हाईकोर्ट की फटकार के बाद खुली निगम की कुंभकरणी नींद
 
पटना जंक्शन के बाहर कचरे का ढेर. थोड़ा आगे बढऩे पर जीपीओ गोलंबर के पास कचरा, इसके अलावा आप चाहे गांधी मैदान जाएं, अशोक राजपथ जाएं या फिर बोरिंग रोड ही क्यूं ना जाएं, यहां भी आपको कचरा ही दिखेगा. मानो हमारा शहर कचरे के ढेर पर बैठा हुआ हो. यही वजह है कि हाईकोर्ट को पांच दिनों का अल्टीमेटम देकर शहर की सफाई का आदेश देना पड़ा.

सिर्फ ऑन पेपर सफाई
पटना की सफाई का जिम्मा नगर निगम का है. निगम के पास इसके लिए पर्याप्त हैंड्स भी हैं. निगम के पास टोटल 2,525 लेबर हैं. इसके अलावा तमाम मशीनरी भी उपलब्ध है. इसमें 3 कॉम्पैक्टर, 12 टीपर, 31 ट्रैक्टर, 2 बॉबकट, 1 जेसीबी और 1 पॉकलेन मौजूद है. बावजूद इसके पटना साफ-सुथरा दिखने के बजाय गंदा ही दिखता है. निगम की मानें तो इसके पीछे सफाईकर्मी और मशीनमेन की पेमेंट में गड़बड़ी ही मेन कारण है.

दो, तो कहीं तीन शिफ्ट
हालांकि नगर निगम के अनुसार दैनिक सफाई होती है और अभी भी हो रही है. लेकिन वक्त कम और काम ज्यादा है. इसलिए विशेष कारणों से संडे को भी ना सिर्फ निगम का ऑफिस खुला रहेगा, बल्कि सफाई कर्मचारी भी जो सिर्फ एक शिफ्ट में काम करते थे, अब एरिया वाइज कहीं दो तो कहीं तीन शिफ्ट में काम करेंगे.

कहीं उठा तो कहीं छूटा
निगम की ओर से कहा गया था कि पहले दिन ज्यादा कूड़े वाले इलाकों और जगहों पर ध्यान दिया जायेगा. पहले दिन की सफाई का आलम यह रहा कि मेन जगहों पर तो सफाई का काम जोर-शोर से होता दिखा, लेकिन इंटीरियर इलाकों में डेली रूटीन तक को फॉलो नहीं किया गया.

कचरा बना गोलंबर
इस एरिया को हम सुपर कचरा जोन कह सकते हैं. निगम द्वारा हुई बैठक में इसे भी क्रिटिकल एरिया के रूप में प्वाइंट आउट किया गया था. दरअसल, मीठापुर सब्जीमंडी, गया लाइन गुमटी और जीपीओ गोलंबर के पास का यह तिराहा है. या यूं कहें कि कचरा डंप करने की एक जगह. स्थानीय लोगों की मानें तो यहां तकरीबन पांच वर्षों से पूरा कचरा कभी नहीं उठाया गया है.