दो बजे से मामले की सुनवाई शुरू होगी

देश के चर्चित अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद को लेकर अब तक कई याचिकाएं हो चुकी है। ऐसे में आज सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच में दोपहर दो बजे इस मामले की सुनवाई शुरू होगी। बीती सुनवाई को ध्यान में रखते हुए आज देश की सवा सौ करोड़ की जनता को उम्मीदें हैं कि जल्द ही इस मामले का निपटारा हो सकता है।

इस पीठ में अंतिम सुनवाई शुरू की जाएगी

बतादें कि इस मामले की पिछली सुनवाई बीते साल 5 दिसंबर को हुई थी। उस समय मुस्लिम पक्षकार की ओर से वकील कपिल सिब्बल ने सवाल किया था कि इस मामले की सुनावाई के लिए आखिर इतनी जल्दी क्यों है? इस पर शीर्ष न्यायालय ने साफ कहा कहा था कि आठ फरवरी 2018 से इन याचिकाओं पर इस पीठ में अंतिम सुनवाई शुरू की जाएगी।  

अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद 1528 से

अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद 1528 से चला आ रहा है। इस विवाद ने सबसे ज्यादा उग्र रूप तब धारण किया जब 6 दिसंबर 1992 में हजारों की संख्या में कार सेवकों ने अयोध्या पहुंचकर बाबरी मस्जिद ढहा दिया था। इस घटना के बाद सांप्रदायिक दंगे हुए। इसके बाद मस्जिद की तोड़-फोड़ की जांच के लिए एम.एस. लिब्रहान आयोग का गठन हुआ।

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मस्जिद के नीचे मंदिर के अवशेष होने का दावा

2002 में अयोध्या के विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर उच्च न्यायालय के तीन जजों की पीठ ने सुनवाई शुरू की। इसके बाद 2003 इलाहबाद उच्च न्यायालय के निर्देशों पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अयोध्या में खुदाई की। मस्जिद के नीचे मंदिर के अवशेष होने के प्रमाण मिलने का दावा। इसी साल अदालत का फैसला, मस्जिद के विध्वंस को उकसाने वाले सात हिंदू नेताओं को सुनवाई के लिए बुलाया जाए।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को रिपोर्ट सौंपी

इसके बाद 2004 लालकृष्ण आडवाणी ने अयोध्या में मंदिर निर्माण की बीजेपी की प्रतिबद्धता दोहराई। 2005 संदिग्ध इस्लामी आतंकवादियों ने विस्फोटकों से भरी एक जीप का इस्तेमाल करते हुए विवादित स्थल पर हमला किया। सुरक्षा बलों ने पांच आतंकवादियों को मार गिराया। वहीं 2009 लिब्रहान आयोग ने गठन के 17 साल बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंपी।

कोर्ट के बाहर मध्यस्थता करने को तैयार

2010 सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहबाद उच्च न्यायालय को विवादित मामले में फैसला देने से रोकने वाली याचिका खारिज करते हुए फैसले का मार्ग प्रशस्त किया। इसी साल इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। 2017 राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की पेशकश की थी। चीफ जस्टिस जे एस खेहर ने कहा है कि अगर दोनों पक्ष राजी हो तो वो कोर्ट के बाहर मध्यस्थता करने को तैयार हैं।

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Posted By: Shweta Mishra

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