यूपी बोर्ड के स्कूलों को है अपडेट लैब का इंतजार

पुराने इक्विमेंट्स और बेहतर सुविधाओं की कमी

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PRAYAGRAJ: एजूकेशन को बेहतर बनाने के लिए यूपी बोर्ड ने एनसीईआरटी पैटर्न को अपना लिया है। इसके बाद भी साइंस के लिए जरूरी लैब की व्यवस्था नहीं होने से बच्चों में साइंस को लेकर रूझान कम हो रहा है। इसी की जंाच के लिए दैनिक जागरण आईनेक्स्ट की टीम ने सिटी के कई स्कूलों के साइंस लैब का रियलिटी चेक किया। इस दौरान साइंस लैब के अपडेशन से लेकर सामानों की कमी की बात सामने आयी। एडेड स्कूलों की स्थित सबसे खराब दिखी।

केपी ग‌र्ल्स इंटर कालेज

दैनिक जागरण आईनेक्स्ट की टीम दोपहर एक बजे केपी ग‌र्ल्स इंटर कालेज पहुंची। सबसे पहले कैमेस्ट्री लैब देखा। लैब में कई इक्यूपमेंट मिले। स्कूल की टीचर्स ने बताया कि मैनेजमेंट की ओर से यहां काफी हद तक सामानों की कमी को दूर किया जाता है। लेकिन वर्तमान समय के हिसाब से हाईटेक लैब की कमी है। यदि इसे समय के हिसाब से कर दिया जाए तो रिजल्ट भी बेहतर होगा। फिजिक्स लैब और बायलोजी लैब की स्थिति भी ऐसी ही मिली। कई सामान रख रखाव की कमी से खराब हो गए थे। टीचर्स ने बताया कि कम से कम एक लैब असिस्टेंट होना चाहिए। मौजूदा समय में टीचर्स ही बच्चों को प्रैक्टिकल भी कराते है और सामानों की देखभाल भी करते हैं।

एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज

केपी ग‌र्ल्स इंटर कालेज से टीम एंग्लो बंगाली इंटर कालेज पहुंची। वहां कैमेस्ट्री लैब की हालत देखकर होश ही उड़ गए। लैब में पर्याप्त लाइट नहीं मिली। यही नहीं लैब में बच्चों के प्रयोग के लिए मैनेजमेंट की मदद और टीचर्स के सहयोग से थोड़े बहुत इक्यूपमेंट की व्यवस्था की गई थी। लैब काफी बड़ी होने के बाद भी सालों पुराने सामान रखे थे। प्रिंसिपल स्वास्तिक घोष ने बताया कि वर्तमान जरूरत के हिसाब से स्कूलों में लैब की व्यवस्था होनी चाहिए। इसमें काफी पैसे लगते हैं। ऐसे में इंटर कालेजों में साइंस के प्रति बच्चों में उत्साह व रूचि बढ़ाने के लिए जरूरी है कि लैब को बेहतर किया जाए।

टीचर्स के लिए हो वर्कशाप

एग्लोबंगाली इंटर कालेज के प्रिंसिपल स्वास्तिक बोस खुद ही बायलोजी के लेक्चरर भी हैं। उन्होंने बताया कि टीचर्स के लिए बोर्ड की तरफ से समय-समय पर साइंस वर्कशाप का आयोजन होना चाहिए। इससे टीचर्स भी नए चीजों के प्रति अपडेट रह सकेंगे। उन्होंने बताया कि यूपी बोर्ड के सिलेबस में इस बार डीएनए इंट्रैक्शन जोड़ा गया है। तब उन्हें खुद इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में अपने प्रोफेसर के पास जाना पड़ा। उनसे बारीकियां समझने के बाद स्कूल में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। ऐसे में बाकी स्कूलों के टीचर्स क्या पढ़ा रहे होंगे इसका अंदाजा आप आसानी से लगा सकते हैं।

इन कमियों को दूर किया जाए

कैमेस्ट्री लैब के सेल्फ को मार्बल या सिमेंटेड बनाना चाहिए। सनमाइका से बने सेल्फ ज्यादा दिन नहीं चलते

कैमेस्ट्री के लैब में गैस पाइप लाइन अभी तक नहीं बनी है

लैब में पर्याप्त संख्या में जरूरत के हिसाब से एग्जास्ट होना आवश्यक है

टीचर्स और स्टूडेंट्स का रेसियो सही करना जरूरी

कैमेस्ट्री में साल्ड, मिक्सचर आदि की कमी समय-समय पर दूर करना जरूरी

इंटर कालेजों के लैब को आइडियल कंडिशन में बनाने से बच्चों को मिलेगा लाभ

फिजिक्स लैब में मौजूद मीटर को समय के साथ बदलने की जरूरत है

प्रत्येक लैब में खुद की माइक्रो लाइब्रेरी होनी जरूरी

लैब में असिस्टेंट होना बेहद जरूरी

आज की जरूरत के हिसाब से लैब में प्रोजेक्टर होना चाहिए। (इससे स्टूडेंट्स को समझाने के लिए जरूरी डाइग्राम आदि बनाने में लगने वाला समय बचाया जा सकेगा)

समय के साथ इक्यूपमेंट में होना चाहिए बदलाव

स्कूलों के लैब में आज तक नहीं उपलब्ध हो सके गैस बर्नर