आगरा (ब्यूरो). कोरोना महामारी ने एजुकेशन को पूरी तरह से बदल दिया है। पढ़ाई का तरीका हो या खुद को अपडेट रखने की बात हो, स्टूडेंट्स से लेकर टीचर्स तक ने नए बदलावों को अपनाया है। ऑनलाइन क्लासेज अब आम बात हो गई है। कॉलेज ही नहीं, स्कूल्स में भी टीचर्स ने ऑनलाइन क्लासेज को अडॉप्ट किया है। एजुकेशन में अब टेक्नोलॉजी का समावेश हुआ है। इस पर डिस्कस करने के लिए बुधवार को अमृता विश्व विद्यापीठम और दैनिक जागरण आईनेक्स्ट ने आगरा के प्रतिष्ठित स्कूल्स के प्रिंसिपल्स के साथ 'प्रिंसिपल मीटÓ का आयोजन किया।

कैसे हासिल किया जा सकता है टारगेट
प्रिंसिपल मीट में डॉ। शौरी कुटप्पा, एकेडमिक मैनेजर एंड काउंसलर अमृता विश्व विद्यापीठम ने सेशन को मॉडिरेट किया। उन्होंने सभी गेस्ट के साथ मिलकर जानने का प्रयास किया कि कैसे खुद के स्तर से बदलाव लाकर संस्थान को और बेहतर कर सकते हैं। मौजूदा समय में एजुकेशन सेक्टर में किस तरह की चुनौतियां हैं? प्रिंसिपल्स को रोज किन तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है? अगले 8 से 10 महीनों में एजुकेशन सेक्टर में किस तरह का बदलाव देखने को मिलेगा? कुछ ऐसे ही बिन्दुओं पर उन्होंने प्रिंसिपल्स के साथ डिस्कशन किया। इस दौरान उन्होंने ब्रेन स्टार्मिंग सेशन के साथ प्रिंसिपल्स को अपना लक्ष्य हासिल करने के बारे में बताया। साथ ही प्रिंसिपल्स से भी जानने की कोशिश की कि कैसे आपसी को-ऑर्डिनेशन से टारगेट को पाया जा सकता है।


नई शिक्षा नीति पर भी डिस्कशन
प्रिंसिपल मीट के दौरान प्रिंसिपल्स ने यह बताया कि किस तरह अपने बिहेवियर और अप्रोच में बदलाव लाकर स्टूडेंट्स का बेहतर भविष्य बनाने के साथ संस्थान को भी आगे ले जाया जा सकता है। चुनौतीपूर्ण हालात में बच्चों के लिए एजुकेशन को आसान बनाया जा सकता है। नई शिक्षा नीति पर भी इस दौरान चर्चा हुई। लेफ्ट-राइट, हिम्युलिटी, टेक्नोलॉजी, कम्युनिकेशन, पेशेंस, एक्शन, रिफ्लेक्शन और लर्निंग को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ाने की बात की गई। खास बात यह रही कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए इंट्रेस्टिंग एक्टिविटी का भी सहारा लिया गया। इस दौरान प्रिंसिपल्स में एक्जाम्पल सेट करना, सेंसिटिव एंड ह्यूमन अप्रोच, हैप्पी एनवायरमेंट और एडाप्टेबिलिटी पर सहमति बनी।

1. कोविड महामारी के दौरान बच्चों का नुकसान न हो इसके लिए ऑनलाइन क्लासेज लगाई गईं। इसका फायदा भी हुआ। लेकिन, पै्रक्टिकली बच्चों की प्रॉपर स्टडी स्कूल में ही संभव है। इसलिए अब क्लासेज शुरू हो गईं हैं।
संजय शर्मा, को-ऑर्डिनेटर, होली पब्लिक स्कूल

