- टोल प्लाजा पर फॉस्ट कोड रीड न होने से हो रही परेशानी

- चालक और टोल प्लाजा पर आए दिन हो रहे विवाद

आई कंसर्न

मेरठ. रोडवेज विभाग के चालकों की लापरवाही रोडवेज के बजट पर भारी पड़ रही है. जल्दबाजी और जाम से बचने के चक्कर में चालक टोल प्लाजा पर तेजी से बस दौड़ाते हैं जिसके कारण टोल प्लाजा के कैमरे बसों पर लगे फॉस्ट कोड रीड नही कर पाता और टोल प्लाजा का बैरिकेडिंग नही खुलता. ऐसे में कई बार चालक से भी टैक्स ले लिया जाता है और ऑनलाइन टैक्स भी कट जाता है.

बसों में लगे थे फास्टकोड

दरअसल, छह माह पहले रोडवेज निगम की सभी बसों के फ्रंट शीशे पर फास्ट कोड या बार कोड का स्टीकर लगाया गया था.परिवहन विभाग से एनएचआईए से अनुबंध के तहत यूपी के सभी टोल प्लाजा पर बसों के आवागमन पर प्रति बस 290 रुपए का ऑनलाइन भुगतान हो जाता है. इससे चालकों को टोल प्लाजा पर रुकना भी नही पड़ता था.

जल्दबाजी बनी परेशानी

इस योजना में चालकों को फॉस्ट कोड की बकायदा ट्रेनिंग दी गई. बावजूद इसके चालक जल्द बाजी के चक्कर में टोल प्लाजा में बस की रफ्तार धीमी नही करते. लिहाजा टोल प्लाजा पर लगे सीसीटीवी कैमरा इन फॉस्ट कोड को रीड नही कर पाते और चालकों को टोल प्लाजा पर कैश मे भुगतान करना पड़ता है. कई बार टोल ऑनलाइन भी कट जाता है. जिससे रोडवेज को नुकसान उठाना पड़ता है.

फैक्ट-

- प्रति बस टोल प्लाजा पर

- 290 रुपए का ऑनलाइन भुगतान प्रति बस टोल प्लाजा पर

- 310 ट्रिप भैंसाली डिपो की बसों की एक दिन में

- 731 के करीब ट्रिप सोहराबगेट डिपो की बसों की

वर्जन-

टोल प्लाजा पर कई बार डाटा फीड भी हो जाता है लेकिन बैरियर नही खुलता तो चालक से कैश ले लिया जाता है और रोडवेज के अकाउंट से भी ऑनलाइन पैसा कट जाता है. इस समस्या के निस्तारण के लिए एनएचआईए के अधिकारियों से बात की जा रही है.

- भारत भूषण, डिपो एकाउंट प्रभारी