पर्याप्त एलम और क्लोरीन न होने से शोधन में आ रही दिक्कत

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AGRA:
वाटरव‌र्क्स से गंदे पानी की आपूर्ति हो रही है. इसकी बड़ी वजह यमुना के पानी का ज्यादा प्रदूषित होना है. यमुना के पानी की गुणवत्ता खराब होती जा रही है. इसके चलते रॉ वाटर को प्यूरीफाई करने में जलकल को काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है. हालांकि जलकल के अफसरों का दावा है, कि ऐसी कभी-कभार ही दिक्कत होती है. हमारा प्रयास पब्लिक को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है. हालांकि कभी-कभी तो पानी पीना तो दूर नहाने का भी मन नहीं करता है.

यमुना में प्रदूषण की मात्रा चरम पर
यमुना के पानी में प्रदूषण की मात्रा चरम पर पहुंच गई है. प्रदूषण की वजह से पानी काले रंग का नजर आ रहा है. उसमें झाग भी निकल रहे हैं. इंटकवेल तक जो पानी पहुंच रहा है. उसकी गुणवत्ता भी बेहद खराब है. बता दें कि यमुना में वाटर लेवल मानक से कम है. इसके चलते प्रदूषण की मात्रा बढ़ गई है. प्लांटों में जो पानी कलैक्ट हो रहा है. उसका रंग बिल्कुल काला है. उसमें सफेद झाग निकलते देखे जा सकते हैं.

16 क्लोरीन के सिलेंडर और 60 टन एलम भी नहीं कर पा रही शुद्ध
हर रोज पानी को प्यूरीफाई करने के लिए जलकल 16 क्लोरीन के सिलेंडर जिसमें एक सिलेंडर लगभग 900 ली. का होता है और 60 टन एलम जो फिटकरीनुमा होती है, का प्रयोग किया जाता है. इसके बाद भी लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया नहीं हो पा रहा है. जलकल के सूत्रों की मानें तो गंगाजल जैसा तो पेयजल मुहैया नहीं कराया जाना संभव नहीं है. उपकरण भी पुराने हो चुके हैं. संसाधनों का रिन्यूवल कराना आवश्यक है.

ये है रॉ वाटर के प्यूरीफाई होने की प्रक्रिया
यमुना से जो रॉ वाटर आता है. वो सबसे पहले वाटर इनलैंप चैम्बर में पहुंचता है. यहां फ‌र्स्ट ऐज पर शुद्धिकरण की प्रक्रिया शुरू होती है. इसके बाद वाटर फिल्टर हाउस में पहुंचता है. यहां डेढ़ दर्जन वाटर बैड से वाटर मीडिया से गुजरता है. यहां पर कई प्रकार के पत्थर और बालू चम्बलसैंड से वाटर को प्यूरीफाई किया जाता है. इसके बाद वाटर में एलम और क्लोरीन मिलाई जाती है. इससे पानी में हानिकारक विषैले तत्व नष्ट हो जाते हैं. जानकारों की मानें तो पानी में 2100 प्रकार के विषैले तत्व होते हैं. इसके बाद प्यूरीफाई वाटर को अन्डरग्राउंड रिजर्व टैंक में कलैक्ट किया जाता है. इसके बाद उसकी आपूर्ति की जाती है.

गंदे पानी आने के ये हैं मुख्य कारण

- वाटर व‌र्क्स प्लांट में तीनों प्लांट जर्जर अवस्था में हैं

- वाटर व‌र्क्स पर पानी के शोधन की प्रक्रिया काफी पुरानी है

- लम्बे समय से सीएमएफ कंटीनुअस मैब्रेन फिल्टर काम नहीं कर रहा है

- सीएमएफ का काम पानी को फिल्टर करना होता है.

- प्लांटों में लगा मीडिया भी बदहाल अवस्था में है.

- वैकवॉश पंप की सफाई नहीं हो पाती है

- यमुना में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ा हुआ है.

- ज्यादातर पाइपलाइनें लीकेज हो चुकी हैं, बंद होने पर वैक्यूम से गंदगी अंदर चली जाती है.

इन इलाकों में आता है गंदा पानी
जीवनी मंडी वाटर व‌र्क्स प्लांट से आधे शहर में पेयजलापूर्ति की जाती है. इसमें बेलनगंज, रावतपाड़ा, बल्केश्वर, नरायच, कचहरी घाट, यमुनापार, ट्रांस यमुना कॉलोनी, दरेसी, सुभाष बाजार, छीपीटोला आदि क्षेत्र में आपूर्ति होती है.

जलकल विभाग ऐसे खर्च करता है वाटर सप्लाई पर

- 5 लाख वाटर टेस्टिंग पर खर्च होते हैं

- 2 करोड़ क्लोरीन खरीदने के लिए

- 1 करोड़ पीएसी

- 4 करोड़ एलम खरीदने के लिए

- 1.50 करोड़ पंपिम्प प्लांट की मेंटीनेंस

- 10 लाख सैटलिंग टैंक एंव प्लांट मेंटीनेंस

- 2 लाख अन्य केमीकल पर

इस कारण हो रही कालिन्दी प्रदूषित

20 लाख शहर की आबादी

286 एमएलडी वेस्ट वाटर हर रोज यमुना में गिरता है

143.50 एमएलडी ही हो पाता है शोधन

321 कुल छोटे-बड़े नाले शहर में

90 बड़े नाले

29 नाले टेप्ड हैं