देश के कुछ राज्यों में सौरमास तो कुछ में चंद्रमास है चलन में

दोनों पद्धतियों में महीने की शुरुआत में होता है 10 दिन तक का अंतर

देहरादून.

इस बार दून में सावन मास के सोमवार व्रत की शुरुआत अलग-अलग दिन नहीं होगी. दरअसल देश के कुछ हिस्सों में सौरमास और कुछ हिस्सों में चंद्रमास चलन में है. सौरमास की शुरुआत संक्रांति से होती है, जबकि चंद्रमास पूर्णिमा से शुरू होती है. ऐसे में दोनों पद्वतियों में किसी भी महीने की शुरुआत में 10 दिन तक का फर्क हो जाता है. देहरादून में देश के कई हिस्सों के लोग रहते हैं, इनमें कुछ सौरमास को मान्यता देते हैं तो कुछ चंद्रमास को. दोनों महीने अलग-अलग दिन शुरू होने का सावन के महीने पर सबसे ज्यादा फर्क पड़ता है. दरअसल सावन के सोमवार का काफी महत्व होता है. ऐसे में सौर मास और चंद्र मास को मानने वालों के पहले और आखिरी सोमवार के व्रत में एक हफ्ते का फर्क हो जाता है. इस बार 32 सालों ऐसा हो रहा है कि सावन महीना में सौर और चंद्र दोनों पद्धतियों में एक दिन के अंतर से शुरू हो रहा है, इस बार 16 जुलाई को पूर्णिमा और 17 जुलाई को पूर्णिमा है. यानी पहला सोमवार दोनों पद्धतियों को मानने वालों का एक ही दिन होगा.

इस बार चंद्रमा और सूर्य मास दोनों के हिसाब से सावन मानने वाले लोगों के सावन साथ शुरू होंगे. ऐसा करीब 32 वर्ष बाद हो रहा है. जबकि पहाड़ी और अन्य जगहों के लोगों के सावन एक साथ शुरू होंगे. वरना इनमें हमेशो पांच से सात दिनों का गेप हो जाता था.

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ये है महत्व

उत्तराखंड विद्वत सभा के पूर्व उपाध्यक्ष आचार्य भरत राम तिवारी के अनुसार हिंदू धर्म में श्रावण माह बहुत पवित्र माना जाता है. जो शिव भक्त इस माह शिर्वाचन एवं महामृत्युंजय जप करते हैं उनकी समस्त कामनाएं भगवान पूर्ण करते हैं्. पूरे सावन के महीने जलाभिषेक कर शिव भगवान को खुश किया जा सकता है.

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सूर्य एवं चंद्र मास का साथ प्रारंभ

डा. आचार्य सुशांत राज के अनुसार इस बार सूर्य एवं चंद्र मास का प्रारंभ 17 जुलाई के दिन एक साथ हो रहा है. प्रात: चार बजकर 24 मिनट पर मिथुन लग्न में सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करेंगे. इसी दिन 17 जुलाई से चंद्र मास भी प्रारंभ होगा. ऐसा संयोग कई वर्षो बाद होता है और ये 32 वर्ष बाद बन रहा है.

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व्रत रखकर करें पूजन

श्रावण मास में प्रतिदिन व्रत रखकर शिवपूजन बिल्बपत्र, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, पुष्प, गंगाजल सहित अभिषेक आदि करने से मनोवांछित कामनाओं की पूर्ति होती है.

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खंडग्रास चंदग्रहण- 16-17 जुलाई आषाढ़ पूर्णिमा मंगलवार, बुधवार यह ग्रहण आषाढ़ पूर्णिमा मंगलवार 16 एवं 17 जुलाई की मध्यरात्रि को लगभग समस्त भारत में आरंभ से समाप्ति तक खंडग्रास के रूप में दिखाई देगा.

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कब-क्या

ग्रहण स्पर्श- रात्रि 1.31 बजे से

ग्रहण मध्य- 3.01 मिनट

ग्रहण समाप्त- रात्रि साढ़े चार बजे तक

ग्रहण की अवधि- 02.59

ग्रहण का सूतक- 9 घंटे पूर्व अर्थात

16 जुलाई को शाम 4.31 मिनट पर ग्रहण प्रारंभ होगा.

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कपाट रहेंगे बंद

शाम 4.31 से मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे. इससे पूर्व शाम को होने वाली पूजा-आरती संपन्न होगी. यह ग्रहण उत्तराषाढ़ नक्षत्र के प्रथम चरण में स्पर्श करके उत्तराषाढ़ नक्षत्र के द्वितीय चरण में समाप्त होगा.

कांवड़ यात्रा भी 17 से

कांवड़ यात्रा के मद्देनजर प्रशासन की तैयारी 15 जुलाई तक पूरी कर ली जाएगी. वहीं यहां एंट्री वाले चैक पोस्ट पर पुलिस की खास नजर रहेगी. आरटीओ की टीम भी वहां अपना काम करेगी. जिसके लिए डीएम की ओर से आरटीओ को दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं. साथ ही ऋषिकेश में भी पार्किंग सहित अन्य भीड़ वाले स्थलों में सुरक्षा की दृष्टि से ड्रोन उड़ाए जाएंगे. टॉयलेट सहित पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था भी ऋषिकेश में कर दी गई है.

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दून में एंट्री प्वाइंटस पर निगरानी के साथ ही अन्य तरह की व्यवस्थाओं के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं. सभी जगह व्यवस्था देखने के लिए सेक्टर ऑफिसर भी नामित किए गए हैं. सी रविशंकर, डीएम