होल्डिंग टैक्स और बढऩे वाला है

आपको निगम सुविधा दे ना दे, पर आपका होल्डिंग टैक्स और बढऩे वाला है. यही नहीं, अगर आप पान की दुकान भी चला रहे हैं, तो अब निगम आपसे पैसे लेगा. निगम को भरोसा है कि इन छोटी-छोटी दुकानों से लेकर बड़ी बिल्डिंग व घरों तक का होल्डिंग टैक्स बढ़ा दिए जाने से निगम के राजस्व में वृद्धि होगी. कुछ महीने बाद यह बोझ लोगों पर पडऩे वाला है, क्योंकि निगम अपनी बजट का 30 परसेंट टैक्स जिन सरकारी बिल्डिंग से लेता था, उसे अब कर मुक्त कर दिया गया है. इसके बदले पटनाइट्स की जेब पर चोट करने की प्लानिंग है. निगम ने बजट में यह भी कहा कि संपत्ति कर पुनर्निर्धारण करने से ढाई गुना वृद्धि होने की संभावना है. एक अप्रैल के बाद से सरकारी बिल्डिंग से निगम टैक्स नहीं लेगा, इसके बदले सरकार 75 परसेंट से अधिक का अनुदान देगी.

सरकार के भरोसे होगा डेवलपमेंट

अब तक निगम सरकारी भवनों के टैक्स देने के रवैये को लेकर खासा नाराज रहता था. निगम ऑफिसर्स का कहना था कि अगर ये टैक्स टाइम पर मिल जाएं, तो डेवलपमेंट का काम तेजी से आगे बढ़ेगा. हालांकि जब इन भवनों को कर मुक्त कर दिया गया है, तो अब सरकारी अनुदान पर ही इनकी निर्भरता होगी. ऐसे में अगर फंड मिलने में लेट हुआ, तो शहर के डेवलपमेंट का काम फिर से पेंडिंग पड़ता जाएगा, जिसका सीधा-सीधा खामियाजा आम पब्लिक को ही भुगतना पड़ सकता है.

30 परसेंट की कमी का नहीं दिखा असर

बजट में इसका उल्लेख नहीं किया गया कि सरकारी बिल्डिंग से होल्डिंग टैक्स नहीं लेने का सीधा असर बजट पर पडऩा चाहिए. तीस परसेंट के घाटे को दिखाया नहीं गया है. पूर्व मेयर कृष्ण मुरारी यादव ने कहा कि 28 करोड़ के घाटे का बजट इसके जुटने से और भी बढ़ जाएगा, इसके बावजूद भी बजट बेहतर तरीके से तैयार किया गया है.

कुछ ऐसा है बजट का एस्टिमेट  

पटना म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन के कैपिटल आउटले को देखें, तो इस बार नन प्लान में 1,03,09,78, 818, प्लान में 49,02,35, 415 रुपए दिखाया गया है. इसमें प्लांट एंड मशिनरी, रोड एंड ब्रिजेज में तीस किलोमीटर पीसीसी रोड एंड ड्रेन, 220 हाई मास्ट 3600 सीएफएल, 25 पार्क, पब्लिक ट्वॉयलेट 10, 4 फॉगिंग मशीन, 1 पार्किंग एरिया, 3000 मेन होल एरिया सहित कई चीजों को शामिल किया गया है.

घाटे का बजट, करोड़ों की बचत

एक तरफ निगम ने 28 करोड़ के घाटे का बजट पेश किया है, तो दूसरी ओर शहर के विभिन्न बैंकों में इसके 128,43,32,292.90 करोड़ रुपए पड़े हुए हैं. बजट पेशी के दौरान वार्ड नंबर एक के  काउंसलर संजय कुमार सिंह ने कहा कि इस राशि का यूज डेवलपमेंट वर्क में किया जाए, ताकि हर वार्ड का कायाकल्प हो सके. निगम के ऑफिसर का कहना है कि राशि जिस मद के लिए आती है, उसी में उसका खर्च होना है.

