लोकसभा चुनाव जैसे ही नजदीक आ रहा है, वैसे ही युवा अपने पसंद का नेता अपनी पंसद की सरकार चुनने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. क्योंकि आज का यूथ भटका हुआ नहीं है, यूथ ने अपने मुद्दे और विचार सब पहले से ही क्लीयर कर रखा है. मलेनियल्स स्पीक जेनरल इलेक्शन-2019 के चौथे दिन हमने मिनी बाईपास रोड स्थित स्नूकर मैनिएक्स के प्लेयर्स से बातचीत की. इस दौरान 24 प्लेयर्स मौजूद रहे, जिन्होंने चुनावी मुद्दों पर अपनी बात रखी. बात जैसे ही चुनावी मुद्दे पर शुरू हुई तो प्लेयर्स का कहना था कि हमारा नेता पढ़ा लिखा हो और युवाओं की बेरोजगारी कम करने और जनसंख्या नियंत्रण के लिए काम करे, ऐसी ही सरकार हमें चाहिए.

===============

मंडे को ........................... बजे से राजनी-टी

-------

अनियंत्रित जनसंख्या, बेरोजगारी का बढ़ावा

शहर के मिनी बाईपास पर स्थित स्नूकर मैनिएक्स में संडे को प्लेयर ने राजनी-टी में खुलकर विचार रखे. मौका था दैनिक जागरण आईनेक्स्ट के मिलेनियल्स स्पीक जेनरल इलेक्शन 2019 की चर्चा का, जिसमें राजनीति की मुद्दों पर सभी प्लेयर्स ने अपनी बात रखी, इसके लिए प्लेटफार्म मुहैया करा रहा था दैनिक जागरण आईनेक्स्ट. चर्चा में मौजूद प्लेयर्स ने बताया कि आने वाले लोकसभा चुनाव में उनके मद्दे क्या है, उनका नेता कैसा हो और कैसी सरकार हो. दोपहर करीब 11 बजे शुरू हुई डिबेट करीब 1 बजे तक चली, जिसमें रेडियो सिटी की आरजे बुलबुल भी मौजूद रहीं. आरजे बुलबुल ने डिबेट में मौजूद सभी प्लेयर्स को प्रोग्राम के बारे में बताकर डिबेट को शुरू करा दिया. डिबेट में प्लेयर्स ने बढ़ती जनसंख्या को सबसे बड़ी समस्या बताते हुए इसे कंट्रोल करने पर जोर दिया. इसके साथ ही नेशनल सिक्योरिटी और आरक्षण का मुद्दा भी डिबेट में छाया रहा.

बेरोजगारी बड़ी समस्या

राजनीति की डिबेट बेरोजगारी को लेकर शुरू हुई जिसमें सबसे पहले आदित्य ने कहा कि देश में जब सरकार बनती है तो रोजगार बढ़ाने की बात होती है, लेकिन बाद में रोजगार के साधन तो नहीं बढ़ते, लेकिन पढ़े लिखे बेरोजगार और बढ़ जाते हैं, तभी उनकी बात का समर्थन करते हुए अभिषेक ने कहा कि बेरोजगारी बढ़ने के कारण भी है, इसमें हम उसके लिए खुद भी जिम्मेदार है. क्योकि आज जो कॉलेज गली-गली खुल रहे हैं वह सिर्फ रुपए लेकर डिग्री बांट रहे हैं, लेकिन क्वालिटी परक शिक्षा से कोसों दूर हैं. इसी बीच बेरोजगारी की बात पर बोलते हुए अर्पण ने कहा कि बेरोजगारी के लिए जिम्मेदार तो बढ़ती जनसंख्या है. जब तक सरकार पचास हजार रोजगार उपलब्ध कराती है तब तक बेरोजगारों की संख्या पांच लाख बढ़ जाती है. इसीलिए सरकार को चाहिए पहले तो हम दो हमारे दो की नीति को कागजों में ही नहीं प्रभावी बनाने के लिए काम करे. तभी सभी को रोजगार मुहैया कराने पर बात की जा सकती है. इससे पहले तो सभी को रोजगार देने की बात करना ही बेमानी होगी.

आरक्षण खत्म हो

आरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए निश्चय ने कहा कि आरक्षण को खत्म कर देना चाहिए. क्योंकि, आरक्षण का लाभ जिसे मिलना चाहिए उसे मिल ही नहीं पाता है. जो पढ़ाई करके आगे बढ़ना चाहते हैं उन्हें मौका नहीं मिल पाता है. तभी बात को काटते हुए सौरभ ने कहा कि आरक्षण जातिगत न होकर आर्थिक तरीके से लागू होना चाहिए. आरक्षण खत्म नहीं होना चाहिए, इसी बीच सौरभ शर्मा ने ब्रेक देते हुए कहा कि हमारे देश में करप्शन खत्म करने के लिए सभी सरकारें बात तो करती हैं, लेकिन करप्शन देश से खत्म होने की जगह और बढ़ जाता है. इसके लिए सरकार को कुछ करना चाहिए. उनकी बात का समर्थन करते हुए रोहित सिरोही ने कहा कि करप्शन के लिए सरकार तो जिम्मेदार है ही, लेकिन इसके लिए हम भी कहीं न कहीं जिम्मेदार हैं. हमें भी सुधरने की जरूरत है.

