आगरा(ब्यूरो)। शहरवासियों को मच्छर के प्रकोप से बचाने के लिए नगर निगम की ओर से फॉगिंग कराई जाती है। मौजूदा समय में निगम के पास 14 फॉगिंग मशीन हैं जो फॉगिंग मशीन वाहन हैं, उनमें भी दो तरह की मशीन हैं। इनमें 12 बड़ी और दो छोटी मशीन हैं। 12 फॉगिंग मशीन वाहन को 45 लीटर डीजल दिया जाता है। ये वाहन सीएनजी पर चलते हैं। वहीं दो छोटी मशीनों को 36 लीटर डीजल दिया जाता है। ये डीजल वाहन हैं। ऐसे में 36 में से छह लीटर डीजल का इस्तेमाल वाहन के लिए होता है।

टीपी नगर में डाला जाता है डीजल
फॉगिंग करने वाले सभी वाहन कोठी मीना बाजार के पास एमएंडटी के बराबर से आईडीएच ऑफिस में खड़े होते हैं। इन वाहन में दो टैंक होते हैं। एक पानी के लिए व दूसरा डीजल के लिए। रोज ये वाहन करीब पांच किमी दूर डीजल लेने के लिए ट्रांसपोर्ट नगर स्थित एमएंडटी पर पहुंचते हैं। नगर निगम के सभी वाहनों में यहां से ही डीजल रीफिल किया जाता है। फॉगिंग वाहन यहां से डीजल भरकर दोबारा कोठी मीना बाजार के पास स्थित आईडीएच ऑफिस (लोहामंडी एमएंडटी के बराबर में) की ओर रुख करते हैं। यहां जब वह शाम को फॉगिंग के लिए निकलते हैं, उससे पहले दवा डाली जाती है। निगम अधिकारियों की मानें तो दवा डलने के बाद डीजल का किसी और अन्य कार्य में यूज नहीं किया जा सकता। दवा मिला डीजल अगर वाहन में डाला जाता है तो वाहन के इंजन को काफी नुकसान पहुंचता है।

गड़बड़ी की आशंका
यही पूरा सिस्टम गड़बड़ी की आशंका को बल देता है। डीजल लेने के बाद दवा लेने के लिए फॉगिंग वाहन करीब पांच किमी का सफर तय करते हैं। उसके बाद भी दवा के इंतजार में घंटों ऑफिस पर खड़े होते हैं। ऐसे में डीजल के दुरुपयोग से इंकार नहीं किया जा सकता। बता दें, फॉगिंग में हो रहे खेल को लेकर बुधवार को निगम के सदन में पार्षदों ने भी हल्ला बोला था। आरोप लगाया था कि डीजल चोरी कर बेचा जा रहा है।

एक हफ्ते में 100 वार्ड होते हैं कवर
रोज एक फॉगिंग वाहन को एक वार्ड में भेजा जाता है। यानी डेली 14 फॉगिंग वाहन 14 वार्ड में भेजे जाते हैं। 100 वार्ड को कवर करने में हफ्ते भर का समय लगता है।

फॉगिंग के लिए इस तरह मिक्स होता है डीजल, पानी, दवा
फॉगिंग वाहनों में जो टैंक लगे हैं, उनमें 120 लीटर डीजल भी आ सकता है। निगम अधिकारियों के अनुसार बड़ी गाड़ी में लगी फॉगिंग मशीन की कैपेसिटी 60 लीटर प्रति घंटे की है। पूर्व में शहर में 60 लीटर डीजल प्रतिदिन फॉगिंग के लिए दिया जाता था। लेकिन पिछले दिनों शहर में एक्यूआई का स्तर बढऩे के चलते इसे 45 लीटर प्रतिदिन कर दिया गया। 45 लीटर में 2.25 लीटर मालाथाइन 95 परसेंट केमिकल मिलाया जाता है। इसके साथ ही मशीन में वाटर टैंक भी लगा होता है। जो फॉगिंग मशीन के लिए कूलेंट का काम करता है। पानी, केमिकल और डीजल का मशीन के जरिए धुआं उठता है।


100 वार्ड शहर में
14 फॉगिंग वाहन
25 पोर्टेबल फॉगिंग मशीन
20 टैंकर करीब हर महीने की डीजल की खपत
01 टैंकर में आता है 12 हजार डीजल

शहर में 14 फॉगिंग मशीन से फॉगिंग कराई जाती है। 45 लीटर डीजल गाड़ी में यूज नहीं किया जाता बल्कि इसे फॉगिंग मशीन में डाला जाता है। डीजल में ही केमिकल डालकर फॉगिंग कराई जाती है।
अतुल भारती, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम

इन सवालों के जवाब तलाशना जरूरी?

- जब डीजल टीपी नगर स्थित एमएंडटी पर डाला जाता है तो केमिकल यहां क्यों नहीं डाला जा सकता?
- टीपी नगर से डीजल लेने के बाद कोठी मीना बाजार स्थित आईडीएच ऑफिस पहुंचने तक डीजल चोरी नहीं होगी? इसकी मॉनिटरिंग की क्या प्रक्रिया है?