-बुआई का सीजन होने की वजह से आलू किसान कर रहे ज्यादा आलू की खरीदारी

- 15 नवंबर तक आलू की कीमतें रहेंगी ज्यादा

GORAKHPUR: इस नवरात्रि मां के भक्तों पर महंगाई की कड़ी मार पड़ने वाली है. वजह है आसमान छूते सब्जियों के भाव. नवरात्रि के वक्त प्याज से ज्यादा आलू के भाव आसमान छू रहे हैं. आसमान छू रहे आलू के कीमतों ने व्रतियों के लिए मुश्किल कर दी है. महंगाई के इस दौर में फलों की जो कीमतें उसके चलते वे आलू पर ज्यादा निर्भर हैं, लेकिन आलू ने इस बार दगा दे दिया है. स्थिति यह है कि जब गोरखपुराइट्स आलू के भाव पूछते हैं तो कीमत सुनकर या वे सरक लेते हैं या फिर क्वांटिटी कम कर देते हैं. आखिर क्या है आलू की कीमतों के इस तरह आसमान छूने की? यह जानने के लिए जब आई नेक्स्ट रिपोर्टर सब्जी मंडी पहुंचा तो कई चौंकाने वाली जानकारियां और तथ्य सामने आये.

यह है आलू के भाव की सच्चाई

आई नेक्स्ट रिपोर्टर जब सब्जी मंडी पहुंचा तो वहां आलू के जबरदस्त खरीदार नजर आए. अब आप सोच रहे होंगे कि जब इतना मंहगा आलू बिक रहा है तो फिर इतने खरीदार कहां से आ गए? अब हम आपको बताते हैं यह खरीदार कौन हैं. दरअसल क् सितंबर से क्भ् नवंबर के बीच पूर्वी क्षेत्रों में आलू की बुआई होती है. इसी बुआई के लिए इन दिनों मंडी में किसानों की जबरदस्त भीड़ है. यही वजह है कि फुटकर विक्रेता और आलू की बुआई करने वाले किसान इन दिनों सब्जी मंडी में जमे हुए हैं, जो आलू खरीदते हुए नजर आ जाएंगे.

क्भ् नवंबर तक है आलू के बुआई का मौसम

अब आप सोच रहे होंगे कि आलू की बुआई से पब्लिक की जेब ढीली क्यों हो रही है? तो जेब ढीली होने की मेन वजह भी हम आपको बताते हैं. दरअसल मंडी में प्रत्येक दिन करीब ख्000-ख्भ्00 क्विंटल आलू आता हैं. यह ख्ब्00-ख्म्00 रुपए प्रति क्विंटल थोक के भाव से बिक रहा है. कानपुर, बागड़ मऊ, बिल्लौर, कन्नौज, फर्रूखाबाद आगरा आदि जगहों से गोरखपुर सब्जी मंडी में आलू आते हैं. अब इसी आलू में से फुटकर विक्रेता और किसान दोनों ही खरीदारी करते हैं, लेकिन सितंबर माह में आलू के बुआई शुरू होने के चलते आलू की डिमांड बढ़ गई है. इसी वजह से आलू का रेट इस दौरान बढ़ गया है. बता दें कि आलू की बुआई शुरू होने से पहले जुलाई माह में आलू का रेट क्800-ख्000 रुपए क्विंटल था. अब सवाल यह उठता है कि बुआई के सीजन में जब आलू की डिमांड बढ़ जाती है तो फिर मंडी समिति के अधिकारी डिमांड को पूरा करने के लिए और आलू की खेप क्यों नहीं मंगाते?

भ्-8 रुपए तक का कमाते हैं मुनाफा

आई नेक्स्ट रिपोर्टर ने आलू की कीमतों की सच्चाई जानने के लिए मंडी में करीब दो घंटे बिताए. रिपोर्टर ने यह जानने की कोशिश की कि आखिरकार फुटकर मॉर्केट में फ्0-फ्ख् रुपए किलो आलू क्यों बिक रहा है? आलू के थोक विक्रेता लाल बाबू, सोनू और राजू ने बताया कि आलू के खरीदारी करने वाले फुटकर विक्रेता थोक भाव रेट से ख्-फ् रुपए मुनाफा कमाने की बजाय भ्-8 रुपए तक मुनाफा कमाने में लगे रहते हैं. यही वजह है कि फुटकर में आलू का रेट फ्0-फ्ख् रुपए किलो तक बिक रहा है. हैरानी यह है कि फुटकर विक्रेता के उपर लगाम लगाने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं है? इस बात को कृषि उत्पादन मंडी समिति के अधिकारी भी मान रहे हैं.

जिला प्रशासन को उठाने होंगे सख्त कदम

कृषि उत्पादन मंडी समिति के अधिकारियों की मानें तो आलू हो या फिर कोई भी सब्जी आइट्म्स, मुनाफाखोरी फुटकर विक्रेता ही करते हैं. ज्यादा मुनाफा के लिए वह कस्टमर्स से मनमानी कीमत वसूलते हैं. चाहे नवरात्र हो या फिर कोई और त्योहार. उन्हें बस ओवरचार्ज के लिए बहाना चाहिए. इसके लिए जब तक जिला प्रशासन की तरफ से सख्त कदम नहीं उठाए जाएंगे तब तक यह समस्या बनी रहेगी.

वर्जन..

पूर्वाचल में आलू की बुआई का सीजन है. इसलिए आलू की डिमांड है. जितनी डिमांड है उतनी सप्लाई नहीं है. इसके अलावा फुटकर विक्रेता मनमानी कीमत लेते हैं. यही वजह है कि आलू के रेट आसमान छू रहे हैं. इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रशासन को लेटर लिखा जाएगा.

सुभाष यादव,

मंडी सेक्रेटरी, कृषि उत्पाद समिति गोरखपुर