देश में ही बढ़ें पर्यटन के अवसर

बंटी ने करप्शन की बात को ब्रेक देते हुए कहा कि हमारे देश के पर्यटक विदेशों में अक्सर घूमने के लिए जाते हैं, लेकिन इसके लिए सरकार को चाहिए कि वह देश के अलग-अलग प्रदेशों में पर्यटन को बढ़ावा दे ताकि हमारे देश में आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़े और जाने वालों की संख्या में कमी आए. इससे हमारे देश की इनकम बढ़ेगी साथ ही रोजगार के साधन भी बढ़ेंगे. हम तो यही कहेंगे कि हमारे देश के अलग अलग प्रदेशों में पर्यटन को बढ़ावा देने लिए चांसेस भी बहुत है. इसी बीच नितिन ने कहा कि हमारे यहां पर शिक्षा का स्तर काफी गिरा हुआ इसमें सुधार की जरूरत है.

पढ़ा लिखा हो नेता

डिबेट में शुभम शुक्ला ने कहा कि नेता तो चाहे पढ़ा लिखा हो या फिर अनपढ़ हो पब्लिक उसे चुन ही लेती है, लेकिन मेरा कहना है कि नेता के लिए कोई नियम बने क्योंकि अनपढ़ को नेता नहीं चुनना चाहिए, क्योंकि नेता पढ़ा लिखा होगा तो हमारे यूथ की जरूरतों को समझेगा और यूथ के लिए कुछ कर सकेगा. नितिन ने कहा कि हमारे देश का नेता पढ़ा लिखा होगा तो हमारे और हमारे देश के बारे में भी समझेगा. इसी बीच पारस, मानस शाही और चंदन सिंह ने भी उनकी बात का समर्थन किया.

कड़क बात

इस बार सबसे अहम मुद्दा होगा देश की सिक्योरिटी को लेकर, क्योंकि जब देश ही सुरक्षित नहीं होगा तो हम कहां सुरक्षित होंगे. इसमें चाहे सर्विस मैन हो या फिर बिजनेसमैन. हाल ही में हुए पुलवामा के हमले के बाद विपक्ष से लेकर सभी एक जुट हैं. सभी दल सरकार के साथ हैं तो फिर देश की जनता को भी एकजुट होना चाहिए, क्योंकि यह मुद्दा किसी एक का नहीं बल्कि पूरे देश का है. इसके साथ करप्शन और आरक्षण का भी मुद्दा छाया रहा. क्योंकि देश में करप्श्न रोकने के लिए कानून तो बहुत है लेकिन उन पर अमल नहीं हो पा रहा है. इसीलिए करप्शन घटने की जगह बढ़ रहा है.

==========================

मेरा मुद्दा

-इलेक्शन में सरकार तो नोटा का ऑप्शन देती है, लेकिन वह सबसे बड़ा धोखा है. क्योंकि नोटा का प्रयोग करने के बाद भी सरकार बनने के चांस रहते हैं. इसीलिए नोटा तो बेकार है, वोट देना चाहिए. जिसे अधिक वोट मिलेगें वह तो सरकार बना ही लेगा तो नोटा का प्रयोग ही बेकार है, लेकिन नेता बनने के लिए कोई योग्यता निर्धारित हो और उसके लिए कुछ नियम बने.

आदित्य

-----------------

नेता ईमानदार छवि वाला हो करप्शन से मुक्ति दिला नहीं पाए तो कम से कम वह खुद तो करप्शन न करे. यही देखकर इस बार वोट दिए जाएंगे. क्योंकि नेताओं की करप्शन रोकने और बढ़ाने में अहम भूमिका होती है.

अभिषेक

------------------------

-आरक्षण देश में खत्म होना चाहिए, क्योंकि आरक्षण का लाभ उन्हें मिल रहा है जो आरक्षण के लिए पात्र कम अपात्र अधिक है. इससे क्वालिटी में कमी आती है.

अर्पण

-------------------

-भ्रष्टाचार के लिए कहीं न कहीं हम खुद ही जिम्मेदार है, हम लोग खुद ही शॉर्टकट अपनाने के चक्कर में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं. हमें भी सुधरना चाहिए.

निश्चय

----------------

-देश में रोजगार बढ़े लेकिन इसके लिए सबसे अहम मुद्दा है कि जो नेता चुनते है वह बाद में क्षेत्र और देश का विकास भूलकर अपना विकास करने में जुट जाता है. यही कारण है उसका क्षेत्र पिछड़ा रह जाता है.

सौरभ शर्मा

----------------

-सरकार को यूथ का साथ तो चाहिए लेकिन वह कभी यूथ के बारे में सोचती नहीं. रोजगार मिले लेकिन इसके लिए जरूरी है कि पहले जनसंख्या नियंत्रण करने के लिए कोई ठोस कानून बनाए.

रोहित सिरोही

------------------

इस बार जो भी सरकार आएगी उससे सभी की डिमांड रहेगी कि आतंकवाद से मुक्ति दिलाए. आज देश के लिए सबसे बड़ा मुद्दा है सिक्योरिटी का.

बंटी

----------------------

-हर बार नेता झूठे सपने दिखाकर पब्लिक को गुमराह कर देते हैं, लेकिन इस बार पब्लिक खुद गुमराह होने की बजाय नेताओं को गुमराह कर देगी.

नितिन

-----------------

-सरकार को चाहिए कि जो लोग देश से बाहर घूमने जाते हैं, इसके लिए अपने देश में पर्यटन स्थल को बढ़ावा दे. ताकि वह दूसरे देश की जगह अपने देश में ही घूमने के लिए जाएं.

शुभम शुक्ला

----------------

नेता को चुनने से पहले हमें देखना होगा कि हमारी जरूरतें उसकी प्राथमिकता में हों तभी उसे वोट करेंगे. अन्यथा नहीं. क्योंकि अब यूथ के लिए रोजगार परक शिक्षा की जरूरत है.

चंदन सिंह