क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : प्राइवेट हॉस्पिटलों द्वारा 'आयुष्मान भारत योजना' को हाशिए पर रखे जाने का एक मामला फिर सामने आया है. ऐसे में गरीबों व जरूरतमंद मरीजों का मुफ्त इलाज कैसे होगा, सहज ही समझा जा सकता है. अब देखिए ना. सिटी के राज हॉस्पिटल में गोल्डेन कार्डधारियों को इलाज के लिए फजीहत झेलनी पड़ रही हैं. हॉस्पिटल में एक नोटिस चिपकाया गया है. इसमें साफ-साफ लिखा है- न्यूरो, बर्न और गंभीर रोग से पीडि़त मरीजों का यहां आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज नहीं किया जाएगा. ऐसे में यहां आने वाले मरीज अपने खर्च पर इलाज कराने को मजबूर हो रहे हैं.

हेल्थ सेक्रेटरी ने झाड़ा पल्ला

राज हॉस्पिटल में आयुष्मान भारत योजना के तहत न्यूरो, बर्न और गंभीर रोग से पीडि़त मरीजों का इलाज नहीं किए जाने की शिकायत को लेकर आप के प्रतिनिधिमंडल ने हेल्थ सेक्रेटरी डॉ नीतिन मदन कुलकर्णी से मुलाकात कर पूरी जानकारी दी. लेकिन, कोई एक्शन लिए जाने की बजाय हेल्थ सेक्रेटरी ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि हॉस्पिटल मैनेजमेंट को अपनी मर्जी से मरीजों का इलाज करने की छूट है.

डीसी-डीसीसी को शिकायत, एक्शन नहीं

आप के प्रदेश प्रवक्ता कुणाल मिश्रा ने बताया कि शिशिर सेवा केंद्र ईस्ट जेल रोड में इलाज करवा रहे रामजी कुमार गुप्ता से जुड़ा यह मामला है. राज हॉस्पिटल में आयुष्मान भारत को लेकर एक नोटिस चस्पा किया गया है. इसमें लिखा है- आयुष्मान भारत की सुविधा न्यूरो, बर्न, प्लास्टिक व क्रिटिकल केयर के लिए उपलब्ध नहीं है. इस मामले में रांची के डीसी, डीडीसी सह आयुष्मान भारत योजना के नोडल अधिकारी से भी शिकायत की गई, लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है.