उत्तर कोरिया, 1950 से
ईरान से संबंध अपने परमाणु कार्यक्रमों के कारण उत्तर कोरिया पर 1950 से ही संयुक्त राष्ट्र संघ ने आर्थिक प्रतिबंध लगा रखा है। जैसे जैसे समय बीत रहा है उस पर प्रतिबंध और कड़े होते जा रहे हैं। अभी हाल ही में लगातार मिसाइल परीक्षण और परमाणु परीक्षण के कारण सुरक्षा परिषद् ने उस पर प्रतिबंध और कड़ा कर दिया है। इससे उत्तर कोरिया को तेल निर्यात में 90 फीसदी तक कटौती हो जाएगी। उत्तर कोरिया से कोई देश सामान नहीं खरीद सकेगा। उसके हथियार निर्माण में शामिल बैंकों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी और सामान तस्करी में शामिल शिपिंग कंपनियों के खिलाफ भी कार्रवाई शामिल है।
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क्यूबा, 1960 से
1958 में फीदेल कास्त्रो की सशस्त्र क्रांति के बाद क्यूबा में कम्युनिस्ट सरकार बनी। तब से अमेरिका के साथ इसका 36 का आंकड़ा रहा। अमेरिका ने इस देश से हर प्रकार के कारोबारी रिश्ते तोड़ लिए। संयुक्त राष्ट्र्र के जरिए इस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध भी लगाए। हद तो तब हो गई जब क्यूबा ने 1962 में रूसी मिसाइलों को अपनी धरती पर तैनाती की मंजूरी दे दी। हालांकि 2015 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और क्यूबा के प्रमुख राउल कास्त्रो की मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच एक नये रिश्ते की शुरुआत हुई। लेकिन पुराने ज्यादातर प्रतिबंध अब भी बरकरार रहेंगे।
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ईरान, 1979 से
1979 में तेहरान के यूएस दूतावास में बंधक संकट के बाद से ही ईरान अमेरिका के आंखों की किरकिरी बना हुआ है। एक तो अमेरिका से लोहा लेने की हिमाकत करने और दूसरे परमाणु कार्यक्रमों को अंजाम देने के चलते इस देश पर यूएन ने आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए। हालांकि समय-समय पर इस देश पर आर्थिक प्रतिबंधों में कमी आती रही है। ईरान ने भी अपने परमाणु कार्यक्रमों में कमी के संकेत दिए।
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सूडान, 1997 से
सूडान पर आर्थिक संकट की कहानी 1997 से शुरू होती है। जब इसने अमेरिका के प्यारे कुवैत को संकट में डालने की कोशिश की। आरोप है कि इस देश ने पड़ोसी देशों की सरकारों को अस्थिर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यह देश इस्लामी कट्टरता को बढ़ावा देता है। यहां से कट्टरपंथी आसपास के देशों में लोगों का जीवन हराम कर रखा है। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओमाबा ने इस देश पर आर्थिक प्रतिबंध और कड़े कर दिए।
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सीरिया, 2004 से
सीरिया के हालात किसी से छिपे नहीं है। रूस इसे मदद करता है और अमेरिका इस देश से उतना ही जलता है। फिलहाल इस देश पर 2004 से ही आर्थिक प्रतिबंध लगे हुए हैं। आरोप है कि यह देश आतंकियों को पनाह देता है। उनकी मदद करता है। इस देश के कुछ हिस्से पर आईएसआईएस आतंकियों का कब्जा हो गया था। उन्होंने सीरिया के कुछ इलाकों को अपने कब्जे में लेकर उसे इस्लामिक स्टेट घोषित कर दिया था। हालांकि रूस और अमेरिका के हवाई हमलों के बाद वहां के हालात बदल गए हैं। फिर भी इस देश पर लगातार आर्थिक प्रतिबंध लगे हुए हैं।
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