- पेट्रोल-डीजल के रेट्स को लेकर दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की ओर से ऑर्गनाइज हुआ ग्रुप डिस्कशन

GORAKHPUR: पेट्रोल-डीजल के दामों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी के बाद अचानक गुरुवार मध्य रात्रि से हुई पांच रुपए की कमी से पब्लिक ने राहत की सांस ली है. समाज के हर वर्ग की जेब पर पड़ रहा बोझ इससे कम हुआ है. हालांकि लोगों का ये भी कहना है रेट भले ही कम हुए हों, लेकिन सरकार को ट्रांसपोर्टेशन चार्जेज की मॉनिटरिंग भी करनी चाहिए. ऐसा होने पर ही पब्लिक को असली राहत मिल सकेगी. ये बातें शुक्रवार को दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की ओर से तेल के दामों को लेकर हुए ग्रुप डिस्कशन में उठीं. जिसमें सोसायटी के तमाम वर्गो के लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि तेल की कम हुई कीमतों के साथ ही ट्रांसपोर्टेशन चार्जेज में भी कमी आनी चाहिए.

रेट कम होने से राहत की ली सांस

पेट्रोल व डीजल के तेजी से बढ़ रहे दामों को लेकर दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने 'तेल की मार' शीर्षक से कैंपेन चलाया. इसी बीच गुरुवार को पांच रुपए मूल्य घटाने की घोषणा की गई. शुक्रवार को दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ऑफिस पर इसे लेकर ग्रुप डिस्कशन ऑर्गनाइज किया गया. इस दौरान सोसायटी के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी. सभी का एक सुर में यही कहना था कि दाम में हुई कमी से निश्चित तौर पर पब्लिक को फायदा तो जरूर मिला है. लेकिन मूल्य वृद्धि से जो ट्रांसपोर्टेशन चार्ज बढ़ा है, उसे भी नीचे लाए जाने की जरूरत है. शासन व प्रशासन को सख्ती के साथ इसकी मॉनिटरिंग करनी होगी. ऐसा होने पर तेल के दाम बढ़ने से चढ़ी महंगाई भी कम होती नजर आएगी.

जिम्मेदार रखेंगे नजर तभी कम होगी महंगाई

दैनिक जागरण आईनेक्स्ट के ग्रुप डिस्कपशन में आए विभिन्न क्षेत्रों के लोगों का कहना था कि सरकार डीजल-पेट्रोल की महंगाई कम करने की कोशिश कर रही है, वह सराहनीय कदम तो है, लेकिन इसको कम करने के यज्ञ में आहुति पेट्रोलियम डीलरो की दें रही है. पेट्रोलियम डीलर्स पर सरकार व कंपनियों का यह सबसे घातक प्रहार है. जिस पेट्रोल डीजल पर वैट व टैक्स का पेमेंट हम पहले से कर के आए हैं, अब वो डीलर्स को वहन करना है. अब सवाल इस बात का है कि जिस तरह से रोज रेट बढ़ रहा था, उसी तरह से कम भी करना चाहिए था. डीलर्स जिस क्रम में लाभान्वित हुए थे. उसी क्रम में नुकसान भी उठा सकते थें. लेकिन अचानक से इस तरह रेट कम कर देना सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता है.

ये आए सजेशन

- ट्रांसपोर्टेशन चार्ज को भी करना होगा कम.

- अपनी जरूरत के हिसाब से ही गाड़ी का इस्तेमाल करना बेहतर होगा.

- पेट्रोल के दाम बढ़ने और घटने की प्रक्रिया चलती रहेगी. लेकिन टांसपोर्टेशन चार्ज को लेकर सरकार व प्रशासन को लगाम लगानी होगी.

- कोशिश करें की अपने बच्चों को साइकिल से ही स्कूल या कॉलेज भेजें

- इलेक्ट्रिक व्हीकल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की जरूरत है.

