- कांवडि़यों की सेवा कर रहे नदीम तो रमजान में रोजा इफ्तार कराते हैं राजेंद्र

-जाति-धर्म भुलाकर सभी लोगों की करते हैं मदद, बोले- दुआओं से बढ़कर कुछ भी नहीं

बरेली : जहां कभी-कभी अपने भी मदद से मुंह मोड़ लेते हैं तो वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे भी लोग हैं जो जाति-धर्म से हटकर सभी की मदद को तैयार रहते हैं. दैनिक जागरण आईनेक्स्ट ने शहर के ऐसे ही दो लोगों से बात की जो हिंदु-मुस्लिम एकता की मिशाल से कम नहीं है. शहर के सिविल लाइंस क्षेत्र निवासी राजेंद्र प्रसाद घिल्डियाल रमजान में ईदगाह पर मेडिकल कैंप लगवाते हैं. साथ ही पूरे महीने इफ्तार पार्टी देते हैं. वहीं फुटा दरवाजा झंडा शरीफ निवासी नदीम शम्सी होली, दिवाली और सावन में कावंडि़यों की सेवा करने के साथ ही रास्ते में घायल लोगों की मदद करते हैं. पूरे सावन महीने में वह कांवडि़यों को मुफ्त दवाई उपलब्ध करवाते हैं. होली पर हिंदू भाइयों को उपहार भी बांटते हैं.

एक बार हेल्प से जागा भाव

नदीम शम्सी बताते हैं कि करीब बीस साल पहले घर जा रहे थे तो देखा रास्ते में किसी का एक्सीडेंट हो गया है, लेकिन उसकी मदद को कोई नहीं आ रहा था. वह तुरंत उसके पास गए तो उसके काफी ब्लड निकल रहा था. इसके बाद वह उसे हॉस्पिटल ले गए जहां डॉक्टरों ने बताया कि ब्लड देना पड़ेगा नहीं तो जान नहीं बचेगी. बताया कि पहले तो वह सोच में पड़ गए, लेकिन बाद में तैयार हो गए. तभी उनकी फैमिली भी आ गई. उनकी फैमिली वाले रोने लगे और बोले-आप ने हमारे परिवार को अनाथ होने से बचा लिया. बस उसी दिन से मैंने सबकी मदद करने का फैसला किया.

समाज सेवा मंच से कर रहे सेवा

नदीम शम्सी करीब 15 सालों से समाज सेवा मंच के जरिए लोगों की सेवा कर रहे हैं. साथ ही किला में एसएन पब्लिक स्कूल चला रहे हैं जहां इस समय करीब 200 का मुफ्त शिक्षा और कॉपी-किताबें दी जा रही हैं. वहीं बानखाने में एक चैरीटेबल हॉस्पिटल भी खोला है, जहां लोगों का फ्री में इलाज किया जाता है और फ्री में एंबुलेंस भी उपलब्ध कराते हैं. इसके साथ ही वह रास्ते में घायल मिलने वालों का फ्री में इलाज करवाते हैं.

कैंसर पीडि़त की बचाई जान

राजेन्द्र बताते हैं कि सन् 1979 की बात है. वह बिजली विभाग में जॉब करते थे. उन्होंने बताया कि वह अपने चार-पांच साथियों के साथ एक ब्लड कैंसर पेंशेट की देखरेख के लिए दिल्ली स्थित एम्स गए थे. वहां पर डॉक्टरों ने उसके लिए ब्लड मांगा तो सभी ने मना कर दिया. लेकिन वह तैयार हो गए. उन्होंने पेशेंट को दो यूनिट ब्लड दिया. बताया कि थोड़ा मानसिक दबाव था कि इतना खून दे दिया, लेकिन उससे ज्यादा खुशी हो रही थी कि आज मैंने किसी की जान बचाई.

अभिनय से कर रहे अवेयर

राजेन्द्र ने बताया कि नुक्कड़ नाटक, रामलीला मंच आदि में अभिनय करके सांप्रायदिक एकता के लिए लोगों को अवेयर करते रहते हैं. साथ समाज सेवा मंच से जुड़कर सभी की मदद भी कर रहे हैं. वहीं अब तक वह 60 बार ब्लड डोनेट कर चुके हैं जिसमें 18 बार मुस्लिम धर्म के व्यक्ति को ब्लड डोनेट किया है.