देश के बाबाओं की पहली पसंद बनी हैं महंगी लग्जरी कारें

बदला कुंभ का ट्रेंड, टेंट के भीतर लगता है वेहिकल्स का मेला

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PRAYAGRAJ: कुंभ मेले में महंगी लग्जरी कारें बाबाओं की पहली पसंद बनी हुई हैं. मेले की सडकों पर निकलने वाला बाबाओं का कापिफला श्रदृालुओं के लिए भी कौतूहल का विषय बना हुआ है. बाबाओं का जलवा इस कदर है कि 10 से 15 लाख के वेहिकल्स कॉमन हो चले हैं. उनके वाहनों पर स्टील की नंबर प्लेटों पर अखाडे का नाम और पदवी लिखवाना भी लेटेस्ट टे्रंड में शामिल हो चुका है. खुद बाबा भी इस बात को स्वीकार करते हैं. उनकी मानें तो समय के साथ खुद को बदलना जरूरी है.

कारें देखनी हैं तो यहां आइए

मेले में बाबाओं का जलवा देखना है तो काली मार्ग और त्रिवेणी मार्ग जैसे वीआईपी रूट पर जाइए. वहां उनके अखाडों के बाहर और अंदर एक से एक महंगी कारें दिख जाएंगी. इनमें मर्सिडीज बेंज, ह्यूंडई क्रेटा, फोर्ड इंडीवर, होंडा सिटी, राजेंद्र टोयोटा फाच्र्यूनर और पजेरो स्पोटृर्स जैसे महंगे वेहिकल शामिल हैं. खासकर महामंडलेश्वर, पीठाधीश्वर, महंत और मंडलेश्वरों के आश्रमों में महंगी लग्जरी कारों का लंबा चौड़ा काफिला दिख सकता है. जबकि इनोवा, महिंद्रा जायलो, स्कार्पियो जैसी स्मार्ट एसयूवी बाबाओं के लिए कॉमन ब्रांड हो चुके हैं. यह केवल उनके काफिले की शोभा बढा रहे हैं. इसके अलावा सेक्टर 12, 14, 15, 16 में लगे बाबाओं के पंडालों में भी लग्जरी कारें देखी जा सकती हैं.

बिना कापिफला नहीं निकलते संत

श्रदृधलु भी इस बात को मानते हैं कि पिछले कुंभ और इस मेले में काफी अंतर आ चुका है. 3200 हेक्टेयर में आकार ले चुके मेले में बाबाओं के आश्रम भी विशालकाय हो चुके हैं और इनके यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी इजापफा हुआ है. अब दिखावे का चलन है. खुद संत अकेले वाहनों से नही निकलते. उनके पीछे महंगी कारों का काफिला होता है. संत के वाहन पर बडी सी नंबर प्लेट और इस पर उनका पद और नाम बडे अक्षरों में लिखा हुआ है. यह बदलते समय का ट्रेंड है. इसे कुंभ में आने वाले संत, महात्मा और बाबा फॉलो करने में कहीं से पीछे नहीं हैं. उनका पसंदीदा कलर भी व्हाईट है. कुछ जगहों पर भगवा कलर में भी वाहन दिख जाएंगे.

कितने की है कौन सी कार?

मर्सिडीज बेंज- 55 से 60 लाख

पजेरो स्पोटर्स- 28 से 29 लाख

फोर्ड इंडीवर, टोयोटा फाच्र्यूनर- 27 से 34 लाख

इनोवा- 16 से 24 लाख

महिंद्रा स्कार्पियो- 10 से 17 लाख

होंडा सिटी- 10 से 15 लाख

समय के साथ बदलाव जरूरी है. यही कारण है संत महात्मा भी वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे वे अधिक तेजी से अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे. लगभग सभी संतों के पास अच्छे वाहन उपलब्ध हैं.

प्रदीपानंद गिरी जी महाराज, हरिद्वार