चुनाव आयोग में दाखिल किए गए शपथ पत्र को अगर सच मानें, तो जब वे पहली बार कुंडा से विधायक चुने गए थे उस समय उनकी उम्र महज 19 साल थी. जबकि भारतीय कानून के अनुसार विधायक बनने की उम्र सीमा कम से कम 25 साल होनी चाहिए.

जब राजा भैया पहली बार कुंडा से वर्ष 1993 में विधायक बने थे उस समय वह लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे थे और उनकी उम्र लगभग 26 साल थी.

उसके हिसाब से इनकी उम्र 45 साल होनी चाहिए, लेकिन 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में दिए गए शपथ पत्र में उन्होंने अपनी उम्र 33 और 38 साल बताई थी.

जेल मंत्री

विभिन्न तरह के विवादों से घिरे राजा भैया एक बार फिर उस समय चर्चा में आ गए थे, जब अखिलेश यादव के नेतृत्व में बनी समाजवादी पार्टी की सरकार में उन्हें मंत्री पद की शपथ दिलाई गई. बाद में उन्हें जेल मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया.

राजा भैया की उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिला के कुंडा विधान सभा से ये लगातार पांचवी जीत है.

इस बार निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में विजयी राजा भैया ने 30 जनवरी 2012 को प्रतापगढ़ के रिटर्निंग ऑफिसर को दिए अपने शपथ पत्र में कहा है कि वे बेंती गांव के थाना-हथिगवां, तहसील-कुंडा के निवासी हैं और उनकी उम्र 38 साल है.

वर्ष 2007 में भी चुनाव आयोग में दाखिल किए गए अपने शपथ पत्र में राजा भैया ने अपनी उम्र 33 साल बताई थी. इस हिसाब से पांच साल के बाद उनकी उम्र 38 साल है.

रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के दादा राजा बजरंग बहादुर सिंह पंत नगर विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति के अलावा हिमाचल प्रदेश के पहले राज्यपाल थे. राजा भैया अपने परिवार के पहले व्यक्ति हैं जो सियासत में शामिल हुए हैं.

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