कोई मंदिर फूलों से सज रहा है तो किसी मंदिर में झांकियां सज रही हैैं. किसी मंदिर ने भक्तों के लिए श्रीकृष्ण लीलाओं का मंचन करने की तैयारी की हुई है. तो कोई मंदिर सिर्फ श्री कृष्ण के श्रृंगार पर फोकस किए हुए है. आइए आपको भी बताते हैं कि कौन सा मंदिर कैसी तैयारियां कर रहा है...

श्री बाबा औघडऩाथ मंदिर

श्री बाबा औघडऩाथ मंदिर में इस बार जन्माष्टमी पर काफी कुछ विशेष होने जा रहा है. मंदिर में केशव के लिए फूल बंगला बनाया जा रहा है. इसे सजाने के लिए वृंदावन और आगरा से 50 कारीगर आए हुए हैं. पूरे मंदिर को सजाने के लिए कोलकाता और बंगलूरू के अलावा विदेशों से फूल मंगाए गए हैं.

श्री वामन भगवान मंदिर

सदर दालमंडी स्थित भगवान विष्णु के वामन अवतार मंदिर में श्रीकृष्ण के जन्म दिवस को काफी धूमधाम से मनाया जाता है. इस मंदिर में भगवान वामन की मूर्ति पूरे 52 अंगुल की है. इस बार मंदिर के मेन द्वार के बाहर 32 फुट का मेन द्वार बनाया जा रहा है. इस द्वार को विदेशी लाइट्स और फूलों से सजाया जाएगा. इससे पहले इस मंदिर को इस तरह से नहीं सजाया गया. पूरे मंदिर को विभिन्न प्रकार के फूलों से सजाया जाएगा. सबसे प्रमुख बात रात 11:48 बजे भगवान श्रीकृष्ण को पंचरत्न से स्नान कराया जाएगा.

महादेव गोलक बाबू मंदिर

जन्माष्टमी के मौके पर इस बार मंदिर कई खास चीजें होंगी. इस बार कई तरह की झांकियां होंगी. शिवाजी रोड स्थित इस मंदिर में शाम आठ बजे वासुदेव की झांकी होगी. इसमें वासुदेव बने भगवान श्रीकृष्ण को बचाने की लीला भी की जाएगी. वहीं श्रीलीलाओं के मंचन के लिए डेढ़ वर्ष के वेदांत शर्मा को सजाया जाएगा. वहीं मंदिर में कैलाश पर्वत बनाया जाएगा उस पर भगवान शिव को विराजमान कराया जाएगा.

भूतेश्वरनाथ मंदिर

बुढ़ाना गेट स्थित भूतेश्वरनाथ मंदिर में हर साल भक्तों का तांता लगा रहता है. इस प्राचीन मंदिर में राधाकृष्ण की झांकी को कई तरह के फूलों और लाइट्स से सजाया जाएगा. इस मंदिर का मुख्य आकर्षण का केंद्र मानसरोवर की गुफा होगी. करीब 100 मीटर की इस गुफा में बर्फ होगी. इससे गुजरकर ही भगवान के दर्शन होंगे. इस बार मंदिर में भगवान की प्रतिमा के कद को भी बढ़ाया गया है. इस बार भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा 4 फुट से 5 फुट की होगी.

राधाकृष्ण मंदिर

शहर दालमंडी स्थित 150 वर्ष पुराने राधाकृष्ण मंदिर में सबसे बड़ी खासियत भगवान श्रीकृष्ण का श्रंृगार है. इस बार ये और भी सुंदर होने की उम्मीद है. आपको बता दें कि इस मंदिर में मूर्ति की खासियत ये है कि यहां वृंदावन की मूर्ति की पूरी तरह से कॉपी की गई है. यहां भी वैसा ही श्रृंगार होता है जैसा वृंदावन में होता है. इस मंदिर में ऐसे श्रृंगार करने वाले हैं, जो कृष्ण श्रृंगार करने में डॉक्टरेट की डिग्र्री पाने वाले नौ लोगों में से एक हैं.  

सिद्धपीठ मंदिर

सिविल लाइन कैंपस में सिद्धपीठ  मंदिर का काफी महत्व है. यहां भी काफी दूर-दूर से लोग आते हैं. इस मंदिर में इस बार मिट्टी के ढेर पर जौ बोकर कैलाश पर्वत का निर्माण किया गया है. इसके अलावा भगवान कृष्ण की झांकी को भी सजाया गया है. साथ कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम और कृष्ण लीलाओं का मंचन भी होगा, जिसमें स्टूडेंट्स पार्टिसिपेट करेंगे.