क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ :रांची में मॉल कल्चर आने के बाद से यह यहां के युवाओं के लिए कमाई का अच्छा खासा जरिया बन रहा है. शहर के बेरोजगार युवक-युवतियां जो नौकरी के लिए यहां-वहां भटक रहे हैं. उनमें से कई को यहां जॉब का नया ठिकाना मिला है. जी हां, सिटी में खुले शॉपिंग मॉल्स में इस वक्त हजारों की संख्या में युवक-युवतियां जॉब कर रहे है. इनमें कई ग्रामीण इलाकों से हैं. लेकिन उसके बाद भी वह रांची के मॉल में डयूटी करने आते हैं. इन युवाओं के अनुसार महीने का 10 से 15 हजार रुपए आसानी से इनकम कर रहे हैं. यही नहीं इस जॉब के सहारे यूथ अपनी पढ़ाई पूरी करने के साथ ही अन्य खर्चा भी संभाल रहे हैं. वहीं कई युवा ऐसे भी हैं जो अपनी इस कमाई की बदौलत अपना घर भी चला रहे हैं.

कई जॉब का मिल रहा मौका

मॉल में युवाओं को कई अलग-अलग प्रकार के रोजगार का अवसर मिल रहा है. कोई सुरक्षा की डयूटी में लगा है तो किसी ने रेस्टोरेंट, आईस्क्रीम पार्लर, कपड़ा व शू शॉप में काम पकड़ रखा है. युवाओं ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण जॉब की तलाश में थे. मॉल में नौकरी मिलने के बाद स्थिति में काफी सुधार आया है.

युवा की कहानी उनकी जुबानी

पढ़ाई करने के साथ ही सोनू कुमार न्यूक्लियस मॉल की एक शॉप में काम करते हैं. वे कई साल से यहां काम कर रहे हैं. सोनू ने बताया कि वे राम लखन सिंह यादव कॉलेज से ग्रेजुएशन कर रहे हैं. और एक साल से अपनी पढ़ाई की खर्चा स्वयं ही उठा रहे है.

सोनू के साथ ही इसी मॉल में चमेली कच्छप भी काम करती हैं. चमेली यहां दो साल से काम कर रही हैं. चमेली ने बताया कि पहले स्थिति ठीक नहीं थी लेकिन अब सुधार हो रहा है. घरवाले शादी कराने के लिए परेशान रहते हैं. मैं अपनी कमाई का कुछ हिस्सा शादी के लिए जमा कर रही हूं.

अभिषेक कुमार बोले कि मैं रामलखन सिंह यादव कॉलेज से ग्रेजुएशन कर रहा हूं. एक साल से मॉल में जॉब कर रहा हूं. काम कोई छोटा नहीं होता. बेरोजगार रहने से अच्छा है कहीं जुड़ कर नौकरी करना.

इसी तरह दीपक मिश्रा ने बताया कि मैंने यहां नौकरी करके नई बाइक और नया मोबाइल खरीदा है. मैं अब अपने खर्चे के लिए घर से पैसे की डिमांड नहीं करता हूं. यहां नौकरी के साथ-साथ कॉम्प्टीशन की तैयारी भी करता हूं.

वहीं पंक्षी लकड़ा का कहना है कि दो साल से मॉल में जॉब कर रहीं हूं. पहले नौकरी के लिए कई जगह भटकना पड़ा था. कपडे़ की दुकान में काम मिला लेकिन सैलरी नहीं देते थे. जिसके बाद यहां आई अब मेरी आर्थिक स्थिति पहले से काफी अच्छी हो गयी है. मैंने अपनी कमाई से ही अपने टूटे घर को ठीक कराया. मैं तो ज्यादा पढ़ नहीं सकी लेकिन आज अपनी कमाई से अपने छोटे भाई को पढा रही हूं.