कमर्शियल भू-खंड का फर्जी बैनामा कर बिल्डर ने बनाए फ्लैट और दुकानें, दो दर्जन से अधिक फ्लैट बेचे

आवास-विकास ने बैठाई जांच, संपत्ति विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत का अंदेशा, एफआईआर दर्ज

Meerut. आवास-विकास में संपत्तियों के आवंटन से लेकर बिक्री के नाम पर नित नए फर्जीवाडे़ सामने आ रहे हैं. हाल ही में संपत्ति को बेनामी घोषित करने के नाम पर 25 लाख रुपये रिश्वत का प्रकरण सामने आया था. जिसके बाद अब आवास-विकास की ढाई करोड़ की संपत्ति का बिना रजिस्ट्रेशन किए फर्जी कागजात के आधार पर बिक्री का मामला सामने आया है. इस संपत्ति को आवास- विकास द्वारा बतौर कमर्शियल आवंटित किया गया था लेकिन कमर्शियल प्लॉट को फ्री होल्ड दिखाकर बकायदा फ्लैट बनाकर बेच दिए गए. अब मामला सामने आने पर आवास-विकास के आला अधिकारी एफआईआर और सीलिंग की कार्यवाही में जुट गए हैं.

जरा समझ लें..

आवास-विकास द्वारा साल 2015 में जागृति विहार स्थित कमर्शियल भू-खंड संख्या 7 कॉम-1 को रंजना एसोसिएट के पार्टनर पंकज गुप्ता को आवंटित किया गया था. इस संपत्ति के एवज में करीब 2 करोड़ 53 लाख रुपये की किश्त आवंटी को जमा करनी थी. मगर किश्त जमा किए बिना ही बिल्डर ने कमर्शियल प्लॉट पर मानकों को ताक पर रखकर बेसमेंट, दुकान और फ्लैट बना दिए. इसके बाद बिल्डर द्वारा संपत्ति विभाग के आला अधिकारियों से मिलीभगत कर संपत्ति के फर्जी कागजात के आधार पर संपत्ति का फर्जी बैनामा और फर्जी नक्शा बनाकर दो दर्जन से अधिक फ्लैट और दुकानें बेच दी.

संपत्ति में फ्री होल्ड का खेल

इस संपत्ति को साल 2018 अगस्त माह में संपत्ति अधिकारी नरेश बाबू द्वारा फ्री होल्ड भी कर दिया गया. जिसके आधार पर बिल्डर पंकज गुप्ता ने फर्जी बैनामा तैयार कर फ्लैट व दुकानों की बिक्री कर दी. इस मामले में सजग प्रहरी शाखा के अध्यक्ष कुलदीप शर्मा द्वारा फर्जीवाडे़ की शिकायत किए जाने पर मामला आला अधिकारियों के संज्ञान में आया. शिकायत होने पर आनन-फानन में संपत्ति अधिकारी ने अपने बचाव में आवंटी के नाम आरसी जारी करते हुए संपत्ति की जांच के लिए ईएक्सईएन को जांच के आदेश दे दिए.

अज्ञात के नाम एफआईआर

मामला संज्ञान में आने पर अपना बचाव करने के लिए संपत्ति अधिकारी नरेश बाबू ने इस मामले में अज्ञात के नाम फर्जी कागजात के आधार पर आवास-विकास की संपत्ति बेचने की एफआईआर दर्ज करा दी. जबकि आवास-विकास को जांच में संपत्ति बेचने वाले बिल्डर पंकज गुप्ता का नाम और फर्जीवाडे़ की पूरी जानकारी हो गई थी. अब मामला डीएम के संज्ञान में आने पर सोमवार को जेई द्वारा अवैध निर्माण का मुकदमा दर्ज कराया गया है.

घिरे संपत्ति अधिकारी व लिपिक

इस मामले में एक बार फिर संपत्ति विभाग के संपत्ति अधिकारी और प्रशासनिक बाबू कटघरे में आ गए हैं. जिन कागजात के आधार पर संपत्ति का बैनामा दिखाया उस बैनाम पर संपत्ति अधिकारी नरेश बाबू के फोटो, साइन समेत विभाग की सरकारी मोहर लगी हुई हैं. साथ ही इस संपत्ति मुख्तार नामे पर 25 लाख की रिश्वत के मामले में गत माह जेल काटकर आए मनोहर बाबू के फोटो समेत अंगूठे का निशान लगा हुआ है. हालांकि ईएक्सईएन की जांच रिपोर्ट में भवन के नक्शे पर मिले आला अधिकारियों के साइन फर्जी निकले हैं.

इस भवन के कागजात में मेरे फर्जी साइन और आवास-विकास की फर्जी स्टांप का प्रयोग किया गया है. ये साइन या फ्री होल्ड मेरे द्वारा नहीं किया गया. यह फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद विभाग द्वारा एफआईआर भी दर्ज कराई गई है.

नरेश बाबू, संपत्ति अधिकारी

मामला गंभीर है. इस मामले में संपत्ति अधिकारी समेत प्रशासनिक बाबू की भूमिका संदिग्ध है. जांच भी कराई जा रही है और एक्शन भी लिया जाएगा.

अजय श्रीवास्तव, सहायक आवास आयुक्त