लखनऊ (एएनआई)। उत्तर प्रदेश के कानपुर के नजदीक चौबेपुर में शुक्रवार सुबह पुलिस टीम इनामी गैंगस्टर विकास दुबे को पकड़ने गई थी। इस दाैरान हुई मुठभेड़ के दौरान शहीद आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए हैं। इस घटना को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने ट्विटर पर कहा, उत्तर प्रदेश उन शहीद पुलिसकर्मियों को कभी नहीं भूलेगा, जिन्होंने अपने कर्तव्यों का निर्वहन बेमिसाल साहस के साथ किया था। उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। मुठभेड़ में जान गंवाने वाले आठ पुलिसकर्मी सीओ देवेंद्र कुमार मिश्रा, एसओ महेश यादव, चौकी इंचार्ज अनूप कुमार, सब-इंस्पेक्टर नेबुलाल, कांस्टेबल सुल्तान सिंह, राहुल, जितेंद्र और बबलू हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP), एचसी अवस्थी ने सुबह कहा था कि अपराधियों को पकड़ने के लिए ऑपरेशन जारी है, जो पुलिस पर गोली चलाने के बाद भाग गए थे।


बदमाशों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान के लिए बुलाया गया
इस मामले में आसपास के कई थानों के बलों को बदमाशों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान के लिए बुलाया गया। आईजी कानपुर मोहित अग्रवाल ने कहा कि जिले की सीमाओं को सील कर दिया गया है।अब तक सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस टीम में लगभग 50 पुलिस कर्मी शामिल थे, जो सुबह 3.30 बजे के आसपास विकास दुबे की मौजूदगी के बारे में सूचना मिलने के बाद गांव गए थे। बताया जा रहा कि बदमाशों ने पुलिस वालों का रास्ता रोकने के लिए एक जेसीबी मशीन रास्ते में खड़ी कर दी थी। गिरोह ने घर की छत से गोलीबारी शुरू करने के साथ पुलिसकर्मियों पर पथराव भी किया। गैंगस्टर विकास दुबे, 60 से अधिक आपराधिक मामलों में वांछित हैं। अक्टूबर 2001 में, उसने शिवली पुलिस स्टेशन के अंदर भाजपा के वरिष्ठ नेता और तत्कालीन अनुबंध श्रम बोर्ड के अध्यक्ष संतोष शुक्ला की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

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