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LUCKNOW : आगामी लोकसभा चुनावों में किसी भी गड़बड़ी को रोकने के लिये चुनाव आयोग यूपी 100 की मदद लेगा। चुनाव आयोग ने अपने कंट्रोल रूम को यूपी 100 से इंटीग्रेटेड करने की इच्छा जताई है। डीजीपी ओपी सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया कि यूपी 100 के बेहतर रिस्पॉन्स से प्रभावित यूपी परिवहन निगम, एनएचएआई व कई अन्य विभागों ने भी इससे जुडऩे की इच्छा जताई है। डीजीपी सिंह यूपी 100 की दूसरी वर्षगांठ पर पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। यूपी 100 के बीते वर्ष का लेखा-जोखा पेश करते हुए डीजीपी ने बताया कि इस मियाद में 52 लाख लोगों ने पुलिस से मदद मांगी। कॉल करने वालों में लखनवाइट्स अव्वल रहे जबकि, प्रयागराज दूसरे कानपुर सिटी के लोग तीसरे नंबर पर रहे। इस मौके पर डीजीपी ने बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले 9 पुलिसकर्मियों व रेल पटरी क्रैक होने की सूचना देने वाले युवक को पुरस्कृत भी किया।

बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

यूपी 100 मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि उन्होंने चार बिंदुओं पर मुख्य रूप से कार्य करने का संकल्प लिया था। जिनमें पीआरवी की विजिबिलिटी, रिस्पॉन्स टाइम कम करना, यूपी 100 का अन्य सेवाओं से इंटीग्रेटेड करना और कॉल के जरिए एफआईआर दर्ज करना शामिल हैं, को सफलता पूर्वक पूरा किया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 'इयर ऑफ इंटीगे्रशन' का वर्ष रहा। यानी यूपी 100 ने अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं से एकीकरण स्थापित किया। बताया कि चुनाव आयोग वूमेन पावर लाइन, नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया, यूपी सड़क परिवहन निगम के साथ इंटीग्रेशन की प्रक्रिया जारी है। डीजीपी ने बताया कि जल्द ही यूपी 100 को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस नेशनल प्लेटफॉर्म बनाएंगे। जिसमें दूसरे राज्यों के पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा।

2.55 शिकायतों के साथ लखनऊ अव्वल

डीजीपी ओपी सिंह ने बीते एक वर्ष का लेखा-जोखा देते हुए बताया कि वर्ष 2018 में यूपी 100 को प्रदेश भर से 52 लाख कॉल प्राप्त हुईं। इनमें सबसे ज्यादा 2।55 लाख शिकायतें लखनऊ से प्राप्त हुईं। प्रयागराज 1.99 लाख शिकायतों के साथ दूसरे व कानपुर सिटी 1.68 शिकायतों के साथ तीसरे नंबर पर रहा।

पौने छह लाख मरीजों को पहुंचाई मदद

वर्ष 2018 में यूपी 100 को 5.68 लाख कॉलर्स ने पुलिस से मेडिकल मदद की गुहार लगाई। डीजीपी ने बताया कि इन सभी कॉलर्स के पास पीआरवी पहुंची और जरूरत के मुताबिक एंबुलेंस बुलाकर या पीआरवी के ही जरिए जल्द से जल्द हॉस्पिटल पहुंचाया गया। इनमें सबसे ज्यादा रोड एक्सीडेंट में घायल मरीज थे। इसके अलावा 72 हजार आग लगने की सूचनाए मिलीं, जहां जल्द से जल्द फायर टेंडर्स को भेजकर नुकसान को कम से कम करने की कोशिश की गई। इनमें से सर्वाधित शिकायतें रात 9 से 10 बजे के बीच मिलीं।

बुजुर्गों की शिकायतों में बढ़ोतरी

डीजीपी ओपी सिंह ने बताया कि बुजुर्गों द्वारा की गई शिकायतों में इस साल 38 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। इन शिकायतों में 75 प्रतिशत से अधिक शिकायतें उनके साथ घर में होने वाली हिंसा की थीं। इसके अलावा 23 हजार 804 शिकायतें बच्चों संबंधित रहीं।

जाम व ध्वनि प्रदूषण लखनऊ में सबसे ज्यादा

यूपी 100 के आंकड़ों के मुताबिक, बीते एक वर्ष में ट्रैफिक जाम की सबसे ज्यादा शिकायतें राजधानी लखनऊ से मिलीं। बताया कि लखनऊ में इसकी शिकायतों की संख्या 11,771 रही। वहीं, दूसरे नंबर पर 9,684 शिकायतों के साथ गाजियाबाद दूसरे नंबर पर व प्रयागराज 7790 शिकायतों के साथ तीसरे नंबर पर रहा। इसी तरह ध्वनि प्रदूषण के मामले में भी लखनऊ से सबसे ज्यादा 2282 शिकायतें मिलीं। गाजियाबाद से 1386 शिकायतें व कानपुर सिटी से 1298 शिकायतें प्राप्त हुईं।

सर्वश्रेष्ठ कॉलर को डीजीपी ने सराहा

यूपी 100 की दूसरी वर्षगांठ पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले पुलिसकर्मियों के साथ-साथ सर्वश्रेष्ठ कॉलर का भी पुरस्कार दिया गया। डीजीपी ने बताया कि राजधानी के कैंट निवासी युवक पुरुषोत्तम कुमार ने बीती 16 अगस्त की शाम को सूचना दी कि रेलवे ट्रैक टूटा है। समय रहते सूचना मिलने पर उस ट्रैक पर रेलवे संचालन को बंद कराया गया। जिससे बड़ा रेल हादसा टल गया। डीजीपी ओपी सिंह ने पुरुषोत्तम को शील्ड व उपहार के अलावा अपनी ओर से पांच हजार रुपये नकद का पुरस्कार देने की भी घोषणा की।

टॉप फाइव शिकायतें

मामला                           संख्या

आपसी विवाद                   10.4 लाख

घरेलू हिंसा                         8.1 लाख

प्रॉपर्टी विवाद                      4.9 लाख

धमकी                             2.8 लाख

चोरी                               2.4 लाख

इन्हें मिला पुरस्कार

- इंस्पेक्टर शिवा शुक्ला, लखनऊ

- रेडिया इंस्पेक्टर शैलेंद्र कुमार वाजपेयी, लखनऊ

- इंस्पेक्टर राजित वर्मा, आगरा

- रेडियो इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह, आगरा

- इंस्पेक्टर अवधेश कुमार यादव, गौतमबुद्धनगर

- रेडियो इंस्पेक्टर ऐशपाल सिंह, गौतमबुद्धनगर

- सब इंस्पेक्टर राजपाल सिंह, गौतमबुद्धनगर

- हेड कॉन्स। राजेंद्र सिंह, गौतमबुद्धनगर

- कॉन्सटेबल सतेंद्र कुमार, गौतमबुद्धनगर

Posted By: Satyendra Kumar Singh

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