2. कोविड महामारी ने एजुकेशन को काफी हद तक बदल दिया है। पहले जहां पढ़ाई सिर्फ किताबों तक सीमित थी, अब वह ऑनलाइन हो गई है। पढऩे के लिए बच्चे अब मोबाइल का सहारा ले रहे हैं।
ईरा शर्मा, ईरा मॉडर्न पब्लिक स्कूल

3. एजुकेशन फील्ड में बहुत बदलाव हुआ है, जो काफी चैलेजेंस हंै। बच्चों व उनके पेरेंट्स के सपोर्ट से ही यह संभव है। स्कूल अपने स्तर पर बहुत काम कर रहा है। हालांकि इस पर 360 डिग्री वर्क करने की जरूरत है।
-याचना चावला, प्रिंसिपल, प्रिल्यूड पब्लिक स्कूल

4. कोरोना महामारी के दौरान बच्चों को कई तरह की चुनौतियों से जूझना पड़ा। इसमें सबसे अधिक उन्हें आर्थिक रूप से जूझना पड़ा। संसाधन जुटाने के लिए कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
-वीके अग्रवाल, प्रिंसिपल, वीके पब्लिक स्कूल

5. बच्चा जो भी करना चाहता है, वह पेरेंट्स करने नहीं देते हैं। कॅरियर बनाने में फाइनेंस भी दिक्कतें पैदा करती हैं। इस कारण पेरेंट्स दुविधा में हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में बच्चों और पेरेंट्स के बीच गैप बढ़ जाता है, ऐसे में स्कूल की भूमिका काफी बढ़ जाती है।
- निखिल जैन, को-ऑर्डिनेटर, एमडी जैन इंटर कॉलेज

6. सबसे अधिक बच्चों को आज मोटिवेट करने की जरूरत है। ऑनलाइन क्लासेज के दौरान कई बच्चों के बेसिक क्लियर नहीं हो सके। इसका असर काफी लंबा उन पर रहेगा।
- आयुष खंडेलवाल, डायरेक्टर, जॉन्स मेरी पब्लिक स्कूल


7. नई शिक्षा नीति एजुकेशन के लिए गेम चेंजर साबित होगी। अभी मौजूदा समय में टीचर्स को कई तहर के चैलेंजेस को फेस करना होता है। अब शिक्षा में टेक्नोलॉजी का समावेश हुआ है।
- चाल्र्स क्लेरेंस, प्रिंसिपल, डॉ। एमपीएस वल्र्ड स्कूल

8. डिस्कशन काफी अच्छा रहा। गेम के माध्यम से पता चला कि कॅरियर बनाने के लिए टारगेट सामने होना जरूरी है। स्टूडेंट्स को भी यह सिखाने से उनको काफी फायदा होगा।
- प्रेम सेंगर, वाइस प्रिंसिपल, रामचंद्र सर्राफ इंटर कॉलेज


9. सबसे बड़ी चुनौती बच्चों की एजुकेशन में आए गैप को दूर करना है। इस सेशन से जानने को मिला अगर सभी मिलकर काम करेंगे तो स्टूडेंट्स को बेहतर कॅरियर आप्शन चुनने में मदद मिलेगी।
- सुमन लता यादव, प्रिंसिपल, आरएस पब्लिक स्कूल

10. टीचर्स और स्टूडेंट्स सभी का बिहेवियर कैसा है, यह बहुत मायने रखता है। इसका फायदा आगे चलकर स्टूडेंट्स को ही मिलेगा। इस सेशन से पता चला कि साथ मिलकर काम करने से सब अच्छा होता है।
- हेमलता अग्रवाल, प्रिंसिपल, सेठ श्यामलाल इंटर कॉलेज

11. इस सेशन से जाने को मिला कि स्टूडेंट्स का सेफ फ्यूचर बनाने में कैसे काम किया जाए और उन्हें लक्ष्य तक कैसे ले जाना है। बच्चों को भी बेहतर कॅरियर ऑप्शन मिलेगा।
- गुंजन आर्य, प्रिंसिपल, डीसी वैदिक इंटर कॉलेज