रांची (आईएएनएस)। झारखंड में विधानसभा चुनाव इस साल के अंत में होने जा रहे हैं और राज्य के सभी राजनीतिक दल मतदाताओं को लुभाने के लिए चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं। राज्य में आदिवासी मतदाताओं की बड़ी संख्या है, जिसे हर पार्टी अपने साथ लाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। राज्य में 81 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से 28 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। 2014 के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) को इनमें से 13-13 सीटें मिली थीं। 2014 में दोनों के बीच की यह करीबी लड़ाई विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ तगड़ी लड़ाई में तब्दील हो गई लगती है।

चुनावी बिगुल बजा दिया

बीजेपी और जेएएम के अलावा इस बार कांग्रेस भी इस समुदाय को वोट के लिए लुभा रही है। वरिष्ठ पत्रकार योगेश किस्लय ने कहा, 'राज्य में 26 प्रतिशत आदिवासी आबादी है। मुस्लिम वोट सभी में बिखरे हुए हैं। यही कारण है कि हर एक आदिवासी वोटों के लिए जोर लगा रहा है।' बीजेपी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को रांची में चुनावी बिगुल बजा दिया। आदिवासी समुदाय को लक्षित करके बीजेपी सरकार द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक देश भर में 462 एकलव्य मॉडल स्कूल हैं, जिनमें से 69 झारखंड के 24 जिलों में से 13 में स्थापित किए जाएंगे।

सरकार आदिवासियों के उत्थान को लेकर चिंतित है

केंद्र में अपने दूसरे कार्यकाल में, मोदी सरकार में अर्जुन मुंडा को शामिल कर यह संदेश देने की कोशिश की गई कि सरकार आदिवासियों के उत्थान को लेकर चिंतित है। मुंडा, एकलव्य स्कूलों को लेकर उत्साह से भरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों की स्थापना 50 फीसदी आदिवासी आबादी वाले क्षेत्रों में या उन जगहों पर की जाएगी जहां आदिवासी आबादी 20,000 से ऊपर है। भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा, 'हम जाति, जनजाति या धर्म के स्तर पर काम नहीं कर रहे हैं। हमारा मकसद 'सबका साथ-सबका विकास' है। हम विकास के एजेंडे पर काम कर रहे हैं।'

मतदाताओं के बीच माहौल बनाने की कोशिश

खुद को आदिवासी नेता बताने वाले ओरांव का मानना है कि पार्टी के पास आदिवासियों के बीच पहले से ही एक आधार है। दूसरी तरफ जेएमएम खुद को आदिवासियों की पार्टी के रूप में पेश करती आई है। यह राज्य में 'बदलाव यात्रा' के जरिए मतदाताओं के बीच माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। जेएमएम प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि राज्य के गठन के बाद, आदिवासी हमेशा जेएमएम के साथ रहे हैं। शिबू सोरेन निर्विवाद आदिवासी नेता हैं। अन्य दल आदिवासियों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उनके लिए यह बहुत मुश्किल होगा। झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास 15 सितंबर को संथाल से 'आशीर्वाद यात्रा' के साथ ही अपने अभियान की शुरुआत करने जा रहे हैं। इस क्षेत्र को जेएमएम का गढ़ माना जाता है। आदिवासी मतों को  अपनी ओर खींचने की यह कोशिश चुनावी मौसम में और तेज ही होने वाली है।

Posted By: Mukul Kumar