- यूनिवर्सिटी में बिना किसी इजाजत के हो गई लाखों रुपए की खरीदारी

- शासन ने खरीदारी पर लगा रखी थी रोक

- ऑडिट में सामने आई बात, शासन ने मांग जवाब

GORAKHPUR: गोरखपुर यूनिवर्सिटी में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. पिछले दिनों जो कारनामे अंजाम दिए गए हैं, उसकी पर दर परत खुलती जा रही है. पिछली कई ऑडिट आपत्तियों के बाद एक बार फिर यूनिवर्सिटी में नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं. इस बार करीब पौने तीन करोड़ रुपए खर्च किए जाने को लेकर साल 2011-12 की ऑडिट में स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग ने तमाम खर्चो पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने तमाम खर्चो पर सवाल उठाते हुए इन्हें रूल्स के खिलाफ इल्लीगल करार दिया है. बीते साल अक्टूबर में ही यह रिपोर्ट वित्त विभाग को सौंपते हुए शासन स्तर से आवश्यक कार्यवाही करने का अनुरोध किया गया था, जिस सीरीज में अब उच्च शिक्षा विभाग ने यूनिवर्सिटी से जवाब मांगा है.

रोक के बाद भी हो गई खरीदारी

ऑडिट में यह बात सामने आई है कि साल 2011-12 के दौरान, जब नई गाडि़यों की खरीद पर बैन था, यूनिवर्सिटी ने 29.21 लाख रुपए की गाडि़यां खरीद लीं, यही नहीं कई मदों में करीब 58 लाख रुपए वापस कर दिए गए हैं, जिसका कहीं कोई नियम ही नहीं था. लेखा परीक्षक ने लीव इनकैशमेंट, डेली वेजेज एंप्लाई के मद में हुए खर्चो पर भी सवाल उठाए हैं. 2011-12 में बेहिसाब खर्च को लेकर काफी सवाल उठाए गए थे और खूब लेटर बाजी भी हुई थी, लेकिन उस दौरान यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने उन आपत्तियों पर कोई ध्यान नहीं दिया था.

इन खर्चो पर उठाए हैं सवाल

- जुलाई 1991 में रोक के बावजूद डेली वेजेज एंप्लाई की नियुक्ति कर 25 लाख से ज्यादा पेमेंट.

- यूनिवर्सिटी एंप्लाइज को फेस्टिव एडवांस के लिए 81 लाख रुपए का पेमेंट.

- सितंबर 2008 में रोक के बाद भी 29 लाख से ज्यादा का पेमेंट.

- बिना रूल-रेग्युलेशन के 588,922 रुपए की शुल्क वापसी.

- बगैर शासनादेश रिटायर्ड कर्मचारियों को लीव इनकैशनमेंट के मद में 28 लाख से ज्यादा का पेमेंट.

- कई अलग-अलग मदों में करीब 10 लाख रुपए का पेमेंट.

- एक प्रोफेसर की गलत सैलरी बनाते हुए करीब साढ़े सात लाख का पेमेंट.

- एक प्रोफेसर व व एक कर्मचारी की अनियमित नियुक्ति कर लाखों का पेमेंट.

- डेली रूटीन के काम के लिए भी यूनिवर्सिटी एंप्लाइज को अलग से मानदेय के तौर पर लगभग 10 लाख का पेमेंट.

वर्जन

प्रदेश शासन का पत्र प्राप्त हुआ है. प्रकरण कई वर्ष पूर्व का है. ऑडिट में उठाई गईं आपत्तियों का अध्ययन किया जा रहा है. सम्यक विचारोपरांत आख्या दी जाएगी.

- वीरेंद्र चौबे, फायनेंस ऑफिसर गोरखपुर यूनिवर्सिटी

रजिस्ट्रार - सुरेश चंद्र शर्मा, सवाल-जवाब

सवाल- गलत पेमेंट और खरीदारी को लेकर आपत्ति सामने आई हैं, यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन क्या कर रहा है?

रजिस्ट्रार- आपत्तियां काफी पुरानी हैं, इसको स्टडी किया जा रहा है. जिस एंड पर गलती हुई है, वहां जांच की जा रही है.

सवाल - इससे पहले भी कई मामलों में आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं, उनका अब तक क्या स्टेटस है?

रजिस्ट्रार- वाई फाई के मामले में शासन को अवगत करा दिया गया है, इसमें यूनिवर्सिटी को अब तक प्रोजेक्ट हैंडओवर नहीं हुआ, जिससे यूनिवर्सिटी की कोई जवाबदेही नहीं बनती है. वहीं स्टेडियम भी अब तक पूरा नहीं हुआ है, जिसके लिए ऑडिटर जनरल के ऑफिस में मीटिंग भी हुई थी, इसमें यूनिवर्सिटी ने अपना पक्ष रख दिया था. आगे जैसे निर्देश होगा वैसी कार्रवाई की जाएगी.

सवाल - इसमें आगे यूनिवर्सिटी क्या स्टेप लेगी?

रजिस्ट्रार - ऑडिट में जो प्वाइंट रेज किए गए हैं, उनकी स्टडी की जा रही है. इसमें जिम्मेदारी तय की जाएगी और अगर गलत आपत्तियां होंगी, तो इसका जवाब बनाकर ऑडिटर को भेजा जाएगा.

कॉलिंग

यूनिवर्सिटी कभी भी समस्याओं को लेकर सीरियस नहीं रहता है. छात्रहित की सभी योजनाएं अटकी हुई हैं, लेकिन वह सिर्फ पैसा बर्बाद करने में लगे हुए हैं. छात्रों से फीस पूरी लेते हैं, लेकिन व्यवस्था के नाम पर कुछ भी नहीं है.

- शिवशंकर गौड़

स्टेडियम और वाई-फाई का अभी छात्रों को इंतजार है. इन सबके बीच एक और आपत्ति सामने आ गई. यूनिवर्सिटी में छात्रों से जुड़ी सभी योजनाओं का यही हाल होता है. छात्रों के पैसों को जमकर बर्बाद किया जा रहा है.

- भास्कर चौधरी