े भाई सोनू की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। उसका इलाज प्रकाश खेतान के यहां चल रहा था। इधर बीच उसकी स्थिति कुछ सुधरी थी। मां की बीमारी का भी जिक्र उसने किया लेकिन यह नहीं बता पाया कि बीमारी क्या थी। उसका कहना था कि इन परिस्थितियों से बड़े पिता जी पूरी तरह से वाकिफ थे और पिता का पूरा सपोर्ट करते थे। इसके चलते घर में तनाव जैसा कोई माहौल नहीं था। आज सुबह भी जब वह घर से निकला तो बिल्कुल अंदेशा नहीं था कि रात में घर लौटने पर अनाथ हो चुका होगा। उसका कहना था कि वह घर से निकला तो घर में हंसी खुशी का माहौल था। बता दें कि भारत राजापुर में स्थित एक स्टूडियो पर काम करता है। उसका कहना है कि सुबह वह स्टूडियो के लिए निकला तो घर में सब सामान्य था।

परेशानी पूछने पर बोला नहीं, पान खाकर निकल गया

पुलिस दिवस के दिन हुई घटना से अफसर ही नहीं पड़ोसी भी सन्नाटे में थे। मृतक के साथ काम करने वाले हेड कांस्टेबल सत्येन्द्र तिवारी ने बताया कि दिन में ढाई बजे के करीब डीआईजी ऑफिस में उनकी मुलाकात गोविंद से हुई थी। तब वह कुछ अपसेट दिख रहे थे। पूछने पर टाल गये। कुछ बोला नहीं। साथ में पान की दुकान तक गये। वहां पान खाया और चले गये। सत्येन्द्र के अनुसार उन्होंने तनाव का कारण जानने की कोशिश की लेकिन गोविंद ने कोई रिस्पांस नहीं दिया।

1991 से रह रहे थे प्रयागराज में

पुलिस लाइंस स्थिति सरकारी क्वार्टर में रहने वाले लोगों ने बताया कि गोविंद की पोस्टिंग प्रयागराज में 1991 में हुई थी। तभी से वह यहां परिवार के सदस्यों के साथ रह रहे थे। दो बेटे और एक बेटी परिवार में थे। बेटी रजनी की शादी उन्होंने दो साल पहले करछना एरिया में प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर से की थी। बड़ा बेटा बीमारी के चलते कोई काम नहीं करता था। छोटा भारत स्टूडियो पर काम करके पिता की मदद करता था। इन दोनों की शादी अभी नहीं हुई थी। अफसरों ने इसकी सूचना देर रात गोविंद के पैतृक निवास जालौन भेजवा दी थी। वहां से रिलेटिव्स के सुबह तक यहां पहुंचने की उम्मीद जतायी जा रही है।

Posted By: Inextlive

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