अपने भविष्य को गढ़ने के तमाम तरीके हैं। भविष्य वो चीज है, जिसका कोई अस्तित्व नहीं होता। हमारे अनुभव में इसका अस्तित्व नहीं है, पर यह एक संभावना की तरह है। कुछ लोग अपनी मजबूरियों के अनुसार अपने भविष्य की योजना बनाते हैं, जबकि कुछ लोग अपना भविष्य सोच-समझ कर, सचेतन होकर तय करते हैं, तो कुछ लोग अपना भविष्य बिना सोचे-समझे तय कर लेते हैं। लेकिन हम अपने जीवन के साथ
क्या करना चाहते हैं, यह पूरे होश-ओ-हवास में सचेतन तरीके से तय करना सबसे अहम है। आप सचेत होकर जो भी चुनेंगे, वह निश्चित रूप से फल देगा। आप क्या चुनते हैं यह अहम नहीं है, अहम यह है कि आप जो भी चुनते हैं, उसके पीछे अपनी जिंदगी लगा देते हैं, आप उसमें खुद को झोंकने के लिए तैयार रहते हैं। यानी एक तरह से जिस भविष्य का फिलहाल अस्तित्व नहीं है, आप एक योजना के तहत उसे एक सच्चाई में बदलने की कोशिश कर रहे हैं।

एक तरीका है कि आप एक बीज को बो कर भविष्य में उसके फलने का इंतजार कर सकते हैं। दूसरा तरीका है कि अपने भविष्य को आप खुद गढ़ सकते हैं। या फिर और भी तरीके हैं, जैसे आप एक सही नांव पर बैठ जाएं, और खुद को हवा के रुख पर छोड़ दें। जब हवा अनुकूल होगी तो यह वहां खुद चली जाएगी जहां इसे जाना होगा। अपने भविष्य को चुनने के ये तमाम तरीके हैं। लेकिन आपको एक बात समझनी जरूरी है कि यहां आप उस चीज को संभालने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, जो अभी मौजूद है, बल्कि उस चीज को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, जो अभी है ही नहीं। आप उस पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं, जो अभी होनी है। तो भविष्य भी कुछ ऐसी ही चीज है।

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपने कितनी बार हाथ की लकीरों को पढ़ा या पढ़वाया होगा, कितनी बार आपने ग्रह-नक्षत्रों की गणना और चाल जानने की कोशिश की होगी, कितनी बार आपने अपनी जन्मकुंडली पर विशेषञ्जरूाों से सलाह ली होगी, फिर भी आप अपने भविष्य के बारे में कुछ नहीं जानते, उसे लेकर अंधेरे में हैं। और जीने की एकमात्र वजह भी यही है कि आप नहीं जानते कि अगले पल में क्या होने वाला है, इसीलिए यह जीवन जीने लायक है। तो भविष्य एक तरह से अंधेरा है। मैं यह नहीं कह रहा कि अंधेरा कोई खराब या नकारात्मक चीज है। अंधेरा एक अनंत और अपरिमित संभावना है,इसलिए आप इसके साथ जो चाहें कर सकते हैं, लेकिन इसके साथ अपना मनचाहा करने के लिए भी आपके पास अपनी एक स्थिरता और संतुलन होना जरूरी है।

हो सकता है कि आप बुद्धिमान, पढे-लिखे और काबिल हों, लेकिन आपमें अगर संतुलन नहीं है और आप इधर-उधर डगमगा रहे हैं तो आप एक बहुत बड़ी त्रासदी साबित होंगे। अगर आप थोड़े बेवकूफ हैं तो आप कम खतरनाक हैं, क्योंकि बुद्धि या समझ आपको अपना मनचाहा करने के लिए उकसाती है। अक्सर हम चाहते हैं कि वाहन तेज चले, लेकिन अगर यह टकराता या दुर्घटनाग्रस्त होता है तो हादसे का स्वरूप भी बड़ा होता है। आपने यह तो सुना ही होगा- तुम जितना ड्डपर जाओगे, गिरने पर तुम्हें उतनीज्यादा चोट लगेगी। आपकी बुद्धिमानी, काबिलियत और क्षमता बर्बादी से आपका बचाव नहीं करती, बल्कि आपका संतुलन ही आपको बर्बादी से बचाता है।

इसीलिए जब पतंजलि से योग के तीसरे अंग, यानी आसन के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा, स्थिरं, सुखं, आसनं। जिसका मतलब है, जिसमें सुख हो और स्थिरता मिलती हो, वही आसन है। आराम का मतलब है कि आप चैन से या सहज हैं और स्थिर हैं। अगर आपके जीवन में ये दो चीजें हैं तो आप जीवन की पूर्ण क्षमता को जानेंगे। अगर आपमें बुद्धि, समझदारी, और काबिलियत हों तो भी आप जीवन की पूर्ण क्षमता को नहीं जानेंगे, क्योंकि उसके लिए आपको अपने अंदर स्थिरता, सहजता व संतुलन की जरूरत होगी। इससे पहले कि हम उस भविष्य को संभालने की कोशिश करें, हमें सहजता व स्थिरता को हासिल करना होगा। अगर आपने इन दोनों चीजों को साध लिया तो बाकी चीजें तो अपने आप हो जाएंगी।

जिंदगी में सहजता और स्थिरता लानी बेहद जरूरी
आप अगर हर वक्त सहज और स्थिर हैं, तो सब कुछ अपने आप आपकी क्षमताओं और हालातों के मुताबिक होने लगेंगी। हालांकि इसमें बहुत सारे कारक होते हैं, लेकिन ये सभी कारक आपके फायदे के लिए काम करने लगेंगे। अगर आपके जीवन में ये दोनों चीजें - सहजता या स्थिरता नहीं हैं, तो आप देखेंगे कि एक दिन आप जोश में भरे घूमेंगे, जबकि अगले ही दिन टूटे और बिखरे हुए नजर आएंगे। तो इसके पहले कि हम अपना भविष्य तय करें, उससे पहले हमें अपनी आज की जिंदगी में सहजता और स्थिरता लानी होगी।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव

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