- अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर छात्राओं ने की हक की बात

- दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की ओर से राजनी-टी में हुई चर्चा

GORAKHPUR: सभी पार्टियां महिलाओं के अधिकार की बात महज दिखावे के लिए करती हैं, जब वह सत्ता में आ जाती हैं तो सबकुछ भूल जाती हैं. इसी तरह की बातें शुक्रवार को गोरखपुर यूनिवर्सिटी के कला संकाय में दैनिक जागरण आई नेक्स्ट और रेडियो सिटी की ओर से ऑर्गनाइज राजनी-टी में उठीं. स्टूडेंट्स के बीच अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का प्रभाव साफ तौर पर दिखाई दिया. छात्राओं ने साफ कहा कि महिला अधिकारों को सुनिश्चि करने वाली पार्टी को ही उनका वोट जाएगा.

लड़कियों की सुरक्षा है जरूरी

प्रोग्राम का संचालन कर रहे आरजे सारांश का ग्रीन सिग्नल मिलते ही सुरभी ने कहा कि महिलाओं को अधिकार देने के नाम पर राजनीतिक पार्टियां केवल दिखावा करती हैं. यदि वह गंभीरता से इस पर विचार करतीं तो 33 प्रतिशत आरक्षण का मामला आज तक लटका नहीं होता. देश में लड़कियों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर सभी ने चिंता जाहिर की और इस पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत बताई. यूथ्स में राजनीतिक पार्टियों और नेताओं के रवैये को लेकर गुस्सा साफ नजर आया. उन्होंने कहा कि लड़कियों की सुरक्षा और शिक्षा पर देश के नेता केवल खोखले वादे करते हैं. वह भी तब जब कोई बड़ी दुर्घटना हो जाती है या उन्हें चुनाव के लिए प्रचार करना होता है. लेकिन सत्ता में रहने वाली राजनीतिक पार्टी महिला आरक्षण, उनकी सुरक्षा को लेक र सख्त कदम नहीं उठाती है. शांभवी ने कहा एक लड़की जब शिक्षित होती है तो पूरे समाज में शिक्षा का प्रसार करने की दिशा में काम करती है. इसलिए उनकी शिक्षा के ठोस इंतजाम किए जाने चाहिए.

मेरी बात

बढ़ती बेरोजगारी पर लगाम लगनी चाहिए, वर्षो तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के बाद यूथ्स रोजगार के लिए भटक रहे हैं. कोर्स कंप्लीट करने के बाद वह परीक्षाओं की तैयारी करते हैं. महंगे दामों पर फॉर्म खरीदने कर आवेदन करते हैं. लेकिन परीक्षा देने के बाद पता चलता है कि पेपर लीक हो जाता है. इसके बाद कोर्ट में वर्षो तक काम लटका पड़ा रहता है.

- कृतिका चौरसिया

कड़क मुद्दा

कहने को हमारा समाज लगातार आगे बढ़ रहा है. लेकिन सरकारी तंत्र दहेज प्रथा पर लगाम लगाने में पूरी तरह से विफल साबित हुआ है. कम होने के बजाए यह बीमारी बढ़ती ही जा रही है. सरकार को चाहिए कि सख्त कानून बनाकर पूरे देश में दहेज प्रथा पर सख्ती से रोक लगाई जाए. दहेज नाम की बीमारी के कारण जिनके घरों में लड़कियां पैदा होती हैं, उनके माथे की शिकन बढ़ जाती है. हालांकि कहने को इसके खिलाफ कानून बनाया गया है, लेकिन वह लागू नहीं होता है. आज भी बड़ी संख्या में दहेज लोभी लड़कियों को प्रताडि़त करते हैं.

सतमोला खाओ, कुछ भी पचाओ

प्रतियोगी परीक्षाओं की वर्षो तक तैयारी के बाद भी युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही है. बीटेक, एमबीए, पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद भी यूथ्स नौकरी की लाइनों में लगकर धक्के खाने पर मजबूर है. प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया को तय समय में पूरा करवाने के लिए कोई ठोस कानून बनाने की जरूरत है. जिससे नौकरी भले न मिले लेकिन कम से कम समय बीत जाने के बाद यूथ्स दूसरी नौकरियों की तैयारी में तो जुट जाएगा. नौकरियों के फॉर्म तो सैकड़ों में आ रहे हैं लेकिन बहुत कम ऐसे होते हैं जिनकी प्रक्रिया पूरी होती है.

कोट्स

महिलाओं के अधिकार के नाम पर जो कानून बनाए गए हैं वह केवल कागजों में ही सिमटे हुए हैं. जमीन पर इन्हें लागू करने के लिए जरूरी है कि एक अलग संस्था का गठन किया जाए, जो कड़ाई के साथ उन्हें लागू करे. सरकारी कर्मचारियों के कार्यो की भी मॉनीटरिंग की जानी चाहिए.

- सुरभी मालवीय

देश में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या बन गई है. 400-500 रुपए खर्च करने के बाद हम फॉर्म भर कर परीक्षा देते हैं. उसके बार पेपर लीक हो जाता है. हमारे वर्षो की मेहनत पर पानी फिर जाता है और धांधली करने वालों की चांदी हो रही है. हम पढ़-लिखकर बेरोजगार घूम रहे हैं जबकि नेता लोग बिना मेहनत के लाखों की सैलरी उठा रहे हैं.

- उदीची गौड़

देश की विविधता को बनाए रखने के लिए सरकार को प्रयास करना चाहिए. अनेकता में एकता ही हमारे देश की पहचान है. इस पर हमला होना लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है.

- कलीम अख्तर

देश में स्त्रियों के खिलाफ लगातार अपराधों में बढ़ोत्तरी हो रही है. इन अपराधों पर अंकुश लगाने और लड़कियों को रोजगार के समान अवसर उपलब्ध कराने वाली पार्टी को ही मेरा वोट जाएगा.

- अंजली श्रीवास्तव

भ्रष्टाचार के कारण हमारा देश पर्याप्त विकास नहीं कर पा रहा है. इस पर सख्ती से लगाम लगाने वाली और दलित वर्ग युवाओं को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने वाली सरकार को मेरा वोट जाएगा. लोग जितने शिक्षित होंगे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी.

- राजेश कन्नौजिया

देश में बहुतेरे ऐसे नेता हैं जो शिक्षित तो नहीं हैं. हालांकि ऐसा मुश्किल है लेकिन एक जुरूरी कदम सरकार को उठाना चाहिए कि राजनीति में आने के लिए नेताओं के बौद्धिक योग्यता की परीक्षा ली जाए.

- अंकिता त्रिपाठी

इव टीजिंग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. लड़कियों के खिलाफ छेड़खानी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए. 1090 पर कंप्लेन करने पर भी ठोस कार्रवाई नहीं होती है.

- सबा

एक तो रोजगार के अवसर लगातार कम होते जा रहे हैं. दूसरे यदि कोई वैकेंसी होती भी है तो कोर्ट-कचहरी के चक्कर में यूथ्स दौड़ते ही रह जाते हैं. केंद्र व राज्य सरकार की जो भी भर्तियां हों पारदर्शी होनी चाहिए.

- सिद्धार्थ गौतम

कॉलेज में अदर सब्जेक्ट की तरह सेल्फ डिफेंस का भी एक सब्जेक्ट होना चाहिए. जिससे लड़कियां आत्मनिर्भर हो सकें. जिससे विपरीत परिस्थितयों में वह अपनी रक्षा स्वयं कर सकें.

अंजली विश्वकर्मा