क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ: कहते है कि सरकारी है. यही तो बीमारी है. मतलब काम का ढिंढोरा पीट दिया गया, शिलान्यास भी कर दिया गया लेकिन उसके बाद उसे उसी हाल में छोड़ दिया गया. इस कारण अब वह सिर्फ शोपीस बनकर रह गया है. जी हां, राज्य की कई योजनाएं ऐसी लापरवाही के चलते फाइलों में दहन होती जा रही हैं. इन्हीं में से एक पब्लिक के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी और शहर की पहचान बनने वाली स्मार्ट रोड भी है. जनवरी 2019 में ही शहर में प्रस्तावित 4 स्मार्ट रोड में से 2 का शिलान्यास किया गया लेकिन 6 माह से अधिक समय गुजरने के बाद भी इन स्मार्ट रोड्स को बनाने का काम एक स्टेप भी आगे नहीं बढ़ा. यह रोड अभी तक केवल फाइलों में ही दौड़ रही है.

जुडको ने जारी किया डेडलाइन

जुडको ने काम कर रही एजेंसी को डेडलाइन जारी करते हुए नया शगुफा छोड़ा है कि दशहरा तक स्मार्ट रोड की जमीन एक्वायर कर काम शुरु किया जाए. हालांकि, इसमें भी अभी कई रुकावटें बाकि हैं. एयरपोर्ट से अरगोड़ा चौक तक काम शुरु करने के लिए महज दो माह का समय शेष है. वहीं , पूरी सड़क पर कई जगह पेड़ लगे हैं जिन्हें हटाने के वैकल्पिक उपाय तलाशे जा रहे हैं. इधर, कंपनी को दिया गया दो साल के समय में 8 माह गुजर चुके हैं.

पब्लिक कर रही इंतजार

बता दें कि राजभवन से हरमू होते हुए बिरसा चौक (8.85 किमी) व बिरसा चौक से रांची एयरपोर्ट (2.55 किमी) तक बनने वाली दो स्मार्ट सड़कों का निर्माण कार्य शिलान्यास के साथ ही शुरू किया गया. तीसरी स्मार्ट रोड राजभवन से कांटोटोली (2.8 किमी) तक का निर्माण कार्य भी जल्द शुरू करने का डिसीजन लिया गया था. वहीं, चौथी स्मार्ट सड़क राजभवन से बूटी मोड़ (7.4 किमी) भी स्वीकृत हो चुकी है. इन सड़कों का एक किनारा यानी दो लेन कम से कम 7 मीटर व अधिक से अधिक 9 मीटर चौड़ा होगा. इस तरह दोनों किनारों को मिलाकर सड़क की चौड़ाई 18 मीटर हो जाएगी. दावे किए गए थे कि वर्ष 2019 के अंत तक राजधानी में सभी चार स्मार्ट सड़कों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा और इसकी सुविधा यहां के लोगों को मिलने लगेगी लेकिन हैरानी की बात यह है कि स्मार्ट रोड का काम अब तक फाइलों से निकलकर बाहर ही नहीं आ पाया है.

क्या-क्या होंगी सुविधाएं

राजधानी में जिन चार स्मार्ट सड़कों का निर्माण होना है, उन पर बिजली, पेयजल, सीवरेज-ड्रेनेज से लेकर एलपीजी पाइपलाइन को भी इंटीग्रेट करने का प्लान है. ये सारी सुविधाएं सड़क के नीचे एक डक बनाकर प्रदान की जाएंगी. इसके अलावा इन सड़कों पर साइकिल से व पैदल चलने के लिए पाथवे भी बनाया जाना है. साइकिल शेयरिंग तो शुरू हो गयी लेकिन स्मार्ट रोड बनाने को लेकर कोई काम शुरू नहीं हो पाया है.

सुविधाओं से लैस स्मार्ट पोल भी

जुडको ने शिलान्यास के समय दावा किया था कि स्मार्ट सड़क कॉन्सेप्ट का मकसद इन रोड पर बेहतर सुविधाएं जैसे ओपन एयर कैफेटेरिया, लैंडस्केपिंग, स्ट्रीट फर्नीचर आदि मुहैया कराना है. साथ ही स्ट्रीट लाइट की जगह एलईडी लाइट्स लगाई जाएंगी. वहीं कई सुविधाओं से लैस स्मार्ट पोल के अलावा वाई-फाई की सुविधा, सीसीटीवी कैमरा, एनवायरमेंट सेंसर्स की भी सुविधाएं होंगी. इन सड़कों पर डिजिटल इंट्रैक्टिव इंफॉर्मेशन पैनल्स होंगे, जिसका यूज कर शिकायतें भी दर्ज कराई जा सकेंगी.

स्मार्ट पार्किग सिस्टम

स्मार्ट सड़कों पर सेंसर आधारित स्मार्ट पार्किग सिस्टम भी होगा. इससे लोग एडवांस में अपनी पसंद के स्थान पर मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करके पार्किग स्लॉट बुक कर सकेंगे. इसके लिए भुगतान ई-वॉलेट या इंटरनेट बैंकिंग के जरिए किया जा सकेगा. अधिकारियों ने बताया कि यह काम प्राइवेट कंपनी के जिम्मे होगा.

वर्जन

डेवलपमेंट वर्क को लेकर कुछ प्राइमरी काम बाकी हैं जिनपर फोकस किया जा रहा है. एजेंसी को डेटलाइन के भीतर काम कंप्लीट कराने का निर्देश दिया गया है.

-राजीव वासुदेवा, निदेशक, जुडको