छ्वन्रूस्॥श्वष्ठक्कक्त्र : 'एकलव्य' सटीक निशाना साध कर एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि जीत सकते हैं. यह मौका उन 'एकलव्यों' के लिए है जिन्होंने धनुर्विद्या न किसी ट्रेनिंग से सेंटर से सीखी है और न ही प्रोफेशनल तीरंदाज हैं. यह प्रतियोगिता है तो बिल्कुल तीरंदाजी की तरह, प्रतिभागियों को निशाना भी तीर से लगाना है, लेकिन इसके नियम प्रोफेशनल तीरंदाजी से काफी अलग हैं. 12 फरवरी को यह प्रतियोगिता पोंडेहासा (सुंदरनगर के समीप) में आयोजित होगी. इसमें प्रथम पुरस्कार के रूप में एक लाख की मोटी रकम के साथ दांपा परगना ट्रॉफी से भी दी जाएगी.

सात को मिलेगा पुरस्कार

बाबा तिलका माझी मिलन संघ (बीटीएमएस) पोंडेहासा की ओर से शहीद तिलका माझी की याद में इस 'जोस तु†ा' प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है. इसमें एक लाख की मोटी रकम तो प्रथम पुरस्कार के रूप में दी ही जाएगी. इसके अलावा द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को 50 हजार रुपये, तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले को 25 हजार, चौथा स्थान प्राप्त करने वाले को 20 हजार, पांचवा स्थान प्राप्त करने वाले को 10 हजार, छठा स्थान प्राप्त करने वाले को दो हजार व सातवां स्थान प्राप्त करने वाले को एक हजार रुपये दिये जाएंगे.

महिलाओं के लिए भी मौका

जोस तु†ा प्रतियोगिता में महिलाओं के लिए भी पारंपरिक तीर-धनुष से निशाना साधने की प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी. इसमें प्रथम पुरस्कार पांच हजार रुपये दिये जाएंगे. जबकि 11 फरवरी को पुरुषों के लिए होगी.

पेड़ से काटी गई डाल पर साधते निशाना

पारंपरिक 'जोस तु†ा' में आदिवासी समाज के पारंपरिक हथियार तीर-धनुष से निशाना साधना होता है. इसमें पूजा अर्चना कर पेड़ की एक पतली व लंबी डाली काटी जाती है, डिसे मैदान में गाड़ दिया जाता है. उस डाली पर तीर से निशाना साधना पड़ता है. जोस तु†ा प्रतियोगिता में 11 को पेड़ की डाली पर तो निशाना साधने की प्रतियोगिता होगी ही आधुनिक तीरंदाजी में इस्तेमाल होने वाले बोर्ड पर भी निशाना साधा जाएगा.