क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : रिम्स में आज से एम्स की तर्ज पर ट्रॉमा सेंटर में मरीजों का इलाज शुरू कर दिया जाएगा. यहां रोड एक्सीडेंट में गंभीर रूप से घायल मरीजों को भी बेहतर इलाज मिलेगा. मॉडर्न सुविधाओं से लैस इस सेंटर में अब ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाई जा सकेगी. फ‌र्स्ट फेज में ट्रामा के कुछ बेड ही चालू किए जा रहे हैं. ऐसे में 100 बेड का सुपरस्पेशियलिटी सेंटर चालू होने में अभी 5-6 महीने का समय लगेगा. 14 जुलाई को सीएम रघुवर दास इस सेंटर का उद्घाटन करेंगे. इसके बाद सेंटर को मरीजों के लिए खोल दिया जाएगा.

चोट के हिसाब से होगा ट्रीटमेंट

इंटरनेशनल लेवल के इस सेंटर में चोट के हिसाब से मरीजों का इलाज होगा. इसके लिए अलग-अलग जोन बनाए गए हैं, जिसमें गंभीर मरीज को रेड जोन, कम गंभीर मरीज को येलो जोन और मामूली रूप से गंभीर मरीज को ग्रीन जोन में रखा जाएगा. इसके आधार पर ही मरीजों का इलाज किया जाएगा. वहीं ठीक होने के बाद मरीजों को संबंधित वार्ड में भेज दिया जाएगा. मरीजों को वार्ड में भेजने के लिए जो ओवरब्रिज बनाया गया है वो भी मेन बिल्डिंग से अटैच है.

ग‌र्ल्स स्टूडेंट्स की परेशानी दूर

हॉस्पिटल कैंपस में ही पावर हाउस के पास 500 बेड का ग‌र्ल्स हॉस्टल भी आज से शुरू हो जाएगा. जहां ग‌र्ल्स स्टूडेंट्स के लिए सेपरेट व्यवस्था होगी. इसमें मेडिकोज के अलावा डेंटल और नर्सिग की स्टूडेंट्स भी होंगी. हर तरह की सुविधाओं से लैस इस हॉस्टल में सिक्योरिटी भी टाइट रहेगी.

अब एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक में बैठेंगे अधिकारी

रिम्स हॉस्पिटल के चालू होने के बाद से ही मेन बिल्डिंग में ही अब तक एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक चल रहा था. इस वजह से अधिकारियों के लिए एक जगह बैठने की व्यवस्था नहीं थी. अब सालों बाद अधिकारियों को नए ब्लॉक में एक ही छत के नीचे सारी सुविधाएं मिलेंगी. वहीं अधिकारियों का अपना चैंबर भी होगा. इसके अलावा मीटिंग के लिए कांफ्रेंस रूम भी बनाया गया है.

नए ट्रॉमा सेंटर में ये मिलेगी फैसिलिटी

-स्पेशलिस्ट डॉक्टर करेंगे घायल मरीजों का इलाज

-मरीजों के हाल की पल पल की जानकारी मिलेगी स्क्रीन पर

-एक से ज्यादा परिजनों को अंदर जाने की नहीं होगी परमिशन

-किस डॉक्टर की देखरेख में हो रहा इलाज, मिलती रहेगी इसकी जानकारी

-जोन के हिसाब से मरीजों की केयर भी अच्छे ढंग से होगी

-व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए सिक्योरिटी व्यवस्था भी अपग्रेड

-एंबुलेंस को मरीज को अंदर सेंटर के गेट तक छोड़ने की छूट