क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ: झारखंड में बालिकाओं के लिए चलाई जा रही मुख्यमंत्री कन्यादान योजना और मुख्यमंत्री सुकन्या योजना का लाभ सभी राशन कार्डधारियों को मिल सकेगा. इस बाबत राज्य सरकार ने अपने प्रावधानों में परिवर्तन किया है. इसके तहत अब एसईसीसी डाटा के बजाय 14 बिंदुओं का घोषणा पत्र आधार माना जाएगा. इस बारे में विभागीय सचिव अमिताभ कौशल ने बुधवार को बताया कि राज्य में 3 तरह के राशन कार्डधारी हैं, जिनमें 2 नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के अंतर्गत कवर होते हैं, जबकि तीसरा अन्य सफेद राशन कार्डधारी हैं. नए प्रावधानों के तहत अब तीनों मुख्यमंत्री सुकन्या योजना और मुख्यमंत्री कन्यादान योजना का लाभ ले सकेंगे.

नक्सली हिंसा के शिकार के मुआवजा में संशोधन

कैबिनेट सेक्रेटरी अजय कुमार सिंह ने बताया कि निर्वाचन कार्य के दौरान तैनात कर्मियों को नक्सली या उग्रवादी हिंसात्मक दुर्घटनाओं के शिकार होने पर मिलने वाली अनुदान या क्षतिपूर्ति अनुदान की राशि में भी संशोधन किया गया है. उन्होंने बताया कि इसके तहत ड्यूटी पर तैनात कर्मी की मौत होने पर 15 लाख का मुआवजा और उग्रवादी और असामाजिक तत्वों द्वारा सशस्त्र हमलों के दौरान मौत होने पर दोगुना यानी कि 30 लाख रुपए मुआवजा दिया जाएगा. वहीं, स्थाई दिव्यांगता को लेकर भी अलग-अलग कैटेगरी तय की गई है, जिसमें 5 परसेंट से लेकर 100 परसेंट के बीच अलग-अलग दिव्यांगता पर 75 हजार से 7.5 लाख रुपये देने पर भी कैबिनेट ने सहमति दी है.

उग्रवादी हमले में दिव्यांगता पर दोगुना मुआवजा

वहीं, उग्रवादी हमलों के कारण हुई दिव्यांगता की स्थिति में राशि दोगुनी हो जाएगी. उन्होंने बताया कि स्टेट कैबिनेट ने कंबल वितरण योजना को अब श्रम विभाग से महिला एवं सामाजिक कल्याण विभाग में ट्रांसफर कर दिया है. उन्होंने बताया कि कैबिनेट के अन्य प्रमुख निर्णयों में हर जिले में प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 की धारा 84 के तहत उनसे जुड़े वादों के निपटारे के लिए स्पेशल कोर्ट का पावर दिया गया है.

15 पदों के अवधि विस्तार को स्वीकृति

वहीं, राज्य वित्त आयोग के कार्यालय में 15 पदों के अवधि विस्तार पर भी स्वीकृति दी गई. यह अवधि विस्तार 31 मार्च 2020 तक के लिए होगा. उन्होंने बताया कि इसके अलावा कैबिनेट ने पेयजल विभाग और गृह विभाग के कुछ अन्य प्रस्तावों पर भी सहमति दी है.