कानपुर। एक्टर रघुबीर यादव फिर एक बार चर्चा में आ गए हैं। इस बार एक्टर के सुर्खियों में आने की वजह उनकी पर्सनल लाइफ है। दरअसल उनकी पत्नी पूर्णिमा ने उनसे तलाक लेने की अर्जी करने के साथ- साथ 10 करोड़ रुपये के गुजारे भत्ते की भी मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने 1 लाख प्रति माह भरण- पोषण के लिए मांगे हैं। स्पाॅट ब्वाॅय वेब साइट के मुताबिक पूर्णिमा ने अपनी ये डिमांड्स कनफर्म की हैं। साइट द्वारा रिपोर्ट की गई एक्सक्लूसिव खबर की मानें तो रघुबीर इस वक्त संजय मिश्रा की पत्नी रोशनी अचरेजा के साथ लिवइन में रह रहे हैं। कोर्ट में ये बाद रघुबीर ने एक्सेप्ट भी की है। उनका एक 14 साल का बेटा भी है।

नंदिता से शादी करने के लिए बीवी से लेना चाहते थे तलाक

पूर्णिमा ने बताया कि हमारी शादी के 7 साल बाद चीजें खराब होना शुरु हुईं। वो किसी दूसरी महिला के संग प्रेम प्रसंग में थे। उस दौरान रघुबीर किसी सीरियल में अभिनय कर रहे थे। उस दौरान वो जिस महिला के साथ अफेयर में थे वो कोई और नहीं बल्कि नंदिता दास थीं। सीरियल के क्रू मेंबर्स मुझसे कहते थे कि इस आदमी से डायवोर्स ले लो। फिर मुझे कुछ समय बाद पता चला कि रघुबीर नंदिता को अपने माता- पिता से मिलवाने के लिए जबलपुर ले गया है और मुझसे तलाक लेने की अर्जी लगा दी है। उस वक्त वो नंदिता से शादी करना चाहता था इसलिए मुझसे तलाक लेना चाहता था।

संजय की वाइफ को भी किया डेट, हो गई थीं प्रेग्नेंट

पूर्णिमा ने आगे बताया कि बाद में नंदिता ने ही उन्हें छोड़ दिया। नंदिता ने रघुबीर से कहा कि वो किसी और से प्यार करने लगी हैं और उनसे शादी नहीं कर सकती। लोगों ने उस वक्त नंदिता को समझाया कि तुम रघुबीर के साथ सेटल नहीं हो पाओगी। इस दौरान मेरी सारी उम्मीदें टूट चुकी थीं और मैंने मान लिया था कि रघुबीर वापस नहीं लौटेगा। मुझे सिर्फ एक चीज की चिंंता थी कि मैं अपने बेटे को कैसे पाल पाऊंगी। फिर कुछ समय के बाद रघुबीर गुड़गांव में रहने लगा। जिस बिल्डिंग में संजय मिश्रा रहते थे वो उसी में ही रहने लगा। संजय और रघुबीर के बीच अच्छी दोस्ती हो गई और वो अकसर साथ में लंच व डिनर पर एक- दूसरे को इनवाइट करने लगे। धीरे- धीरे रघुबीर की नजदीकियां संजय की पत्नी रोशनी से बढ़ीं और कुछ वक्त बाद पता चला कि वो प्रेग्नेंट है। फिर रोशनी ने संजय से कहा कि वो उनसे तलाक चाहती हैं।

रघुबीर ने बेटे को फोन पर कर दिया था ब्लाॅक

उस वक्त मैं और मेरा बेटा बुरे हालात से गुजर रहे थे। रघुबीर ने हमारी मदद भी नहीं की। फिर मैं टीचिंग जाॅब करने लगी। मेरा एक मात्र यही एम था कि मैं अपने बेटे की पढ़ाई पूरी करा सकूं। मैं फाइनेंशियली बुरे दौर में थी और रघुबीर को कोई फर्क नहीं पड़ा। कोर्ट ने बाद में रघुबीर को खर्च के लिए हर महीने 20 हजार रुपये देने को कहा पर ये पर्याप्त नहीं था। मैंने कभी बेटे को पिता से मिलने के लिए नहीं रोका। दोनों साथ में वैकेशन पर भी जाते रहे हैं पर रघुबीर ने ही बेटे को फोन पर ब्लाॅक कर दिया। इससे मेरे बेटे का दिल टूट गया था।

Posted By: Vandana Sharma

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