आगरा. सुविधाओं से बेदखल हैं. योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा, फिर भी अपना नेता चुनने का जोश देखते ही बन रहा था. कुछ ऐसी ही नजारा शनिवार को मतदान के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में देखने को मिला.

लड़ामदा में हुआ कुछ ऐसे मतदान

आगरा ग्रामीण विधानसभा के गांव लड़ामदा के बड़ा नगला की रहने वाली ममता शाम करीब पांच बजे दर्जनों महिलाओं के साथ मजदूरी कर वापस घर लौट रही थीं. तभी दैनिक जागरण आई नेक्स्ट टीम से उनकी मुलाकात हुई. उनसे पूछा गया कि क्या वोट किया था. ममता और उसके साथ मौजूद दर्जनों महिलाओं ने कहा कि सुबह ही उन्होंने पहले मतदान किया था. उसके बाद वे अपने अपने काम पर चलीं गई थी. उनसे पूछा कि वोट किस उद्देश्य से दिया है. इसका उनके पास कोई जवाब नहीं था.

मतदान से दूरी भी ठीक नहीं

ममता कहती हैं कि उसके पास न तो राशन कार्ड है और न ही शौचालय. सुविधाओं के नाम पर अभी तक कुछ भी नहीं मिला है. फिर भी मतदान किया है. वो इसलिए किया है कि मतदान न करना भी ठीक नहीं है. वो कहतीं हैं कि अपना फर्ज अदा किया है, फिर चाहे नेता अपना कर्तव्य निभाएं या नहीं. ममता ऐसा कहने वाली अकेली नहीं है. यहां की दर्जनों महिलाओं ने यह बात कहीं.

नेता होते हैं मतलबी

इस गांव की महिलाओं का कहना था कि उन्हें तो ये भी नहीं पता था कि जिस चुनाव चिह्न के आगे बटन दबाया है, उस प्रत्याशी का नाम क्या है. नेता मतलबी होते हैं. वोट के समय पर आते हैं. हाथ जोड़ कर वोट देने की भीख मांगते हैं. समता देवी कहती हैं कि चुनाव के दौरान नेता पैरों को भी पकड़ लेते हैं.