पॉवर कारपोरेशन ने लिया तीन महीने के औसत उपभोग के आधार पर अगले माह का बिल भेजने का फैसला

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उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड के डायरेक्टर (कमर्शियल) एके श्रीवास्तव की ओर से 28 मार्च को जारी निर्देश, 'लॉकडाउन के अनुपालन में अप्रैल महीने में फील्ड रीडिंग का काम स्थगित रहेगा। सभी बिल तीन महीने के औसत उपभोग के आधार पर बनाए जाएंगे। जिन उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर दर्ज हैं, उन्हें एसएमएस और जिनके ई-मेल उपलब्ध हैं, उन्हें उस पर बिल भेजे जाएंगे। उपभोक्ता अपने बिल का भुगतान वेबसाइट https·.//www.upenergy.in/uppcl पर कर सकेंगे.' पॉवर कारपोरेशन के इस फैसले का कोई बड़ा इंपैक्ट हाउस होल्ड यानी घरेलू उपभोक्ताओं पर नहीं आना है। लेकिन, उद्यमी इस फैसले से परेशान हो उठे हैं। उन्होंने पॉवर कारपोरेशन के इस फैसले को गलत बताते हुए आरोप लगाया कि ज्यादा पैसा वसूलने की यह कारपोरेशन की साजिश है।

घरेलू उपभोक्ताओं पर असर नहीं

पॉवर कारपोरेशन के इस फैसले का ज्यादा असर घरेलू उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ना है क्योंकि उपभोक्ता घर पर हैं और बिजली का इस्तेमाल भी कर रहे हैं। उद्यमियों का कहना है कि उनके यहां प्रोडक्शन बंद है। इस स्थिति में उनका फिक्स चार्ज माफ कर दिया जाना चाहिए। उनकी मांग है कि वही बिल लॉक डाउन के दौरान भेजी जाय जो एक्चुअल है। ऐसा न करने पर उद्यमियों का नुकसान होगा।

बिजली की जितनी खपत है, उस पर भुगतान लिया जाना चाहिए। फिक्स चार्ज आदि न लिए जाएं। महाराष्ट्र और गुजरात सरकार ने मार्च, अप्रैल के बिलों की मियाद मई तक बढ़ा दी है। ऊर्जा मंत्री को ट्वीट करके इसकी शिकायत की गई है।

विनय टंडन,

अध्यक्ष ईस्टर्न यूपी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज

पॉवर कारपोरेशन ने बड़ी चालाकी की है। जब उद्योग एवं अन्य फर्मे बंद हैं तो औसत बिलिंग क्यों की जाएगी। कारपोरेशन ने ज्यादा पैसा वसूलने की साजिश की है।

- राकेश हजेला, महामंत्री नैनी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन

Posted By: Inextlive

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