देवत्व यात्रा में पहनी थी राजस्थान से डिजाइन होकर आयी साड़ी

कुंभ से विदायी से पहले आभार यात्रा में पहनी श्वेता पारीख की डिजाइन की गयी ड्रेस

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PRAYAGRAJ: पहली बार कुंभ मेला में अखाड़े के रूप में शामिल हुए किन्नर अखाड़ा ने कई इतिहास रच डाले. पहली बार शाही स्नान से लेकर अपनी परंपरा को अमरत्व स्नान से निभाया. पूरे मेले के दौरान किन्नर अखाड़ा प्रमुख लक्ष्मी नरायन त्रिपाठी अपनी ड्रेसिंग के कारण भी चर्चा में रहे. कुंभ मेला एरिया में प्रवेश करने के लिए देवत्व यात्रा निकाली तो उनके लिए ड्रेस राजस्थान से डिजाइन होकर आया था और कुंभ के समापन पर आभार यात्रा निकाली तो इसके लिए ड्रेस दादा साहब फाल्के एकेडमिक अॅवार्ड विनर श्वेता पारीख ने उनके लिए ड्रेस तैयार करके भेजी.

दो महीने तक प्रयाग में किया प्रवास

कुंभ मेला के समापन के साथ ही मंगलवार को किन्नर अखाड़ा के संत-महात्माओं ने लगभग दो माह के कुंभ प्रवास के बाद विदा लिया. इस मौके पर किन्नर संत-महात्मा शहर के सभी लोगों को आशीष देकर विदा हुए. उन्हें विदाई देने के लिये बड़ी संख्या में शहर के लोग सड़कों पर उतर आये. अखाड़ा प्रमुख आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने सभी को आशीर्वाद दिया.

दशाश्वमेध घाट से शुरू हुई यात्रा

कुंभ समाप्ति के बाद किन्नर अखाड़ा की ओर से निकाली गई आभार यात्रा की शुरुआत दारागंज के दशाश्वमेध घाट से हुई. सबसे आगे रथ पर अखाडे़ की बऊचरा माता और आराध्य भगवान महाकाल की सवारी थी. उनके पीछे किन्नर अखाडे़ के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी भव्य रथ पर छत्र और चंवर सहित सवार थे. वह सभी को आर्शीर्वाद देते हुए चल रहे थे. इस दौरान दारागंज, अलोपीबाग, बैरहना, रामबाग, बाई का बाग होते हुए रामभवन चौराहे पर बने भगवान शिव के मंदिर में पूजन के साथ आभार यात्रा संपन्न हुई. किन्नर अखाड़ा प्रमुख के पीछे रथ पर किन्नर अखाड़ा की उत्तर भारत की प्रभारी भवानी मां, महामंडलेश्वर पूजा, पुष्पामाई, कामिनी माई, वंशिका, पवित्रा, मयूरी माई, संजना माई सहित अन्य प्रमुख संत-महात्मा और बडी संख्या में शिष्य और श्रद्धालु शामिल हुए.

लक्ष्मी से लक्ष्मीनारायण

यूपी के गोरखपुर निवासी किन्नर अखाडे़ की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी का जन्म मुंबई के ठाणे में हुआ.

-कथक से पोस्ट ग्रेजुएट लक्ष्मी ने सच का सामना, बिग बॉस सीजन-5 और पांच दर्जन से ज्यादा फिल्मों में काम किया.

-थर्ड जेंडर के हक को लेकर लड़ाई लड़ी और समाज में उन्हें सम्मान दिलाया.

-यूनेस्को में भी किन्नरों की बात रखी. 2015 में उज्जैन में किन्नर अखाडे़ की स्थापना की.

-प्रयागराज के कुंभ में किन्नर अखाडे़ को ऊंचाईयां देते हुए जूना अखाडे़ के साथ जोड़ते हुए शाही स्नान किया.