आगरा(ब्यूरो)। गाइडलाइंस में कहा गया है कि छात्रों पर कंपटीशन का बहुत प्रेशर होता है इसीलिए कोचिंग सेंटर अब छात्रों की मानसिक स्थिति को भी ध्यान में रखने के लिए कदम उठाएंगे। उन पर ज्यादा प्रेशर नहीं डाला जाएगा।

क्या कहती हैं नई गाइडलाइंस
इसी के साथ कोचिंग सेंटर्स को अपने साथ अनुभवी साइकोलॉजिस्ट, साइकोथैरेपिस्ट और काउंसलर्स को भी शामिल करने का करने के लिए कहा गया है। कोचिंग सेंटर के लिए बनाई गई नई गाइडलाइंस के अनुसार कोई भी कोचिंग सेंटर 16 साल से कम उम्र के छात्र को एडमिशन नहीं दे सकेगा। इसके साथ ही ट्यूटर्स की शैक्षिक योग्यताओं को भी ध्यान में रखना होगा साथ ही कोचिंग सेंटर के स्थान पर एक स्क्वायर मीटर एक स्टूडेंट के लिए जगह देनी होगी। अगर कोचिंग सेंटर इन गाइडलाइंस को फॉलो नहीं करता तो पहली बार के उल्लंघन पर 25000 दूसरी बार में 1 लाख का जुर्माना लगाया जाएगा।


अब कोचिंग सेंटर्स पर 16 साल तक के बच्चों पर रोक लगाई गई है, ये सरकार का सराहनीय निर्णय है। इसके तहत कोचिंग सेंटर्स संचालक ऐसे बच्चों का एनरोलमेंट नहीं करा सकेंगे।
डॉ। सुशील गुप्ता, अप्सा अध्यक्ष

गाइडलाइन के अनुसार, प्रोफेशनल कोर्सों के लिए ट्रेनिंग देने वाले कोचिंग सेंटर्स अब गुणवत्ता पर फोकस कर सकेंगे। स्टूडेंट्स के बेहतर भविष्य के लिए ये आवश्यक है। हालात बेहतर हो जाएंगे।
सुमन लता यादव, डायरेक्टर श्री आरएस पब्लिक स्कूल