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KANPUR:  देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरणसिंह केा लेकर कहा जाता है कि वह अपने जीवन में नैतिकता को बहुत महत्व देते थे। इसके एक नहीं कई किस्से हैं। उनसे जुड़ा एक मामला इन दिनों राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा में है। 1977 में यूपी में हुई एक सभा में चौधरी ने मतदाताओं से कहा था कि उनकी पार्टी का उम्मीदवार अगर चारित्रिक रूप से पतित हो। उसमें ऐब हो और वह शराब पीता हो या किसानों-मजदूरों से धोखेबाजी करता हो तो वे उसे सत्ता बिल्कुल न साैंपे। उस उम्मीदवार को हराने में संकोच न करें और अपने मत का सही जगह पर प्रयोग करें।

गोपीनाथ 52 वोटों से जीते

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि 1980 में फैजाबाद जिले की टांडा तहसील के चौधरी समर्थक युवा नेता गोपीनाथ वर्मा विधानसभा इलेक्शन का टिकट मांगने गए तो उन्होंने टका-सा जवाब दिया।  उनसे कहा कि क्षेत्र में जाकर काम करो। समय आने पर आपको सूचित कर दिया जाएगा। इस पर वर्मा थोड़ा सकपका गए। उन्होंने कहा कैसे सूचित कर दिया जाएगा?  प्रदेश अध्यक्ष ने मेरा नाम काट कर एक शराब कारोबारी का नाम टिकट उम्मीदवार की सूची में लिख दिया है। यह सुनने के बाद चौधरी चरण आग बबूला हो गए। उन्हेांने जनता पार्टी (सेक्यूलर) प्रदेश अध्यक्ष रामवचन यादव से गोपीनाथ का नाम काटने की वजह पूछी।

देश के पांचवें प्रधानमंत्री, जो कभी संसद नहीं जा पाएपाॅलिटिकल किस्सा : जब कांग्रेस का हुआ बंटवारामजबूरी आपकी होगी, पार्टी की नहीं

इस पर रामवचन यादव ने कहा कि मजबूरी है। शराब कारोबारी ने टिकट लेने के लिए नौ लाख रुपये का चंदा दिया हैं। इस पर चौधरी ने कहा कि 'मजबूरी आपकी होगी, पार्टी की नहीं। हम किसी शराब कारोबारी को कैंडीडेट नहीं बनाएंगे। ऐसे में शराब कारोबारी के नौ लाख रुपए लौटा दो।