कानपुर। रूस के लिए आज का दिन बेहद खास है क्योंकि 20 सितंबर, 1970 को उसका अंतरिक्ष प्रोब, लूना-16 चांद की सतह पर उतरा था और वहां से नमूने के तौर पर कुछ चट्टानों को एकत्रित किया था। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पहली बार था कि एक मानवरहित प्रोब का इस्तेमाल किसी सामान को अंतरिक्ष से धरती पर लाने के लिए किया गया था। बता दें कि यह प्रोब चांद पर फर्टिलिटी समुद्र के किनारे उतरा था, यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसका अब तक पता नहीं चल पाया है। इस प्रोब ने चांद की सतह एक इलेक्ट्रिक ड्रिल की मदद से चट्टानों और मिट्टी के नमूने उठाये थे। ये ड्रिल एक रोबोट की तरह थी।

चांद पर किसी प्रोब को भेजने का रूस का दूसरा प्रयास

बताया जाता है कि इस रूसी प्रोब में एक टीवी कैमरा भी लगा हुआ था। लूना 16 सफलतापूर्वक 24 सितंबर, 1970 को चांद की सतह पर से  100 ग्राम मिट्टी और चट्टान के नमूनों को लेकर पृथ्वी पर वापस लौट आया था। इस प्रोब ने चांद के सतह पर एक प्रायोगिक स्टेशन छोड़ दिया था, जो लंबे समय तक चांद के बारे में अनोखी जानकारियां धरती पहुंचाते रहा। बता दें कि यह दूसरी बार था, जब सोवियत (अब रूस) के वैज्ञानिकों ने चंद्रमा की सतह से कुछ नमूनों को धरती पर लाने के इरादे से किसी प्रोब को चांद पर भेजने का प्रयास किया था।

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लूना 15 चांद पर पहुंचने से पहले हो गया क्रैश

इससे पहले उन्होंने लूना 15 को चांद पर भेजने की कोशिश की थी लेकिन वह मिशन बीच में ही फेल हो गया, यह प्रोब चांद पर पहुंचने से कुछ ही दूर पहले क्रैश हो गया। इसे अपोलो 11 के चंद्रमा पर उतरने से ठीक तीन दिन पहले लॉन्च किया गया था। इस लॉन्चिंग को लेकर तब काफी विवाद हुआ था। लूना 16 के बाद नवंबर 1970 में रूस ने लूना-17 प्रोब चांद भेजा। इस प्रोब ने एक हफ्ते तक चांद के इर्द-गिर्द चक्कर लगाया और नमूने बटोरे।

Posted By: Mukul Kumar

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