चेन्नई (तमिलनाडु) (एएनआई/पीटीआई)। नागरिकता अधिनियम में संशोधन और इसके खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन के बाद अभिनेता से राजनेता बने रजनीकांत ने आज अपना रुख स्पष्ट किया। पत्रकारों से बात करते हुए 69 वर्षीय अभिनेता रजनीकांत ने कहा सीएए हमारे देश के किसी भी नागरिक को प्रभावित नहीं करेगा। विवादास्पद नागरिकता संशोधन अधिनियम से मुसलमानों के लिए कोई खतरा नहीं है। अगर यह मुसलमानों को प्रभावित करता है तो मैं पहला व्यक्ति होउंगा जो उनके लिए खड़ा होगा। उन्होंने कहा कि कोई समझाएगा कि बंटवारे के दौरान जिन मुस्लिमों ने भारत देश में ही रुकने का फैसला किया, उन्हें अब देश से बाहर कैसे भेजा जाएगा? रजनीकांत ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल अपने सियासी हितों के लिए देश के आम लोगों को सीएए के खिलाफ भड़का रहे हैं। यह बहुत ही गलत है।

एनपीआर जरूरी लगाना बहुत जरूरी

तमिल सुपरस्टार रजनीकांत ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बाहरी लोगों के बारे में पता लगाने के लिए एनपीआर जरूरी है। इसके साथ ही कहा कि एनआरसी अभी तक तैयार नहीं हुआ है। एएनआई के आधिकारिक हैंडल से ट्वीट किए जाने के बाद रजनीकांत की टिप्पणी के बारे में एक ट्वीट वायरल हो गया। कुछ ही मिनटों में 14 हजार से अधिक लाइक्स और 4.5 हजार रीट्वीट के साथ बड़ी संख्या में लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया दी।

सीएए का देश में हो रहा खूब विरोध

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देश के तमाम राज्यों में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार, बंगाल और असम आदि में खूब विरोध हो रहा है। लोग इसको लेकर सड़कों पर उतरे हैं। अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई अवैध प्रवासियों को नागरिकता प्रदान की जाएगी।

National News inextlive from India News Desk