काउंसलर को 189 रुपए का भत्ता

काउंसलर ने बैठक के दौरान इस बात पर नाराजगी दिखाई कि किस तरह से काउंसलर के भत्ते के साथ भी मजाक किया गया है. इन लोगों ने आरोप लगाए कि आखिर 189 रुपए मंथली पर क्या होगा. यही नहीं, घाटे को कम करने के लिए कई तरह के हथकंडे भी अपनाए गए हैं.

बजट के पैसे पर पतियों का राज

श्रीकृष्णापुरी स्थित सामुदायिक भवन में जिस वक्त बंद कमरों में बजट की बैठक चल रही थी, उस वक्त बाहर पार्षद पतियों के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे. चाय, काफी से लेकर नाश्ता और खाने तक का प्रबंध था. इस दौरान उनके फैमिली मेंबर्स और कई अन्य लोग चाव से ऑर्डर दे रहे थे.  

बंद कमरे में हो गया पास  

एक घंटे के भीतर शहर की साफ-सफाई से लेकर पानी व ड्रेनेज की प्रॉब्लम को दूर करने वाले बजट को आम बैठक में पास कर दिया गया. एक घंटे के भीतर चार से पांच काउंसलर ने मेयर से सवाल-जवाब किए. इसके बाद सारे काउंसलर के पास एक-एक सूटकेस आया और बजट को पास कर दिया गया. निगम के अब तक के इतिहास में पहली बार बंद कमरे में 72 काउंसलर के बीच बजट पास किया गया है. इस बैठक से आम नागरिक और मीडिया प्रतिनिधि को दूर ही रखा गया था. एक घंटे के भीतर 28 करोड़ के घाटे की राशि को पेश करने के बाद मेयर, कमिश्नर और डिप्टी मेयर के चेहरे पर खुशी दिख रही थी. वहीं, कई गुट में बंट चुके निगम के काउंसलर की बैठक बोर्ड की कार्यवाही के बाद बाहर देखने को मिली, जिसमें पूर्व मेयर और डिप्टी मेयर ने अपनी भड़ास निकाली.

2013-2014 के बजट पर एक नजर

वर्ष 2013-2014 के लिए कुल प्राप्ति - 3,32,73,30,976.00 रुपए

वर्ष 2013-2014 के लिए कुल व्यय - 3,61,18,65,767.00 रुपए

वर्ष 2013-2014 के लिए घाटे की राशि - 28,45,34,791.00 रुपए की संभावना   

पार्क, सड़क किनारे वृक्षारोपण, लाइटिंग सिस्टम की बेहतरी, जलजमाव से छुटकारा जैसी कई योजनाएं बजट में शामिल की गई. पटनाइट्स को इससे काफी फायदा पहुंचने वाला है.

अफजल इमाम, मेयर

28 करोड़ के घाटे का बजट है, फिर भी इसका असर आमलोगों पर नहीं होने दिया गया. बजट को बेहतर तरीके से और लोगों को ध्यान में रखकर ही तैयार किया गया है.

रूप नारायण मेहता, डिप्टी मेयर

सरकारी बैंकों में करोड़ों-करोड़ का रुपया पड़ा हुआ है. अगर उसे निकाल कर डेवपलमेंट के काम में लगाया जाए, तो हर किसी को फायदा होगा. सिर्फ बैंक में रखकर किसी को कुछ भी फायदा नहीं हो सकता. जनता त्राहिमाम कर रही है, जिसे देखने वाला कोई नहीं है.

संजय कुमार, वार्ड नंबर 1

यह बजट आमलोगों के साथ किया जाने वाला मजाक भर है. जिस तरह से सरकारी बिल्डिंग से टैक्स को खत्म कर इसका लोड आम पब्लिक पर डाल दिया गया है, यह कहीं से भी सही नहीं है. अब पान की गुमटी लगाने वाले को भी टैक्स पे करना पड़ेगा.

विनय कुमार पप्पू, पूर्व डिप्टी मेयर