फिर याद आई जनकवि कैलाश गौतम की कालजयी रचना

रोड टू संगम में दिलचस्प नजारे, शहर के शहर गांव के गांव उमड़ पड़े

vikash.gupta@inext.co.in

PRAYAGRAJ: भक्ति के रंग में रंगल गांव देखा, अमौसा नहाए चलल गांव देखा. जनकवि कैलाश गौतम की कालजयी रचना अमौसा का मेला में लिखी गई लाइनो का यह अंश एक बार फिर कुंभ मेला प्रयागराज की पावन भूमि पर जीवंत हो उठा है.

सिविल लाइंस, लीडर रोड हाउसफुल

हालांकि, मौनी अमावस्या पर रेलवे और बस स्टेशनों से आने वाले भीड़ का सिलसिला शनिवार से ही शुरू हो गया था. इलाहाबाद जंक्शन पर जैसे ही सुबह की ट्रेनों के आने का सिलसिला शुरु हुआ. वैसे वैसे सड़क पर भीड़ के बढ़ने का सिलसिला भी शुरू हो गया. रविवार की दोपहर तक हाल यह हो गया कि प्रमुख मार्ग लीडर रोड भारी भीड़ के कोलाहल से हाउसफुल हो चुका था. वहीं आश्चर्यजनक रूप से सिविल लाइंस का नवाब यूसुफ रोड और सुभाष चौराहे से हनुमान मंदिर, मेडिकल चौराहा, सोहबतियाबाग होते हुए संगम की ओर से जाने वाली पूरी की पूरी सड़क पर जनसैलाब का अद्भुत दृश्य सामने आने लगा.

सिर्फ एक सवाल, संगम कितनी दूर

कंधे, सिर और कमर पर गठरी समेत अन्य सामान लादे भीड़ में यह पहचान कर पाना मुश्किल था कि कौन मेट्रो सिटी का है और कौन देहात से चलकर आया है ? शाही स्नान पर्व से ठीक एक दिन पहले के इस सीन में शहर और गांव सब एक दूसरे में समाते नजर आए. बाहर से आने वाली भीड़ के चेहरे पर थकान स्वाभाविक थी. लेकिन उनके मुंह पर एक ही सवाल था भईया संगम कितनी दूर है ?