नई दिल्ली (आईएएनएस)। कर्नाटक में जेडीएस-कांग्रेस के बागी विधायकों की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में काफी लंबी बहस चली। इसके बाद बुधवार को इस मामले में फैसला सुनाया जाना तय हुआ। हाल ही में कर्नाटक के बागी विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इस्तीफा न स्वीकारे जाने को लेकर याचिका दायर की थी। इस पर आज हुई सुनवाई के दाैरान सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष से पूछा कि 6 जुलाई को  गठबंधन के विधायकों द्वारा दिए गए इस्तीफे को स्वीकार करने या अस्वीकार करने के फैसले पर क्या उन्हें रोका गया था।

सुप्रीम कोर्ट में आने तक इस्तीफे पर वह चुप रहे

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी से जबाब मांगा। सीजेआई रंजन गोगोई ने पूछा कि अध्यक्ष विधायकों के सुप्रीम कोर्ट में आने तक इस्तीफे पर चुप रहे ... क्यों?। इस पर अभिषेक सिंघवी ने जवाब दिया कि अध्यक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर बताया था कि क्या हुआ था। सीजेआई गोगोई ने पूछा कि जब विधायक अपने इस्तीफे के साथ विधानसभा अध्यक्ष के पास गए तो उन्होंने फिर निर्णय क्यों नहीं लिया।
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विधायक 11 जुलाई को पहली बार स्पीकर से मिले

जवाब में सिंघवी ने कहा कि यह लिखित में था और उस दिन अध्यक्ष माैजूद नहीं थे। फिर कोर्ट ने कहा कि इस्तीफे का निर्णय तो 6 जुलाई को उन्हें सुनाया जा चुका था।  सिंघवी जवाब दिया विधायक द्वारा दिए गए वास्तविक इस्तीफे की पहली शर्त यह है कि वे स्पीकर के सामने खुद उपस्थित हों। विधायक 11 जुलाई को पहली बार स्पीकर से मिले।  कोर्ट ने कहा कि प्रावधान ने पत्र द्वारा इस्तीफा देने की उपेक्षा नहीं की थी, लेकिन यदि विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष से व्यक्तिगत मुलाकात की थी, तो उनसे तुरंत इस्तीफे पर फैसला करने की उम्मीद थी।

आखिर फिर 11 जुलाई को फैसला क्यों नहीं हुआ

इस पर फिर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आखिर फिर 11 जुलाई को फैसला क्यों नहीं हुआ?  मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि विधानसभा अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र की शक्ति को चुनौती दे रहे थे तो आपके लाभ के लिए बता रहे हैं अदालत ने एक फ्लोर टेस्ट (पिछले साल के फ्लोर टेस्ट का उल्लेख करते हुए) का आदेश दिया था। इतना ही नहीं आधी रात को सुनवाई के लिए एक प्रोटेम स्पीकर को भी नियुक्त किया था। इसके सीजेआई कने कहा कि हमारी शक्तियों के अधिकार क्षेत्र की कवायद केवल आत्म-संयम पर निर्भर करती है।
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अध्यक्ष कोर्ट अधिकार क्षेत्र पर सवाल नहीं कर रहे

सिंघवी ने कहा कि अध्यक्ष कोर्ट अधिकार क्षेत्र पर सवाल नही कर रहे हैं।साथ ही कहा मान लीजिए अध्यक्ष पागल हो तो आपका प्रभुत्व हस्तक्षेप कर सकता है । वहीं  विधायकों के वकील मुकुल रोहतगी ने भी अपनी दलीलें रखीं। सीजेआई ने रोहतगी से कहा कि हम नहीं कह सकते हैं कि किस तरह से अध्यक्ष को विधायकों के इस्तीफे को स्वीकार या अयोग्य पर फैसला करना चाहिए। सवाल यह है कि क्या अयोग्य ठहराए जाने से पहले इस्तीफा देने का फैसला या दोनों पर अपने निर्णय को लागू करने के लिए अध्यक्ष के लिए कोई संवैधानिक दायित्व है?  
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इस तरह बागी विधायक पहुंचे थे सुप्रीम कोर्ट

बता दें कि बीती 6 जुलाई को कर्नाटक में जेडीएस-कांग्रेस की 13 महीने पुरानी गठबंधन सरकार के 11 विधायकों के इस्तीफे के बाद से मुसीबत में आ गई। इसके बाद से सीएम कुमार स्वामी समेत जेडीएस-कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विधायकों को मनाने की काेशिश में जुटे थे। वहीं 9 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने कह दिया था कि इस्तीफा देने वालों में 8 विधायकों के इस्तीफे निर्धारित प्रारूप के मुताबिक नहीं हैं। ऐसे में विधायकों ने 10 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

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