- एशियन और कॉमनवेल्थ में मेडल जीतने वाले खिलाडि़यों ने नहीं किया प्रदेश में नौकरी के लिए अप्लाई

- यहां पर नौकरी के लिए चल रही मारा मारी के चलते दूसरे प्रदेशों में सेवाएं दे रहे प्रदेश के खिलाड़ी

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LUCKNOW :

एशियन और कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक विजेताओं का सपना तो घर में ही नौकरी करने का है लेकिन इस बार उन्होंने यहां जॉब के लिए आवेदन ही नहीं किया है. यह हाल तब है जब पदक विजेताओं को राजपत्रित अधिकारी का पद देने का शासनादेश भी सरकार ने जारी किया है. इसके बाद भी प्रदेश के पदक वीर घर वापसी नहीं कर पा रहे हैं. सेना, रेलवे जैसे विभाग इन खिलाडि़यों के लिए खेवनहार बने हुए हैं. इस मामले में खेल विभाग की दलील है कि शासनादेश तो है लेकिन नौकरी को लेकर तकनीकी दिक्कतें आती हैं. इन्हें जल्द दूर किया जाएगा. इसके बाद जैसे ही खिलाड़ी का पत्र जॉब के लिए आएगा, उसे तैनाती दे दी जाएगी.

घर में करना चाहते जॉब

इंटरनेशनल एथलीट सुधा सिंह ही नहीं प्रदेश के कई खिलाड़ी अपने घर में नौकरी करना चाहते हैं. वाराणसी की पूनम यादव खेल विभाग में रीजनल स्पो‌र्ट्स ऑफिसर के पद पर ज्वाइन करना चाहती हैं. सेना में शामिल इंटरनेशनल मुक्केबाज सतीश कुमार भी खेल विभाग से जुड़ना चाहते हैं. लेकिन यहां नौकरी को लेकर चल रही उठापटक के चलते इन्होंने अभी तक नौकरी के लिए आवेदन नहीं किया. पंजाब पुलिस में जॉब से पहले एथलीट सीमा पुनिया ने प्रदेश में नौकरी के लिए आवेदन किया था. सुधा सिंह भी इस समय मुंबई रेलवे में कार्यरत हैं. हालांकि उन्होंने प्रदेश में जॉब के लिए आवेदन कर रखा है. इसी तरह इंटरनेशनल वेटलिफ्टर स्वाति सिंह और शूटर मो. असब भी यूपी में जॉब के लिए आवेदन कर चुके हैं.

सीएम ने किया था ऐलान

2014 में ग्लासगो (स्कॉटलैंड) में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद तत्कालीन सीएम ने खिलाडि़यों को राजपत्रित नौकरी देने की घोषणा की थी. इसका शासनादेश दो नवंबर 2015 को जारी किया गया था. इसमें कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और ओलंपिक में मेडल लाने वाले खिलाडि़यों तैनाती दी जानी थी. लेकिन आज तक दायरे में आने वाले किसी भी खिलाड़ी को नौकरी नहीं मिली है. जिसके चलते अब प्रदेश के खिलाडि़यों ने घर में नौकरी मिलने के ख्वाब देखना बंद कर दिया है.

राजपत्रित पदों पर तैनाती सिर्फ चयन आयोग से होती है. इसके लिए परीक्षा और इंटरव्यू निर्धारित है. खेल विभाग ने खिलाडि़यों की भर्ती का शासनादेश तो जारी किया लेकिन नियमों में बदलाव आज तक नहीं हो सका. ऐसे में विभिन्न विभाग मिलकर तय कर रहे हैं कि जिन्हें जॉब दी जानी है, उनकी न तो परीक्षा होगी और ना ही इंटरव्यू लिया जाएगा. इन्हें सीधे तैनाती दी जाएगी. अब तक 49 पद राजपत्रित अधिकारियों के निकाले गए हैं. इन पर सीधी तैनाती की जाएगी.

- चेतन चौहान, खेल मंत्री

मेडल लाने के लिए हमें इतनी मेहनत नहीं करनी पड़ी, जितनी नौकरी के लिए विभागों के चक्कर लगाने में करनी पड़ रही है. अब तो हमें अपने घर में नौकरी की उम्मीद ही नहीं रही है.

- स्वाति सिंह, वेटलिफ्टर

आवेदन किए चार साल हो चुके हैं. रही बात मेडल की तो इस बार भी पदक जीते. लेकिन नौकरी यहां कब मिलेगी, इसका कुछ पता नहीं है.

- सीमा पुनिया, डिस्कस थ्रोअर

सभी अपने घर में नौकरी करना चाहते हैं. मैंने भी घर वापसी के लिए सीएम से लेकर कई जगह नौकरी के लिए आवेदन किया. यह सपना कब सच होगा, पता नहीं.

सुधा सिंह, इंटरनेशनल एथलीट

यूपी के पदक वीर

नाम शहर इवेंट खेल मेडल

स्वाति सिंह वाराणसी कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग ब्रांज

सीमा पुनिया अंटिल मेरठ कॉमनवेल्थ डिस्क थ्रो कई पदक

मो असब मेरठ कॉमनवेल्थ डबल ट्रैप ब्रांज

पूनम यादव वाराणसी कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग गोल्ड

सतीश कुमार बुलंदशहर कॉमनवेल्थ बॉक्सिंग सिल्वर

दिव्या काकरान मुज्जफरनगर कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स कुश्ती ब्रांज

रवि कुमार मेरठ कॉमनवेल्थ निशानेबाजी ब्रांज

सौरभ चौधरी मेरठ एशियन गेम्स निशानेबाजी गोल्ड

शार्दुल विहान मेरठ एशियन गेम्स निशानेबाजी सिल्वर

सुधा सिंह रायबरेली एशियन गेम्स स्टीपल चेज सिल्वर

वंदना कटारिया मेरठ एशियन गेम्स हॉकी सिल्वर

राकेश कुमार बुलंदशहर एशियन गेम्स घुड़सवारी सिल्वर

संतोष कुमार गाजियाबाद एशियन गेम्स बुशू ब्रांज

राहुल चौधरी बिजनौर एशियन गेम्स कबड्डी ब्रांज