चार जुलाई को डीजीपी ओपी सिंह द्वारा किया जाएगा प्रतिमा का अनावरण

1857 की क्रांति के जनक कहे जाते है धन सिंह कोतवाल

सदर थाने में कोतवाल रहते हुए फूंका था क्रांति का बिगुल

Meerut. 1857 की क्रांति के जनक कहे जाने वाले सदर थाने के कोतवाल धन सिंह गुर्जर की प्रतिमा को आदर्श के रूप में सदर थाने में स्थापित किया जाएगा. जिससे देखकर लोगों को इनकी कुर्बानी याद आती रहे. जयपुर से प्रतिमा के लिए आर्डर भी कर दिया गया है. एसएसपी राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि सदर थाने में धन सिंह कोतवाल की प्रतिमा का अनावरण आगामी चार जुलाई को डीजीपी ओपी सिंह द्वारा किा जाएगा.

सालों बाद आई याद

अंग्रेजों के जमाने में सदर थाने के कोतवाल रहते हुए उन्होंने 10 मई, 1857 को अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंका था. इतने साल बाद मेरठ पुलिस को कोतवाल धन सिंह गुर्जर की याद आई है.

ताकि मिलती रहे प्ररेणा

सदर थाने के इंस्पेक्टर प्रशांत कपिल का कहना है कि सदर थाने में इस प्रतिमा को इसलिए लगाया जा रहा है कि चूंकि यह पूर्व में सदर थाने के कोतवाल रह चुके है. इसके साथ कोतवाल धन सिंह गुर्जर भारत के प्रथम स्वतंत्रा संग्राम के प्रथम क्रांतिकारी भी थे. उन्होंने देश में क्रांति की शुरूआत की थी.

क्रांति के जनक धन सिंह गुर्जर

सन 1857 की क्रांति का बिगुल 10 मई, 1857 को मेरठ से फूंका गया था. जिसमें अहम भूमिका अमर शहीद कोतवाल धन सिंह गुर्जर ने अदा की थी. 10 मई को धन सिंह कोतवाल के आदेश पर ही हजारों की संख्या में भारतीय क्रांतिकारी रातों-रात मेरठ पहुंचे थे. अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की खबर मिलते ही आस-पास के गांव के हजारों ग्रामीण भी मेरठ की सदर कोतवाली क्षेत्र में जमा हो गए थे. इसी कोतवाली में धन सिंह पुलिस चीफ के पद पर तैनात थे. 10 मई को धन सिंह ने योजनानुसार बड़ी चतुराई से ब्रिटिश सरकार के वफादार पुलिस कर्मियों को कोतवाली के भीतर चले जाने और वहीं रहने का आदेश दिया. देर रात 2 बजे धन सिंह के नेतृत्व में केसरगंज मंडी स्थित जेल तोड़कर 836 कैदियों को आजाद कराकर जेल को आग लगा दी गई. सभी कैदी क्रांति के शगल में शुमार हो गए. इसके बाद क्रांतिकारियों के बड़े सूमह ने पूरे सदर बाजार और कैंट क्षेत्र अंग्रेजी हुकुमत से जुड़ी हर चीज नेस्तोनाबूत कर दी. रात में ही क्रांतिकारी दिल्ली कूच कर गए. क्रांतिकारियों की जंग-ए-आजादी की इस पहले ने अंग्रेजी हुकुमत की जड़े हिला दीं. जिसके ब्रिटिश सरकार ने धन सिंह इसका दोषी पाया और गिरफ्तार कर मेरठ में ही फांसी पर लटका दिया. कोतवाल धन सिंह के बलिदान को देखकर ही उन्हें क्रांति के जनक के रूप में जाना जाता है.