-प्रयागराज पहुंचे जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद महाराज ने दी जानकारी

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PRAYAGRAJ: पूरा संसार जिस आकर्षण के लिए प्रयागराज आ रहा है वह सिर्फ अध्यात्म है. इस धरा की खासियत ही ऐसी है कि यूनेस्को ने इसे अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर में शामिल किया है. हम सब गर्व से कह सकते हैं कि यहां आयोजित होने वाला कुंभ मेला सामाजिक समरसता का सबसे बड़ा पर्व है. यह बातें जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद महाराज ने सोमवार को मेला क्षेत्र स्थित अपने निर्माणाधीन शिविर की तैयारियों को देखने के बाद कही. स्वामी अवधेशानंद ने बताया कि इस समरसता का रहस्य जानने और समझने के लिए दुनिया भर के लोगों का जमावड़ा मेला की अवधि में निश्चित तौर पर होना है.

अ‌र्द्धकुंभ है लेकिन कुंभ सहज रूप से स्वीकार

सेक्टर चौदह में शिविर की तैयारियों का जायजा लेने के बाद अ‌र्द्ध कुंभ और कुंभ को लेकर स्वामी अवधेशानंद सरस्वती ने सीधे तौर पर तो कुछ नहीं कहा लेकिन इशारों में उसका अर्थ बता दिया. उन्होंने कहा कि जिस तरह सनातन संस्कृति में अन्न को भगवान माना जाता है लेकिन वह भगवान नहीं होता है. इसी तरह अतिथि को देवता की संज्ञा दी गई है लेकिन वह भी देवता तो नहीं होते है. उसी तरह अ‌र्द्ध कुंभ है लेकिन सरकार की मंशा को सहज रूप में मानना चाहिए.

चार घंटे तक लिया तैयारियों का जायजा

मेला एरिया के सेक्टर चौदह में गंगा नदी के पार प्रभु प्रेमी संघ का शिविर तैयार किया जा रहा है. जहां स्वामी अवधेशानंद सरस्वती मेला की अवधि में प्रवास करेंगे. इसी कड़ी में सोमवार को वे दोपहर एक बजे शिविर में चल रही तैयारियों का जायजा लेने के लिए पहुंचे. जहां उन्होंने सुरक्षा कवच तैयार करने के लिए बकायदा पूरा नक्शा पुलिस अधिकारियों को दिखाया. शिविर में भक्तों के लिए बनाई जा रही पर्ण कुटी को देखा. इसके अलावा उन्होंने प्रवचन पंडाल व बनाए जा रहे मंदिर का भी जायजा लिया. इस मौके पर वरिष्ठ भाजपा नेता राकेश शुक्ला सहित अन्य शिष्य मौजूद रहे.