त्रिदेव महाशक्तिशाली देवताओं में जगत के पालनहार विष्णु भगवान हैं। वैष्णव भक्त इन्हें सबसे बड़ी शक्ति मानते हैं। भारत में विष्णु और उनके अवतार को समर्पित अनेकों मंदिर हैं। आइए जानते हैं आज विष्णु भगवान के विख्यात मंदिरों के बारे में।

1. बद्रीनाथ

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यह भगवान विष्णु का सबसे बड़ा प्रसिद्ध मंदिर है, जिसे भारत के चार धाम और उत्तराखण्ड के चार धामों में स्थान प्राप्त है। यह मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है। बद्रीनाथ धाम की कथा में बताया गया है यहां भगवान विष्णु ने लक्ष्मी जी के साथ मिलकर शिवजी की तपस्या की थी।

2. जगन्नाथ

यह मंदिर भी वैष्णवों के ‘चार धाम’में शामिल है। जगन्नाथ पुरी मंदिर से जुड़े कई चमत्कार और अद्भुत कथाएं हैं, जो आज भी देखने को मिलती हैं। विशेष रूप से हर साल जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

3. पद्मनाभस्वामी मंदिर

भारत के केरल राज्य के तिरुअनन्तपुरम में स्थित यह भगवान विष्णु का प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की विशाल मूर्ति शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान है। यहां पर भगवान विष्णु की विश्राम अवस्था को ही ‘पद्मनाभ कहा जाता है।

4. रंगानाथ स्वामी

यह दक्षिण भारत के तिरुचिरापल्ली शहर के श्रीरंगम में स्थित है। यहां विष्णु जी के पवित्र दिवस एकादशी पर धूम—धाम से पूजा—अर्चना की जाती है। रंगनाथ स्वामी श्री हरि के विशेष मंदिरों में से एक है। कहा जाता है भगवान विष्णु के अवतार श्री राम ने लंका से लौटने के बाद यहां पूजा की थी। माना जाता है कि गौतम ऋषि के कहने पर स्वयं ब्रह्मा जी ने इस मंदिर का निर्माण किया था।

5. तिरुपति वेंकटेश्वर मन्दिर

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यह भगवान विष्णु के सबसे पुराने और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। वेंकटेश्वर मंदिर तिरुपति के पास तिरूमाला पहाड़ी पर है। प्रभु वेंकटेश्वर या बालाजी को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। हर साल लाखों भक्त आकर भगवान वेंकटेश का आशीर्वाद और दर्शन पाते हैं। तिरुपति में सबसे ज्यादा चढ़ावा और दान आता है। यहां केश दान करने की भी प्रथा है।

6. विट्ठल रुकमिणी

यह विष्णु और लक्ष्मी का मंदिर महाराष्ट्र के पंढरपुर में है। विष्णु के एक रूप विट्ठल रुकमिणी लक्ष्मी रूप के संग विराजित है। यहां स्थित विट्टल प्रतिमा श्याम रंग की है, जिनके दोनों हाथ कमर पर लगे हुए हैं। यहां पांच दैनिक संस्कार में प्रभु को उठाना, श्रृंगार, भोग, आरती और शयन शामिल है।

7. सिंहाचलम मंदिर

यह नरसिंह देवता का मंदिर विशाखापट्टनम के पास है। अक्षय तृतीया के दिन यहां भक्तों का मेला लगता है। सिंहाचलम मंदिर की मान्यता है कि विष्णु अवतार भगवान नरसिंह इसी जगह अपने भक्त की रक्षा के लिए अवतरित हुए थे। शनिवार और रविवार के दिन इस मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने दूर—दूर से आते हैं।

-ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीपति त्रिपाठी

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