आगरा (ब्यूरो)। शहर की आबादी भले ही लगभग 72 हजार है लेकिन बीच शहर से लेकर दूर बस्ती में भी कारोबारी अपना धंधा संचालित करते हैं। मंगलवार की शाम को कारखाने में काम करते समय दोनों चांदी कारीगरों की मौत सिलेंडर फटने से हो गई, जबकि तीसरे कारीगर की हालत अभी गंभीर बनी है। लेकिन इसके बाद भी जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।

व्यापारियों के घरों में बने गोदाम
पांच फरवरी को नमक की मंडी स्थित एक रिहायशी मकान के गोदाम में लगी आग ने पोल खोलकर रख दी। लोगों की मानें तो सुभाष बाजार से लेकर रावत पाड़ा तक व्यवसाय करने वाले कारोबारी अपना गोदाम या तो आवास में बना रखे हैं या फिर रिहायशी मकानों को किराए पर ले रखा है। इससे कभी भी बड़ा हादसा होने की संभावना बनी रहती है।

कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
व्यापारी घर और गोदाम में सामान को स्टोर करके दुकान पर भेजते हैं और दूसरे स्थानों पर भी पहुंचाते हैं। इसके अलावा छत्ता, मंटोला, जगदीशुपरा, लोहामंडी, सदरभट्टी, हींग की मंडी, नमक की मंडी, शाहगंज, भोगीपुरा समेत दर्जनों स्थानों पर छोटे-मोटे कारखाने भी चल रहे हैं। इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

जीवन पर मंडरा रहा संकट
इन गलियों मेें रहने वाले लोगों के जीवन पर संकट मंडराता रहता है। वर्ष 2014 में लुहारगली में आग से करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ था। इस घटना के बाद प्रशासन ने ऐसे स्थानों की लिस्ट तैयार कराने की पहल की लेकिन बाद में इस कार्रवाई पर विराम लग गया। प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ सकता है।

व्यवसाय करने वाले हो रहे चिन्हित
रिहायशी मकानों से व्यवसाय करने वाले लोगों की सूची तैयार करने के लिए संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा जाएगा। ताकि ऐसे स्थानों को लिस्टिड किया जा सके। खुद के फायदे के लिए दूसरे लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ इन इलाकों में अगर कोई बड़ा हादसा होता है तो प्रशासन की ओर किसी तरह की मदद नहीं की जाएगी।

आग बुझाने के लिए नहीं रास्ता
शहर के गलियों और घनी बस्तियों के बीच बने गोदामों में यदि आग लगी तो बुझाने के लिए सभी को कड़ी मश्क्कत करनी पड़ती है। शहर में ऐसे कई स्थान हैं जहां कारोबारियों ने गोदाम बनाने के साथ ही आग से जुड़ा व्यवसाय कर रहे हैं। ऐसे स्थानों पर अगर कभी आग लगी तो उसे बुझाने के लिए रास्ता ही नहीं मिलेगा। इससे आग विकराल रूप धारण कर लोगों के मेहनत से बने आशियाने को राख के ढेर में तब्दील कर सकती है।

बिल्डिंग गिरने का डर बना
कोतवाली स्थित लुहार गली में सैकड़ों साल पुराने मकान बने हैं, इससे कभी भी मकान ढह सकते हैं। ऐसे दुकानदार और मकान मालिक के बीच तनाव बन रहा है।

पूर्व मेें हो चुके हंै हादसे
वर्ष 2014, लुहारगली
-लुहार गली की एक दुकान में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। इससे दुकानों में रखा करोड़ों रुपए का माल जलकर नष्ट हो गया।

वर्ष 2017, मंटोला
-मंटोला क्षेत्र में जूते के मटेरियल के गोदाम में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई, इससे पूरा मटेरियल जलकर राख हो गया।

वर्ष 2018, रावतपाड़ा
-दिवाली से ठीक आठ दिन पहले पटाखों के मटेरियल में आग लग गई, इससे लाखों रुपए का नुकसान हो गया।

वर्ष, 2022, छत्ता
-आग में एक पटाखा की दुकान भी चपेट में आ गई। स्थानीय लोगों के मुताबिक दुकान में चायनीज पटाखे थे। चार दमकलों के बाद आग पर काबू पाया गया।


संकरी गलियों में अवैध रूप से केमिकल का कार्य करने वाले लोगों पर कार्यवाई की जाएगी। इस संबंध में थाना प्रभारियों को दिशा निर्देश जारी किए गए हैं कि वे अपने सघन इलाकों में इस तरह का काम करने वालों पर नजर रखें।
सूरज राय, डीसीपी सिटी जोन