कोट्स

पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन चार्जेज भी बढ़े हैं, लेकिन रेट घटने के बाद ट्रांसपोर्टेशन चार्जेज भी घटने चाहिए. उसके लिए सरकार को मॉनिटरिंग करने की जरूरत है. क्योंकि खाद्य पदार्थो का रेट बढ़ा है, लेकिन घटने का नाम नहीं ले रहा. गुड्स एसोसिएशन को भी इस पर विचार करना चाहिए.

- श्यामली जायसवाल, स्टूडेंट

जब 2014 में यूपीए की सरकार थी, तब पेट्रोल-डीजल के दामों में 68 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. लेकिन 2014 के बाद से अभी तक महज 18 प्रतिशत ही पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े हैं. इधर दाम में कमी हुई है जिससे निश्चित तौर पर पब्लिक को राहत मिली है.

- डॉ. सत्येंद्र सिन्हा, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष, बीजेपी

मैं मेडिकल कॉलेज से गोलघर काली मंदिर तक रोज ऑटो से आती हूं. वहां से यूनिवर्सिटी पैदल आती हूं. काली मंदिर तक आठ रुपए भाड़ा ऑटो वाला लेता था, लेकिन तेल का दाम बढ़ने से दो रुपए रेट बढ़ गया. लेकिन इधर दाम कम होने के बाद भी ऑटो वाले ज्यादा पैसे ही वसूल रहे हैं. जिम्मेदारों को इस पर लगाम लगानी चाहिए.

- शुभी मिश्रा, स्टूडेंट

पेट्रोल-डीजल के दाम में अचानक हुई कमी के कारण कंज्यूमर्स को फायदा तो है लेकिन सप्लायर के लिए यह फायदेमंद नहीं है. जैसे धीरे-धीरे रेट बढ़ाया गया था, उसी तरह से रेट धीरे-धीरे कम किया गया होता तो हमें भी इसका लाभ मिलता. अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में पेट्रोल पंप बंद होने के कगार पर आ जाएंगे.

- डॉ. वीएन सिंह, अध्यक्ष, पेट्रोलियम टेडर्स एसोसिएशन

पेट्रोल-डीजल के अचानक रेट घटने से सभी डीलर्स व कंपनियों को भारी नुकसान हुआ है. कंपनियों का घाटा तो सरकार सब्सिडी, बांड या कोई पैकेज घोषित करके पूरा कर देगी. लेकिन डीलर को अपना घाटा अपनी पूंजी से पूरा करना होगा. औसतन प्रति डीलर डेढ़ से दो लाख का नुकसान हुआ है. ओएमसी व सरकार द्वारा दोहरी मूल्य निर्धारण प्रणाली कहीं से भी उचित नहीं है.

- राजन शाही, मंडल अध्यक्ष, पेट्रोलियम टेडर्स एसोसिएशन

पेट्रोल-डीजल के मूल्य वृद्धि होने से पब्लिक के बीच बुरा असर पड़ा है. जीवन से जुड़ी सभी अनिवार्य चीजें इन्हीं से जुड़ी हुई हैं. इनके मूल्य वृद्धि होने से खाद्य पदार्थ महंगे हो गए हैं. वहीं, रेट घटने के बाद भी इसकी प्रॉपर मॉनिटरिंग नहीं होने के कारण पब्लिक को मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है. सरकार को ट्रांसपोर्टेशन चार्ज में भी कटौती करवाने के दिशा में कार्य करना होगा.

- आरके त्रिपाठी, एडवोकेट

डीजल का रेट जिस प्रकार से बढ़ा है, उससे किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. करीब 50 प्रतिशत डीजल का रेट बढ़ गया. किसान जहां ट्रैक्टर आदि की खरीदारी से अपने खेतों की जोताई और बोवाई का मेहनताना आसानी से चुकता कर लेता था, डीजल के रेट बढ़ने से उसकी भी जेब ढीली हुई है. चूंकि आय का साधन सीमित होता है इसलिए सरकार को इस दिशा में सोचना होगा.

- जितेंद्र द्विवेदी, एक्सपर्ट, गोरखपुर एन्वायरमेंटल एक्शन ग्रुप